पृथ्वी दिवस : पृथ्वी के साथ छलबल ठीक नहीं
आज पृथ्वी दिवस हमें याद दिलाता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है। ‘हमारी शक्ति, हमारा ग्रह’ थीम के साथ यह दिन अक्षय ऊर्जा और सतत विकास की ओर प्रेरित करता है। वनों…
पृथ्वी दिवस : एक चेतावनी, हम नहीं बदले तो पेट्रोल से महंगा होगा पानी
पृथ्वी दिवस अब उत्सव नहीं, चेतावनी बन चुका है। जल संकट गहराता जा रहा है, नदियां सूख रही हैं, पहाड़ उजड़ रहे हैं और शहरीकरण प्रकृति का संतुलन बिगाड़ रहा है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यदि प्राकृतिक संसाधनों का…
जेपी आंदोलन से पर्यावरण संघर्षों तक सक्रिय रहीं अनुराधा सिंह का निधन
सादगी, समर्पण और प्रकृति से गहरे जुड़ाव की मिसाल थीं भोपाल, 19 अप्रैल। विख्यात सर्वोदय नेता, विचारक और चिंतक आचार्य राममूर्ति जी की पुत्री, पर्यावरण शिक्षण और सजीव खेती से जुड़ी अनुराधा सिंह ( 80 वर्ष) का आज सुबह निधन…
महिला आरक्षण : सशक्तिकरण की पहल या राजनीतिक रणनीति?
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार का विशेष सत्र बुलाना जहां एक ओर नारी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं इसके पीछे राजनीतिक रणनीति के सवाल भी उठ रहे हैं। परिसीमन, जनगणना और चुनावी…
डॉ. अंबेडकर : सामाजिक न्याय से राष्ट्रीय एकता तक की प्रखर दृष्टि
डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके व्यापक राष्ट्रवादी चिंतन को समझने का समय है। सामाजिक न्याय के पुरोधा अंबेडकर ने संविधान, अधिकारों की सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता को सर्वोपरि रखा। आज के विभाजित…
नदी, नारी और नीर : सनातन विकास की राह
“यह रिवरफ्रंट विकास नदियों की हत्या है, नदियों को नालों में बदल देना है।” यह केवल एक तीखी टिप्पणी नहीं, बल्कि जल-संरक्षण के क्षेत्र में दशकों से काम कर रहे राजेंद्र सिंह की गहरी पीड़ा और चेतावनी है। वे मानते…
14अप्रैल, 1972 : जब बागियों ने छोड़ी बंदूकें, तब शुरू हुई चंबल में शांति की नई बयार
चंबल घाटी, जो कभी भय और हिंसा का प्रतीक थी, वहाँ संत विनोबा भावे और बाद में जयप्रकाश नारायण के प्रयासों से अहिंसा और परिवर्तन की ऐतिहासिक धारा प्रवाहित हुई। 1960 से शुरू हुआ बागियों का आत्मसमर्पण आंदोलन 1972 में…
डॉ. अम्बेडकर और लोहिया एक ही धारा को आगे बढ़ाने वाले विचारक
डॉ. भीमराव अम्बेडकर और राममनोहर लोहिया भारतीय सामाजिक-राजनीतिक चिंतन के दो ऐसे महान स्तंभ रहे हैं, जिनकी वैचारिकी में अनेक समानताएं दिखाई देती हैं। दोनों ने सामाजिक न्याय, समानता और आर्थिक विषमता के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उनके बीच संवाद…
सदाचार के तावीज़ से परसाई के बोल गूँजे इप्टा के राज्य सम्मेलन में
अनूपपुर में संपन्न हुआ भारतीय जन नाट्य संघ का राज्य सम्मेलन हरनाम सिंह वैचारिक रूप से जनप्रतिबद्ध कला और जन संस्कृति का संरक्षक और संवाहक भारतीय जन नाट्य संघ का मध्य प्रदेश का दसवां राज्य सम्मेलन छत्तीसगढ़ की सीमा…
युद्ध के दबाव में कृषि
अमरीका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़ा गया निरर्थक युद्ध अब असर दिखाने लगा है। भरे-पूरे, जीवित देशों की बरबादी और असंख्य मौतों के अलावा तेल की कमी से पैदा हुए कृषि, खाद्य, परिवहन और तरह-तरह की जरूरतों के संकट ने…









