समाचार स्‍वास्‍थ्‍य

वायु प्रदूषण घातक स्वास्थ्य संकट बन चुका है : अमूल्‍य निधि

वायु प्रदूषण घातक स्वास्थ्य संकट बन चुका है : अमूल्‍य निधि

व्यवसायिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रभाव को लेकर जारी अभियान का चौथा दिन जिलहरीघाट, जबलपुर 4 अप्रैल। विश्व स्वास्थ्य दिवस पर जन स्वास्थ्य अभियान मध्यप्रदेश द्वारा आज प्रेमानंद आश्रम, जिलहरीघाट में व्यवसायिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर परिचर्चा आयोजित...

व्यवसायिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रभाव को लेकर जारी अभियान का चौथा दिन

जिलहरीघाट, जबलपुर 4 अप्रैल। विश्व स्वास्थ्य दिवस पर जन स्वास्थ्य अभियान मध्यप्रदेश द्वारा आज प्रेमानंद आश्रम, जिलहरीघाट में व्यवसायिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर परिचर्चा आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जन स्वास्थ्य इंडिया के राष्ट्रीय संयोजक अमूल्य निधि ने अपने उद्बोधन में कहा कि वायु प्रदूषण आज हमारे समय का सबसे मौन लेकिन सबसे घातक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। शहर हों या गांव, हर जगह हवा में घुले अदृश्य जहरीले कण, जैसे औद्योगिक धुआं, वाहनों का उत्सर्जन, थर्मल पावर प्लांटों की राख, न्यूक्लियर पावर प्लांट से निकलने वाला रेडियोधर्मी घातक कचरा और घरेलू ईंधन का धुआं लोगों की सांसों पर भारी पड़ रहा है। प्रदूषण को रोकना अब केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं रहा,यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय पत्रिका लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में भारत में 17 लाख मौतें वायु प्रदूषण के कारण हुईं है।

अमूल्य निधि ने बताया कि जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया विश्व स्वास्थ्य दिवस पर देश के पंद्रह राज्यों में व्यवसायिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रभाव को लेकर 1 अप्रैल से एक सप्ताह का अभियान चला रहा है।

वायु प्रदूषण के कारण अब केवल श्रमिक या फेक्ट्रियों / कारखानों में काम करने वाले ही नहीं बल्कि आस पास की आम जनता भी शिकार बन रही है। कोयला खदानों के पास किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 1,202 लोगों में से 14.3 प्रतिशत श्रमिकों और 7.8 प्रतिशत स्थानीय निवासियों के फेफड़ों की कार्यक्षमता असामान्य थी और एक्स-रे में पल्मोनरी फाइब्रोसिस के मामले सामने आए। खंभात में, ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑक्यूपेशनल हेल्थ’ ने एक अध्ययन किया, जिसमें पाया गया कि सिलिकोसिस के मरीजों में से 10% से ज़्यादा लोग ऐसे थे जो मजदूर नहीं थे – वे या तो मजदूरों के परिवार के सदस्य थे या उनके पड़ोसी।

See also  पर्यावरण के संरक्षक हैं आदिवासी

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2024–25 की रिपोर्ट के अनुसार, 29 जिला मुख्यालयों में वायु गुणवत्ता खराब हुई है, जिसमें इंदौर जैसे “स्वच्छ” शहर भी शामिल हैं। अलीराजपुर और बैतूल जैसे आदिवासी बहुल जिलों में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में वृद्धि देखी जा रही है।

जन संघर्ष मोर्चा महाकौशल के विवेक पवार ने कहा कि इंदौर में दूषित पानी के कारण 30 से अधिक लोगों की मृत्यु और 500 से अधिक लोगों के बीमार होने की घटनाएं इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है।

चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दादु लाल कुङापे ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में घातक परमाणु परियोजना बना कर सरकार भोपाल गैस त्रासदी को दोहराने जा रही है।

बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा ने कहा कि वायु प्रदूषण अब भविष्य की नहीं, आज की आपदा है। अगर संसद, सरकार और समाज ने इसे स्वास्थ्य आपातकाल की तरह नहीं लिया, तो इसकी कीमत हमें सांसों से चुकानी पड़ेगी।

इस अवसर पर जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया द्वारा पर्यावरणीय और व्यावसायिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर जन जागरूकता के लिए एक विस्तृत पर्चा भी जारी किया गया जिसमें भारत में पर्यावरणीय  और व्यावसायिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर केन्द्रित किया गया है।

एडवोकेट अंजना कुररीया, विवेक अवस्थी, अमित पांडेय,  सरवन रजक,राम प्रसाद काजले, शारदा यादव ,शिव कुमार चौधरी, भुवन बर्मन, हरीओम नागेश, मनोहर लाल जाटव ने भी अपनी बात रखी।

कार्यक्रम में शामिल राजीव गांधी पंचायती राज संगठन, जिंदगी बचाओ अभियान हरदा – नर्मदापुरम, आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच,जन संघर्ष मोर्चा बालाघाट- मंडला, बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ,चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति, किंदरई परमाणु परियोजना विरोधी संघर्ष समिति घंसौर सिवनी, स्वराज अभियान के प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग किया है कि हवा, पानी और मिट्टी के प्रदूषण को रोकने के लिए नियामक प्रणाली को मजबूत किया जाए और पर्यावरण के मानकों को सख्ती से लागू करना सुनिश्चित हो।सुरक्षित और साफ पीने के पानी तक सबकी पहुंच की गारंटी हो और देश भर में पीने के पानी के सभी स्रोतों की जांच किया जाए और रिपोर्ट सभी को उपलब्ध कराया जाए। जलवायु परिवर्तन को कम करने और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को लागू करना सुनिश्चित हो। ऐसे न्यूक्लियर और थर्मल पावर प्लांट्स के विस्तार को रोकना जो पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है।

जुड़ें - हमारे व्हाट्सएप चैनल से

सप्रेस मीडिया - नवीनतम आलेख, रिपोर्ट, समाचार अपडेट सीधे अपने व्हाट्सएप पर प्राप्त करें।

व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें →

निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन करें

आज के दौर में निष्पक्ष, स्वतंत्र और जन-सरोकार की पत्रकारिता को जीवित रखना बड़ी चुनौती है। विज्ञापनदाताओं और कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त होकर आप तक सही और सटीक खबरें पहुंचाना हमारा मुख्य उद्देश्य है। हमारी स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए आपके आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। आपकी दी हुई छोटी-सी सहयोग राशि हमें सच्ची पत्रकारिता करते रहने का संबल देगी।

सहयोग राशि →

नवीन आलेख