नई दिल्ली, 21 जुलाई। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (ट्रेड डील) के विरोध में ‘देश बचाओ मोर्चा’ द्वारा आज किसान घाट पर बुलाई गई एक दिवसीय ‘किसान महापंचायत’ को दिल्ली पुलिस ने बलपूर्वक रोक दिया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु और कश्मीर समेत देशभर से आ रहे हजारों किसानों को पुलिस ने कार्यक्रम स्थल तक पहुँचने से पहले ही हिरासत में ले लिया, जिसके चलते राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं को सील कर पूरी दिल्ली को एक पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।
प्रशासन ने किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे, जिसके तहत उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से लगने वाले सभी बॉर्डर सील कर दिए गए। शंभू और खनौरी बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने भारी सीमेंटेड बैरिकेड्स और कंक्रीट स्लैब लगा दिए तथा रास्तों को पूरी तरह ब्लॉक करने के लिए जेसीबी मशीनें तैनात कर दीं। इसी बीच, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आ रहे वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल (वी.पी.आई.) के कार्यकर्ताओं की ट्रेन को साहिबाबाद स्टेशन पर ही रोक दिया गया, जो घंटों वहीं खड़ी रही, जबकि वी.पी.आई. के संस्थापक विश्वात्मा भरत गांधी की टीम को भी किसान घाट जाने से रोक कर गांधी दर्शन के अंदर भेज दिया गया।

राजघाट और किसान घाट के आसपास दिल्ली पुलिस द्वारा कई प्रमुख मार्गों को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया गया था और सुबह 9 बजे से ही किसान घाट पर पहुँचने वाले किसानों की भारी नारेबाजी के बीच गिरफ्तारियां शुरू हो गईं। ‘देश बचाओ मोर्चा’ की कोआर्डिनेशन कमेटी के सदस्य सरदीप सिंह फूल ने पुलिस हिरासत से ही संदेश जारी कर बताया कि कमेटी के प्रमुख सदस्य सरदार वी.एम. सिंह, गुरनाम सिंह चढूनी और वे स्वयं गिरफ्तार हो चुके हैं। हिरासत में लिए गए इन किसानों को बसों में भरकर राजीव गांधी स्टेडियम (बवाना), बुराड़ी पार्क और गांधी दर्शन जैसी जगहों पर ले जाकर रखा गया, जिन्हें अस्थायी जेलों में तब्दील कर दिया गया था। पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में बवाना स्टेडियम ले जाए गए कई किसानों ने बसों से उतरने से साफ इनकार कर दिया और ऐलान किया कि जब तक उन्हें वापस उनके गंतव्य पर नहीं छोड़ा जाता, वे बसों के भीतर ही अपना सत्याग्रह जारी रखेंगे।

किसानों ने पुलिस पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि इस महापंचायत की पूर्व सूचना विधिवत रूप से दिल्ली पुलिस को दी गई थी और बीती रात ही एक एसीपी स्तर के अधिकारी ने धरना स्थल का जायजा लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में पूरे सहयोग का आश्वासन दिया था, लेकिन सुबह अचानक पुलिस ने अपना रुख बदल लिया।
‘देश बचाओ मोर्चा’ की संचालन समिति के सदस्य और ‘किसान ब्रिगेड’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश पोहरे ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने अपनी तीखी प्रतिक्रिया में कहा कि यह महान किसान नेता चौधरी चरण सिंह का समाधि स्थल है और अगर यहाँ किसानों का ही आना वर्जित कर दिया जाए, तो इससे अधिक दुखद बात और क्या हो सकती है। उन्होंने सरकार को डरा हुआ बताते हुए कहा कि महज एक सांकेतिक प्रदर्शन से खौफ खाकर शांतिपूर्ण किसानों को गिरफ्तार करना उसकी कायरता का प्रमाण है।
अंततः किसान नेताओं की चेतावनी और भारी रोष के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा। प्रशासन के साथ हुई बातचीत के बाद किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी और सरदार वी.एम. सिंह को रिहा कर दिया गया। इसके साथ ही, दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में जहाँ भी किसान साथियों को गिरफ्तार किया गया था, उन सभी को भी सुरक्षित रिहा कर दिया गया है। हालाँकि, किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक यह ‘ट्रेड डील’ रद्द नहीं होती, उनका यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।


