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सफलता की हर व्यक्ति की परिभाषा को राष्ट्र और विश्व के कल्याण से जोड़ना होगा – लेफ्टिनेंट कर्नल सिन्हा

सफलता की हर व्यक्ति की परिभाषा को राष्ट्र और विश्व के कल्याण से जोड़ना होगा – लेफ्टिनेंट कर्नल सिन्हा

अभ्यास मंडल की 66 वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला इंदौर, 19 मई। लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज कुमार सिन्हा ने कहा है कि जब समुदाय की परिभाषा हर व्यक्ति अलग-अलग रखेगा तो विवाद होंगे। हमें अपनी सफलता की परिभाषा का लक्ष्य राष्ट्र और विश्व...

अभ्यास मंडल की 66 वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला

इंदौर, 19 मई। लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज कुमार सिन्हा ने कहा है कि जब समुदाय की परिभाषा हर व्यक्ति अलग-अलग रखेगा तो विवाद होंगे। हमें अपनी सफलता की परिभाषा का लक्ष्य राष्ट्र और विश्व की सेवा रखना होगा।

वे आज यहां अभ्यास मंडल की 66 वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यान माला के चतुर्थ दिवस आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। उनका विषय था – सफलता के मायने और जीवन का लक्ष्य।

उन्होंने सबसे पहले तो अपनी बात की शुरुआत सफलता शब्द से की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए सफलता का मायना अलग-अलग होता है। विश्व के इस पूरे समाज में हर व्यक्ति का अलग धर्म, अलग कर्म और अलग लक्ष्य है। यहां धर्म से मतलब किसी भगवान या पूजा पद्धति से नहीं है बल्कि जीवन के धर्म से है।

उन्होंने कहा कि इतिहास के हर काल खंड में कुछ लोग ऐसे हुए हैं जो की स्वयं को समग्र का हिस्सा नहीं मानते थे। इन लोगों ने अधर्म को ही धर्म का नाम देकर सभी को स्वीकार करवा दिया। अपनी बात को उदाहरण के साथ समझाते हुए सिन्हा ने कहा कि चोरी गलत है लेकिन बुद्धि के जानकारों ने चोरी को चैरिटी बना दिया और वह सम्मानजनक काम हो गया। समाज में सबसे बड़ी विसंगति यह आ गई है कि मेरा भगवान ही सर्वश्रेष्ठ है और तुम्हारे भगवान को मैं नहीं मानता हूं। इस पागलपन से पिछले 1500 साल में कई बार नरसंहार हुए हैं।

उन्होंने कहा कि जब दो देशों की सफलता की परिभाषा अलग होगी तो फिर उन देशों के बीच में युद्ध होगा। यदि समाज में परिभाषा अलग होगी तो विवाद होगा। परिवार, समुदाय और व्यक्ति यह कभी भी एक दूसरे से अलग नहीं हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आज हम अपनी उपलब्धि को अपनी सफलता मान लेते हैं, यह सही नहीं है। हकीकत तो यह है कि हम नियति के द्वारा दिए गए दायित्व का निर्वहन करें, वही सबसे बड़ी सफलता है। किसी एक व्यक्ति की सफलता पूरे समाज को सफल नहीं बना सकती है लेकिन पूरे समाज के सफलता हर व्यक्ति को सफल बना सकती है। उन्होंने कहा कि आज हर तरफ लाभ कमाने की बात कही जाती है लेकिन हमारे इतिहास में लाभ को भी शुभ के साथ जोड़कर हासिल करने की बात कही गई है। इस हकीकत को हमें न केवल याद रखना है बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ी को भी याद दिलाना है। उन्होंने कहा कि आज हमारे आदर्श गलत है इस कारण से आजकल सभी लोग कहते हैं कि हमारे बच्चे सही रास्ते पर नहीं चल रहे हैं।

अपनी बात का समापन करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 से पहले हम ज्यादा स्वतंत्र थे। हकीकत तो यह है कि 1947 से हम परतंत्र होना शुरू हो गए।

प्रारंभ में अतिथि का स्वागत वैशाली खरे, किशन सोमानी, हंसमुख गांधी और बसंत सोनी ने किया। संचालन क्रुणाल भंवर ने किया। अतिथि को स्मृति चिन्ह पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी और सुधाकर काले ने भेंट किया। अंत में आभार प्रदर्शन स्टेट प्रेस क्लब मध्य प्रदेश के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने किया।

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