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असंगठित मजदूरों की सुरक्षा पर लापरवाही, स्वास्थ्य निगरानी का अभाव चिंता का विषय

गुजरात में खतरनाक अपशिष्ट और सिलिकोसिस का बढ़ता संकट, मोरबी में उठी आवाज

मोरबी, 03 अप्रैल। जन स्वास्थ्य अभियान भारत (JSAI) द्वारा विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 1 से 7 अप्रैल 2026 तक व्यावसायिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर सात दिवसीय राष्ट्रीय अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य मजदूरों के स्वास्थ्य अधिकारों के प्रति व्यापक जनजागरूकता पैदा करना तथा नीतिगत स्तर पर ठोस हस्तक्षेप की मांग को मजबूती देना है।

इसी क्रम में आज गुजरात के मोरबी में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें व्यावसायिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में यह तथ्य प्रमुखता से सामने आया कि कार्यस्थलों पर मजदूर लगातार विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं और दुर्घटनाओं का सामना कर रहे हैं, जबकि उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्थाओं का अभाव है।

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता चिराग ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी “खतरनाक एवं अन्य अपशिष्टों के उत्पादन एवं प्रबंधन पर राष्ट्रीय सूची (2022-23)” के अनुसार, देशभर में 83,682 इकाइयाँ खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करती हैं, जिनमें से 23,057 इकाइयाँ केवल गुजरात में स्थित हैं। इस प्रकार गुजरात इस सूची में प्रथम स्थान पर है, जो पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की गंभीरता को स्पष्ट करता है।

अभियान से जुड़े साथी हरीशभाई ने जानकारी दी कि खनन सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS), कारखाना परामर्श सेवा एवं श्रम संस्थान महानिदेशालय (DGFASLI) तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में 26,584 मजदूर सिलिकोसिस से प्रभावित हैं। यह एक गंभीर व्यावसायिक रोग है, जो श्रमिकों के जीवन के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो रहा है।

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कार्यक्रम को सफल बनाने में मोरबी के अनेक सिलिकोसिस पीड़ितों, स्थानीय एवं अन्य राज्यों से आए मजदूरों तथा जागरूक नागरिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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