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फार्मा, निजी क्षेत्र और मेडिकल टूरिज़्म को बढ़ावा, बुनियादी जन-स्वास्थ्य फिर हाशिये पर

बजट 2026 पर जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली 01 फरवरी। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था को लगभग पूरी तरह नज़रअंदाज़ करता है, जबकि आम नागरिकों खासकर मध्यम वर्ग और हाशिये पर खड़े समुदायों के लिए यही पहली और सबसे अहम ज़रूरत है। इसके विपरीत, बजट में फार्मा सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें निर्यात पर विशेष ज़ोर है। मेडिकल टूरिज़्म और आयुष उत्पादों के निर्यात को भी प्रोत्साहित किया गया है, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया। जिससे यह सवाल उठता है कि यह स्वास्थ्य बजट वास्तव में किसके हित में है।

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI)  की ओर से अमूल्य निधि, गौरांगा महापात्र, संजीव सिन्हा, राही रियाज, चंद्रकांत यादव ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इस वर्ष स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए कुल आवंटन ₹99,859 करोड़ से बढ़ाकर ₹1,04,559 करोड़ किया गया है। यह बढ़ोतरी केवल नाममात्र की है। महंगाई और बढ़ती स्वास्थ्य ज़रूरतों को ध्यान में रखें तो वास्तविक रूप से स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च में कोई ठोस इज़ाफ़ा नहीं दिखता। CAG की हालिया ऑडिट रिपोर्ट्स भी यह दर्शाती हैं कि स्वास्थ्य क्षेत्र में स्वीकृत आवंटन और वास्तविक खर्च के बीच लगातार 11 से 14 प्रतिशत तक की कमी रही है।

GDP के अनुपात में स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च पिछले तीन वर्षों से लगभग स्थिर बना हुआ है—0.31 प्रतिशत से घटकर 0.29 प्रतिशत। यह उस लंबे समय से किए जा रहे वादे से बहुत दूर है, जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य पर GDP का कम से कम 5 प्रतिशत खर्च करने की बात कही गई थी। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) का कहना है कि जब तक स्वास्थ्य पर सार्वजनिक निवेश को इस स्तर तक नहीं बढ़ाया जाता, तब तक देश में एक मज़बूत और सार्वभौमिक स्वास्थ्य प्रणाली खड़ी नहीं की जा सकती।

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JSAI ने यह भी ज़ोर देकर कहा कि स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न सेस और अतिरिक्त राजस्व का उपयोग स्पष्ट रूप से केवल जन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किया जाना चाहिए और इसके संग्रह तथा खर्च में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए। संगठन के अनुसार, राज्यों पर स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बड़ा बोझ होता है, लेकिन उनकी वित्तीय क्षमता को मज़बूत किए बिना केंद्र सरकार की कोई भी स्वास्थ्य नीति ज़मीनी स्तर पर प्रभावी नहीं हो सकती।

बजट में फार्मा सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें निर्यात पर विशेष ध्यान दिया गया है। मेडिकल टूरिज़्म और आयुष उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा दिया गया है। जन स्वास्थ्य अभियान का कहना है कि यह दिशा स्वास्थ्य को नागरिक अधिकार की बजाय बाज़ार आधारित उत्पाद के रूप में देखने की प्रवृत्ति को मज़बूत करती है, जिससे आम नागरिकों, खासकर मध्यम वर्ग और हाशिये पर पड़े समुदायों की प्राथमिक स्वास्थ्य ज़रूरतें पीछे छूट जाती हैं।

जन स्वास्थ्य अभियान  इंडिया ने नए NIMHANS, आयुर्वेद केंद्रों की स्थापना और कैंसर व दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर टैक्स में छूट जैसे प्रावधानों का स्वागत किया है। हालांकि, JSAI ने आगाह किया है कि बिना मज़बूत नियमन के इन पहलों का लाभ आम मरीज़ों तक पहुँचना सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। जामनगर में WHO के पारंपरिक चिकित्सा केंद्र के उन्नयन के प्रस्ताव को भी व्यापक जन स्वास्थ्य रणनीति से जोड़ने की आवश्यकता बताई गई है।

पैरामेडिकल स्टाफ को मज़बूत करने के कदम को सकारात्मक बताते हुए भी संगठन ने कहा कि बीमा और कलेक्शन आधारित व्यवस्थाएँ सार्वजनिक स्वास्थ्य में निरंतर सरकारी निवेश का विकल्प नहीं हो सकतीं। यदि प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचा, सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएँ और सरकारी अस्पताल मज़बूत नहीं किए गए, तो स्वास्थ्य असमानताएँ और गहरी होंगी।

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जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया का मानना है कि बजट 2026 ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की प्राथमिकता में जन-स्वास्थ्य अभी भी पीछे है। जब तक स्वास्थ्य को लाभ और निर्यात से आगे बढ़कर एक सार्वजनिक जिम्मेदारी के रूप में नहीं देखा जाएगा, तब तक “सबके लिए स्वास्थ्य” का लक्ष्य केवल एक नारा ही बना रहेगा।

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