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धरती के लिए सोचो, गांवों से शुरू करो – सस्टेनेबिलिटी की सीख

विकसित भारत के लिए सस्टेनेबल इंटर्नशिप विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

इंदौर, 17 अप्रैल । इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स विभाग में जिम्मी मगिलिगन मेमोरियल सस्टेनेबल डेवलपमेंट सप्ताह के दूसरे दिन “विकसित भारत के लिए सस्टेनेबल इंटर्नशिप” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। यह कार्यक्रम सतत विकास के क्षेत्र में युवाओं की भूमिका, उनके इंटर्नशिप अनुभवों और जमीनी नवाचारों को साझा करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत में स्कूल के निदेशक प्रो. कन्‍हैया आहूजा ने अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य वक्ताओं में पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन, स्‍वाहा स्‍टार्टअप के डॉ. समीर शर्मा, सामाजिक उद्यमी बबीता रहेजा तथा स्कूल के छात्र  सिद्धार्थ लोधी और तुहिना झा शामिल थे।

जनक पलटा मगिलिगन का संदेश: जीवनशैली बदलिए, धरती बचाइए

डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने अपने उद्बोधन में ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के साथ किये अपने कार्य, अपनी स्वास्थ्य यात्रा, तथा ‘नो-वेस्ट वेडिंग’ जैसी पहल के माध्यम से सतत विकास के प्रति अपनी आजीवन प्रतिबद्धता को साझा किया। उन्होंने संदेश दिया कि वैश्विक स्तर पर सोचें, स्थानीय स्तर पर कार्य करें और बदलाव की शुरुआत स्वयं से करें।

उन्‍होंने कहा कि “सस्टेनेबल डेवलपमेंट केवल विचार नहीं, एक जीवन पद्धति है। जब आदिवासी महिलाएं 1000 सोलर कुकर लेकर अपने गांवों में लौटीं, तो उनका स्वास्थ्य, आमदनी और जीवनस्तर सुधरा – जंगल बचे और पर्यावरण को राहत मिली।” उन्होंने ज़ोर दिया कि आने वाली पीढ़ी तभी बदलाव ला सकती है जब वह तय करे कि उनके हर काम में सस्टेनेबिलिटी की सोच हो।

जनक पलटा मगिलिगन ने अपने दिवंगत पति जिम्मी (जेम्स) मगिलिगन के साथ साझा कार्यों का भी उल्लेख किया। सौर ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में जिम्मी का समर्पण और नवाचार बरली संस्थान की पहचान बन गया। उनके प्रयासों से यह संस्थान न केवल वैश्विक स्तर पर जाना गया, बल्कि यहां से प्रशिक्षित 321 इंटर्न आज सतत विकास की मशाल आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने सनावदिया में सोलर और विंड एनर्जी स्टेशन बनाकर गांव को ऊर्जा-स्वावलंबी बनाया, और कैसे आज भी वह स्टेशन गांव को रोशन कर रहा है।

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इंटर्नशिप से नवाचार की ओर

डॉ. समीर शर्मा ने अपने नि:शुल्क मेंटरशिप कार्यक्रम और ‘स्वाहा’ पहल की जानकारी दी, जो जीरो वेस्ट और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है। यह पहल जनक पलटा मगिलिगन के मार्गदर्शन में युवाओं को प्रेरित कर रही है।

बबीता रहेजा ने साझा किया कि उनके बेटे वरुण रहेजा ने जनक दीदी के साथ इंटर्नशिप करते हुए “रेहेजा सोलर फूड कंपनी” की स्थापना की। यह कंपनी ग्रामीण समुदायों को सौर ऊर्जा के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण में आत्मनिर्भर बना रही है।

छात्रों की प्रस्तुतियाँ: व्यावहारिक ज्ञान का प्रभाव

स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के छात्र सिद्धार्थ लोधी और तुहिना झा ने अपने सस्टेनेबल इंटर्नशिप अनुभव साझा किए। सिद्धार्थ ने सोलर ड्रायर की तकनीक से आर्थिक व सामाजिक लाभों की जानकारी दी, जबकि तुहिना ने भूमि पुनर्जनन (लैंड रेस्टोरेशन) पर आधारित अपनी केस स्टडी प्रस्तुत की।

सामूहिक चेतना से परिवर्तन संभव

कार्यक्रम के अंत में विभागाध्‍यक्ष प्रो. कन्‍हैया आहूजा ने कहा, “आज का यह आयोजन न केवल एक बौद्धिक संगोष्ठी था, बल्कि युवाओं को सस्टेनेबिलिटी की दिशा में गंभीरता से सोचने और कार्य करने की प्रेरणा भी है। हम इस दिशा में सस्टेनेबल इंटर्नशिप को संस्थानिक रूप देने की दिशा में काम करेंगे।”

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