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पर्यावरण के खतरों से निरंतर आगाह करने में मीडिया की भूमिका महत्‍वपूर्ण

बदनावर में पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन

बदनावर, 25 जनवरी। पर्यावरण डाइजेस्ट मासिक पत्रिका के प्रकाशन के गौरवशाली 37 साल पूरे होने के अवसर पर बुधवार शाम यहां चंद्रलीला पैलेस में बदनावर नगर परिषद के सहयोग से पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अतिथि रूप में पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक आरके श्रीवास्तव, एसडीएम दीपक चौहान, आंचलिक पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश टांक एवं विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन की पर्यावरण प्रबंधन अध्ययनशाला के प्राध्यापक डॉ मुकेश वाणी मुख्य वक्ता थे।

इस अवसर पर विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन की पर्यावरण प्रबंधन अध्ययनशाला के प्राध्यापक डॉ. मुकेश वाणी ने सिलसिलेवार पर्यावरण बिगड़ने के दुष्परिणामों से अवगत कराया तथा पर्यावरण के क्षेत्र में मीडिया की भूमिका का उल्लेख किया। आपने कहा कि दुनिया को प्रदूषित करने के कई कारक है, किंतु पर्यावरण बिगड़ने की समस्या दिनों दिन गंभीर होती जा रही है। खेती किसानी में पराली जलाने से देश भर में पर्यावरण बिगड़ने का दुष्परिणाम आज सर्वाधिक रूप से सामने आ रहे हैं। इस तरह के खतरों से निरंतर आगाह करने में प्रिंट एवं सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ग्रामीण क्षेत्र में भी परंपरागत मीडिया के माध्यम से जागरूकता पैदा की जा रही है। आज भी संचार क्रांति के बावजूद गांवों में इसका महत्व बरकरार है।

पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक आरके श्रीवास्तव ने कहा कि मेरे कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार की पर्यावरण वाहिनी योजना लागू की गई थी। जिसके सुखद परिणाम मिले थे। आपने कहा कि आपके मन में जो भी अच्छा विचार आए या कार्य करें तो उसे अपने तक ही सीमित नहीं रखें। बल्कि जिम्मेदारीपूर्वक आगे बढ़ाने का प्रयास करें। ताकि औरों को भी इसका फायदा मिल सके। हर व्यक्ति में एक शिक्षक होता है। उसे अपने ज्ञान की सीमा को बढ़ाकर स्थानीय समस्याओं को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। आज हर जगह नदी, तालाब खराब हो रहे हैं। अपने स्तर पर प्रयास कर उन्हें बचाकर ही पर्यावरण को सुरक्षित कर सकेंगे। इस दिशा में उदासीन रहे तो आगामी वर्षों में हम गर्मी के दिनों में शुद्ध पेयजल के भी मोहताज हो जाएंगे। अच्छा कार्य करने के लिए हमें हमेशा सजग रहना चाहिए तथा जो भी इस दिशा में सक्रिय है, उनसे प्रेरणा लेकर जुड़ना चाहिए।   

एसडीएम दीपक चौहान ने झाबुआ इलाके की हरियाली को बचाने में स्‍थानीय लोगों की भूमिका व जागरूकता का उल्लेख किया। उन्‍होंने कहा कि आज समय आ गया है जब हमें घर परिवार के अलावा हरियाली बनाए रखने के लिए भी समय देना चाहिए। इसके लिए पारिवारिक लगाव जरूरी है।    

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कार्यक्रम में पत्रकार रमेश टांक ने ग्रामीण पत्रकारिता की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण के बारे में ग्रामीण क्षेत्र से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। हमें आसपास का पर्यावरण बचाने के लिए पेड़-पौधो व परिंदों की भी चिंता करना होगी। इस मौके पर बड़नगर में गो संवर्धन के क्षेत्र में सक्रिय सुनीता भाटी ने भी संबोधित किया।

पर्यावरण डाइजेस्ट के संपादक डॉ. खुशालसिंह पुरोहित ने स्वागत भाषण में पत्रिका के लंबे सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि हर दिन कुछ ना कुछ नया घटित होता है। हमने 26 जनवरी 1987 को पर्यावरण डाइजेस्ट का प्रकाशन शुरू किया था। उस समय मीडिया में पर्यावरण के बारे में कवरेज बहुत कम होता था। हमने रचनात्मक एवं वैचारिक पत्रकारिता की जरूरत मानकर इसकी शुरुआत की थी। 37 साल से लगातार प्रकाशन के मायने है कि हमें इस क्षेत्र में सामाजिक स्वीकृति मिली है।

प्रारंभ में अतिथियों ने मां सरस्वती एवं तुलसी पौधे पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरूआत की। डॉ पुरोहित एवं अमृत लाल पाटीदार, कल्पेश पुरोहित  ने अतिथियों का स्वागत किया। एवरग्रीन संस्था की सदस्यों ने गीत प्रस्तुत किया। संस्था की सदस्य सारिका पटेल व अन्य को शाल, श्रीफल से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन सुजीत धोड़पकर ने किया। आभार माना वरिष्ठ पत्रकार क्रांतिकुमार वैद्य उज्जैन ने। पर्यावरण प्रेमी अमृतलाल पाटीदार ने अतिथियों को अलग-अलग किस्म के पौधे भेंट किए। कार्यक्रम में वरिष्ठ अभिभाषक सुरेश राजपुरोहित, जीपी सिंह, केसी यादव, कपिल कानवन, गोपाल पुरोहित, जयेश राजपुरोहित समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं मीडियाकर्मी मौजूद थे।

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