गरीब से गरीब के नाम पर सभी को एलपीजी सब्सिडी से बाहर कर दिया गया है। पहले तो नेक काम के नाम पर सब्सिडी छुड़वाई गयी और अब वो गायब ही है। आज एक सिलेंडर की कीमत 1053 रुपये है जो गरीब तो क्या ज्यादातर लोगों की पहुँच के बाहर है। और भी डरावनी बात ये है कि लोग भूल गए हैं कि एलपीजी सब्सिडी कभी उनका अधिकार हुआ करती थी! इन्ही सवालों के संदर्भ में पेश है सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी टीम व्दारा तैयार ‘हमारा पैसा हमारा हिसाब‘ का नया एपिसोड।

अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया
लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास केवल संघर्षों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नैतिक दुविधाओं का भी इतिहास है, जहाँ एक ओर सिद्धांतों के लिए जीवन दांव पर लगा होता है और दूसरी ओर वही जीवन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी

