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सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

अहिंसक, सत्याग्रही आंदोलन को बदनाम करना फासिस्ट सरकार की साजिश – प्रफुल्ल सामंतरा

नर्मदा घाटी में संवाद यात्रा का आरंभ

जीवन नगर 15 सितंबर। “नर्मदा बचाओ आंदोलन ने सही विकास की नई परिभाषा देश, दुनिया को दी है। एक लोकतांत्रिक, अहिंसक आंदोलन का आदर्श निर्माण किया है। हम नक्सलवाद को नहीं मानते, लेकिन नक्सलवादियों से भी संवाद करते है। सशस्त्र आंदोलन से सफलता नहीं मिलेगी, यह उन्हें समझाना चाहते है।‘’

आज केंद्र में मौजूद सरकार स्वयं फासिस्ट सरकार है। इनका पूंजीपति और जाति-धर्मवाद (कैपिटलिस्ट और कम्युनल) के नाम पर चलने वाला ‘फासिज़्म’ है। संविधान को खत्म कर लोकतांत्रिक ढांचा तोड़ना और जल-जंगल-जमीन जैसे संसाधन कार्पोरेट्स के हवाले करना यह उनका एजेंडा है। इस फासिज़्म से देश को बचाना हो तो इन दोनों को चुनौती देनी होगी। और यही काम मेधा पाटकर कर रही है। मेधा पाटकर केवल नर्मदा बचाओ आंदोलन की नहीं, सारे देश की है। इसलिए आंदोलन को बदनाम करने की साजिश चल रही है।”

यह बातें ओडिसा के लोकशक्ति अभियान के नेता, गोल्डमैन पुरस्कार प्राप्त सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले देश के अग्रणी पर्यावरणविद् प्रफुल सामंतरा ने कहीं। वे नर्मदा बचाओ आंदोलन और नर्मदा नवनिर्माण अभियान द्वारा नर्मदा घाटी में चल रही संवाद यात्रा का आरंभ करते हुए महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के शहादा तहसील के जीवन नगर में  बोल रहे थे। उसके पूर्व वहाँ की नर्मदा जीवनशाला को संवाद यात्रा ने भेंट दी और जीवनशाला के विद्यार्थियों से मिलकर जीवनशाला के कार्य का ब्यौरा लिया।

इस अवसर पर नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता सुश्री मेधा पाटकर ने आंदोलन के पिछले 37 वर्षों के कार्य का ब्यौरा लेते हुए कहा कि आज भी पानी, बिजली के सरकार के दावे झूठे साबित हुए है। नर्मदा का पानी प्रदूषित हुआ है। विस्‍थापितों का पुनर्वास भी अधूरा है। नर्मदा नवनिर्माण अभियान द्वारा पुनर्वास के साथ साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, मत्स्योत्पाद, वन अधिकार, भूमि अधिकार के कार्य किये है और कर रहे है। नये विकल्प खड़े किए हैं, हमारा संघर्ष रचनात्मक है।

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नर्मदा नवनिर्माण अभियान की विश्वस्त और जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की समन्वयक सुनीति सुर ने, नर्मदा नवनिर्माण अभियान के कार्य पर हो रहे झूठे आरोपों का खंडन करते हुए और गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा मेधा पाटकर को ‘अर्बन नक्सल’ कहने का निषेध व्यक्त करते हुए कहा कि नर्मदा नवनिर्माण न्यास का कार्य और हिसाब-किताब पारदर्शी और नियमानुसार है। हम किसी भी चौकसी से डरते नहीं। लेकिन ऐसे गलत आरोपों द्वारा अगर गलत कार्यवाही की गई तो नर्मदा घाटी के लोग और पूरे देश के जन आंदोलन इसका शांतिपूर्ण कड़ा विरोध करेंगे।

इस संवाद के दौरान नर्मदा बचाओ आंदोलन तथा नर्मदा नवनिर्माण अभियान के कार्यकर्ता, जीवनशाला के शिक्षक तथा अन्य रचनात्मक कार्यों के संयोजकों ने अपनी बातें रखीं।

संवाद यात्रा में शामिल शिक्षाविद रमेश पाटिल, वरिष्ठ नारीवादी कार्यकर्ता वर्षा गुप्ते, आर्थिक मुद्दों पर कार्यरत दिल्ली के कार्यकर्ता अमितांशु तथा अन्य संवादकों ने अपना समर्थन जाहिर किया।

जीवन नगर से यात्रा तलोदा तहसील के मोड़ गांव में संवाद यात्रा ने भेंट दी और उसके पश्चात यात्रा काथरदेदिगर गांव में पहुँची।

नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा विज्ञप्ति में नूरजी वसावे, ओरसिंग पटले, सियाराम पाडवी, नीमा पटले, चेतन सालवे ने बताया कि 16 सितंबर को संवाद यात्रा मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्र से होकर 17 सितंबर को निमाड़ क्षेत्र के पुनर्वास स्थलों को भेंट देगी और 18 सितंबर को बड़वानी में बड़ी आमसभा में शरीक होगी। यात्रा में देश के 11 राज्यों से करीब 70 साथी शामिल हुए है, जिसमें विविध क्षेत्रों में कार्यरत वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ साथ युवा साथियों की सहभागिता रही।

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