Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

ग्रामस्वराज्य और जयजगत के लिए आज परिस्थिति अनुकूल

विनोबा जी की 125वीं जयंती पर विनोबा विचार प्रवाह अंतर्राष्ट्रीय संगीति में हेम भाई

4 सितम्बर। विनोबा जी की 125वीं जयंती पर विनोबा विचार प्रवाह द्वारा फेसबुक माध्यम पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगीति में सत्य सत्र के वक्ता आसाम के सर्वोदय सेवक श्री हेमभाई ने कहा कि आज देश और दुनिया के सामने विषम परिस्थिति है। एक ओर कोरोना महामारी का संकट है तो दूसरी ओर विस्तारवादी विचार के कारण युद्ध की स्थिति में निर्मित हुई है। दोनों से ही दुनिया के लोग भयभीत हैं। विनोबा विचार में दोनों प्रकार के भय से मुक्ति दिलाने की सामर्थ्य है। विचारपूर्वक जीवन शैली मं परिवर्तन लाने से अहिंसक समाज रचना के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। विज्ञान युग में ग्रामस्वराज्य और जयजगत का महत्व बढ़ गया है। इस व्यावहारिक विचार को धरातल पर उतारने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। विनोबा जी ने इसका ब्ल्यू प्रिंट दे रखा है। श्री हेम भाई ने विनोबा जी के सोलह रूपों का चित्रण किया। जिसे जो रूप पसंद हो, वह उससे प्रेरणा ले सकता है। उन्होंने कहा कि अब केवल पृथ्वी का विचार करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि अब अंतर्गोलीय चिंतन की जरूरत है।

प्रेम सत्र की वक्ता विनोबा जी द्वारा वर्धा में स्थापित ग्राम सेवा मंडल की अध्यक्ष श्रीमती करुणा बहन ने कहा कि खादी वस्त्र आज की शोषणयुक्त जीवन शैली के विरोध में है। विनोबा जी ने खादी को बगावत का झंडा निरूपित किया है। यद्यपि आज चारों ओर घना अंधकार दिखायी दे रहा है इसके बावजूद हमें रचनात्मक कार्यक्रम का दीपक जलाए रखने की जरूरत है। इससे यह अंधकार दूर होगा। उन्होंने कहा कि रचनात्मक कार्यकर्ताओं को निरंतर स्वाध्याय करना चाहिए। इससे समाज जीवन को शिक्षित करने में सहायता मिलती है।

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विनोबाजी द्वारा आसाम में स्थापित मै़त्री आश्रम की सुश्री चंपा बहन ने बताया कि यह आश्रम अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित है। उत्तर-पश्चिम दिशा में अरुणाचल पहाड़ है और उसके पीछे हिमालय खड़ा है। इससे आध्यात्मिक साधना की प्रेरणा मिलती है। सुश्री चंपा बहन ने बताया कि जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया था, तब यहां की बहनों ने विनोबा जी से पूछा कि उन्हें क्या करना चाहिए। तब विनोबा जी ने कहा कि आश्रम में ही रहकर अध्ययन करें। उस समय गुणदा बाईदेव, कुसुम बाईदेव और लक्ष्मीबाई देव ने गीताई चिंतनिका का असमिया में अनुवाद किया। सुश्री चंपा बहन ने बताया कि युद्ध के समय गांव के लोग वहां से चले गए थे। आश्रम को स्वावलंबी आधार पर संचालित किया जा रहा है। खेत में गोबर खाद का ही उपयोग किया जाता है। करीब बीस प्रकार के फल पैदा होते हैं। वस्त्र स्वावलंबन के लिए खेत में कपास लगाने की कोशिश की, लेकिन अत्यधिक वर्षा होने से कपास पैदा नहीं होती है। इसलिए अन्य जगह से कपास लाकर उससे कपड़े बनाते हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम का उद्देश्य संकल्प, सेवा, समर्पण और समाधि है। गुजरात के श्री महेश भाई ने जीवन में अध्यात्म को अपनाने के सरल तरीके बताए। संचालन श्री संजय राय ने किया। आभार श्री रमेश भैया ने माना। (प्रस्‍तुति डा.पुष्पेंद्र दुबे)

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