Year: 2026

हे राम, साकार गांधी निराकार गांधी !

30 जनवरी 1948 की संध्या, बिड़ला भवन में प्रार्थना के लिए बढ़ते महात्मा गांधी “हे राम” के अंतिम शब्दों के साथ साकार से निराकार में विलीन हो गए। उनका महाप्रयाण केवल एक देह का अंत नहीं था, बल्कि सत्य, अहिंसा…

महात्मा गांधी की धार्मिक आस्था

खुद को सनातनी हिन्दू मानने वाले महात्मा गांधी आखिर कैसे हिन्दू थे? क्या किसी खास धर्म का अनुयायी होने के साथ-साथ गांधी की तरह उदारता को आत्मसात किया जा सकता है? आज देश में धर्म के नाम पर काफी राजनैतिक…

Let’s Kill Gandhi : गांधी की हत्या, सच की हत्या और स्मृति की राजनीति

गांधी निर्वाण दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि इतिहास से सामना करने की जिम्मेदारी भी है। तुषार गांधी की पुस्तक “Let’s Kill Gandhi” उस सच को उजागर करती है, जिसे वर्षों से ढका गया। यह बताती है कि गांधी…

गांधी पुण्‍यतिथि 30 जनवरी : गांधी से सीखने के युवा शिविर

किसी विचार को सीखने, समझने के लिए शिविर और संभाषण बेहतरीन माध्यम होते हैं। गांधी विचार को सीखने, समझने के लिए भी नारायण भाई देसाई और डॉ. एसएन सुब्बराव ने इन्हीं पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल किया था। क्या होता था,…

स्मृति-शेष : मार्क टुली और भारतीय पत्रकारिता के छह दशक

भारत की आत्मा को शब्द देने वाले पत्रकार मार्क टुली का निधन केवल एक व्यक्तित्व का अंत नहीं, बल्कि संवेदनशील, संतुलित और सत्यनिष्ठ पत्रकारिता के एक युग का अवसान है। बीबीसी की शांत आवाज से उन्होंने भारत को दुनिया से…

77वें गणतंत्र पर भारत : गर्व भी, प्रश्न भी, संकल्प भी

77वें गणतंत्र दिवस पर भारत अपनी उपलब्धियों पर गर्व करते हुए और चुनौतियों से आँख मिलाते हुए आत्ममंथन करता दिखाई देता है। युवा शक्ति, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और तकनीकी प्रगति देश को नई ऊँचाइयों तक ले जा रही है,…

संविधान की रोशनी में गणतंत्र : गरीब कैदियों के लिए इंसाफ की पुकार

संविधान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण काम उसे अमल में लाना है, खासकर उन लोगों के लिए जो अपनी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के चलते आजादी के अस्सी साल बाद भी हाशिये पर ही हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल में एक…

भारत में गणतंत्र : चुनौतियाँ, विफलताएँ और समाधान

हम अपने गणतंत्र की 77वीं सालगिरह मना रहे हों, लेकिन क्या सचमुच हमारा लोकतंत्र उस तरफ बढ़ रहा है जिसकी उम्मीद हमने करीब आठ दशक पहले की थी? मसलन–क्या हमारी दो सदनों–लोकसभा, राज्यसभा–वाली संसद और राज्यों की विधानसभाएं अपेक्षित अवधि…

‘अमीरों की सत्ता का प्रतिरोध’ : ‘डब्ल्यूईएफ’ में जारी ‘ऑक्सफैम’ की रिपोर्ट

दुनियाभर के दिमागों को दुरुस्त करने वाली ‘ऑक्सफैम’ की रिपोर्ट फिर हाजिर है। 19 से 23 जनवरी के बीच हो रहे ‘वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम’ के पहले दिन चेतावनी-स्वरूप जारी की गई इस रिपोर्ट ने दुनियाभर के आर्थिक विकास की पोलपट्टी…

वंचितों से और भी दूर हुआ जलवायु न्याय

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के दुख दूबरे होते दुनिया के अमीर देश गाहे-ब-गाहे मिल-बैठकर अपनी चिंताएं उजागर करते रहते हैं, लेकिन उनकी इस कवायद से किसी का कुछ खास बनता-बिगड़ता नहीं है। पिछले साल के अंत में इसी तरह का…