Year: 2026

डॉ. अंबेडकर : सामाजिक न्याय से राष्ट्रीय एकता तक की प्रखर दृष्टि

डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके व्यापक राष्ट्रवादी चिंतन को समझने का समय है। सामाजिक न्याय के पुरोधा अंबेडकर ने संविधान, अधिकारों की सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता को सर्वोपरि रखा। आज के विभाजित…

नदी, नारी और नीर : सनातन विकास की राह

“यह रिवरफ्रंट विकास नदियों की हत्या है, नदियों को नालों में बदल देना है।” यह केवल एक तीखी टिप्पणी नहीं, बल्कि जल-संरक्षण के क्षेत्र में दशकों से काम कर रहे राजेंद्र सिंह की गहरी पीड़ा और चेतावनी है। वे मानते…

14अप्रैल, 1972 : जब बागियों ने छोड़ी बंदूकें, तब शुरू हुई चंबल में शांति की नई बयार

चंबल घाटी, जो कभी भय और हिंसा का प्रतीक थी, वहाँ संत विनोबा भावे और बाद में जयप्रकाश नारायण के प्रयासों से अहिंसा और परिवर्तन की ऐतिहासिक धारा प्रवाहित हुई। 1960 से शुरू हुआ बागियों का आत्मसमर्पण आंदोलन 1972 में…

डॉ. अम्बेडकर और लोहिया एक ही धारा को आगे बढ़ाने वाले विचारक

डॉ. भीमराव अम्बेडकर और राममनोहर लोहिया भारतीय सामाजिक-राजनीतिक चिंतन के दो ऐसे महान स्तंभ रहे हैं, जिनकी वैचारिकी में अनेक समानताएं दिखाई देती हैं। दोनों ने सामाजिक न्याय, समानता और आर्थिक विषमता के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उनके बीच संवाद…

समर्पण से सशक्तीकरण : चंबल की विरासत और ‘शांति एवं महिला’ अभियान

14 अप्रैल को मनाया जाने वाला समर्पण दिवस हमें उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है, जब चंबल के बागियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर आत्मसमर्पण किया। यह घटना केवल कानून व्यवस्था की सफलता नहीं, बल्कि मानव हृदय परिवर्तन की…

बदइंतजामी से बेहाल मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ता

तेईस साल पहले ‘एशियन डेवलपमेंट बैंक’ के कर्ज के साथ मिले सलाह-नुमा-निर्देशों को मैदान में उतारने की खातिर ‘मध्यप्रदेश विद्युत मंडल’ को तीन तरह की कंपनियों में इसलिए विभाजित किया गया था, ताकि इससे मंडल का घाटा कम या समाप्त…

क्या गंगा के प्रति हमारे पाखंड को मेट पाएगा, महाकुंभ?

हमें अपनी सरकारों, सेठों और समाज में बहुतायत से व्याप्त पाखंड को देखना हो तो पतित पावनी मानी गईं गंगा के प्रति पिछले कुछ दशकों से किए जा रहे अपने व्यवहार को देखा जा सकता है। स्वर्ग-नसेनी के दर्जे की…

सिजीमाली में दमनकारी कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन की घोर निंदा : गांधीवादी जन संगठन

डॉ. विश्वजीत रायगढ़ा (ओडिशा), 11 अप्रैल। ओडिशा के रायगढ़ा जिले के कंटामाल गाँव में Sijimali Bauxite Mining Project के संदर्भ में 7 अप्रैल की भोर में हुई पुलिस कार्रवाई पर गांधीवादी जन संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे…

‘जहां पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पटना से चंपारण यात्रा शुरू

लोकतंत्र और सद्भाव की विरासत को सहेजने का संकल्प पटना,10 अप्रैल। आज़ादी आंदोलन की विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की हिफाज़त और मजबूती के लिए आज सुबह पटना स्थित जयप्रकाश नारायण के निवास स्थल, महिला चरखा समिति में…

विज्ञान और अध्यात्म : प्रकृति से प्रेम ही सनातन है

विकास, खासकर भौतिक विकास को हिंसक विनाश में तब्दील कर रहे नीति-निर्धारक, राजनेता और पूंजीपति एक बात में समान हैं। वे सब खुद को धार्मिक, सनातनी कहते-मानते हैं, लेकिन क्या उनका धर्म उन्हें प्रकृति के प्रति प्रेम, सरोकार नहीं सिखाता?…