कलम की आजादी पर कसता शिकंजा
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में प्रेस स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 में भारत का 157वें स्थान…
विस्थापन का दर्द जीकर जनसंघर्षों की आवाज़ बने डॉ. रामप्रताप गुप्ता नहीं रहे
93 वर्ष की उम्र में उज्जैन में निधन; बड़े बांधों, नई आर्थिक नीति और जल-जंगल-जमीन के सवालों पर जीवनभर करते रहे हस्तक्षेप उज्जैन, 2 मई। मध्यप्रदेश के वरिष्ठ अर्थशास्त्री, सामाजिक चिंतक, जनपक्षधर लेखक और जल, जंगल, जमीन के सवालों पर…
भय और धमकियों से भरा लोकतंत्र
पश्चिम बंगाल चुनाव ने सिर्फ सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं को नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की मौजूदा हालत को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। भारी सुरक्षा, प्रशासनिक हस्तक्षेप, भय और अविश्वास के माहौल ने यह सवाल तेज कर दिया…
ईरान के प्रतिरोध से अमेरिकी वित्तीय साम्राज्यवाद को बड़ा झटका : जया मेहता
वैश्विक वित्तीय और आर्थिक संकट तथा उभरते विकल्पों पर परिचर्चा भोपाल, 2 मई। यहां गांधी भवन में मई दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित ‘वैश्विक वित्तीय और आर्थिक संकट तथा उभरते विकल्प’ विषय पर परिचर्चा में द्वितीय विश्व युद्ध के…
66वीं सालगिरह : बढ़ रही है, ‘सर्वोदय प्रेस सर्विस’ की भूमिका
वर्ष 1960 में मई की पहली तारीख, यानि ‘अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस’ पर शुरु हुआ ‘सर्वोदय प्रेस सर्विस’ अब अपने करीब 66 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर कर रहा है। इस मौके पर प्रस्तुत है, ‘सप्रेस’ के पुराने साथी, लेखक भारत डोगरा…
मज़दूर आंदोलन : वेतन से आगे, सामाजिक न्याय की लड़ाई
मजदूर संगठनों पर एक आरोप यह भी लगता रहा है कि वे अपने वेतन-भत्तों, सुविधाओं और अधिक-से-अधिक काम तथा रहन-सहन की परिस्थितियों यानि कि एक तरह के ‘अर्थवाद’ से बाहर नहीं निकल पाते, लेकिन क्या यह सही है? भारत समेत…
इजरायल की उत्पत्ति : एक जटिल संघर्ष की शुरुआत
पश्चिम एशिया में जारी भीषण मारकाट का खलनायक और अमेरिका समेत तमाम खाड़ी के देशों को हांकने वाला इजरायल आखिर दूर-दराज के उस इलाके में पैदा कैसे हुआ? क्या जहां वह है, वह उसकी पारंपरिक ‘पितृ-भूमि’ है? क्या है, इजरायल…
एआई : नई ‘डिजिटल गुलामी’ या भविष्य की राह? सैम पित्रोदा ने दी बड़ी चेतावनी
भारतीय दूरसंचार क्रांति के जनक सैम पित्रोदा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। मीडिया स्वराज के संपादक राम दत्त त्रिपाठी से एक साक्षात्कार में पित्रोदा ने आगाह किया कि एआई न केवल रोजगार के…
बिन पानी सब सून . . .
जीवन की अमूल्य जरूरत पानी के प्रति हमारी बेपरवाही ने अब ना तो उसे पर्याप्त मात्रा में छोड़ा है और न ही उसकी शुद्धता बरकरार रखी है। आखिर क्यों हो रही है, पानी के प्रति यह बदसलूकी? कैसे हमारी प्यास…
दरगाह, पुष्कर और ‘सोनीजी की नसियां’ : एक यात्रा-वृत्तांत
यात्राएं अपने रोजमर्रा के जीवन से बाहर निकलने के अलावा बहुत कुछ सिखाती हैं। अव्वल तो हम प्रवास की उन जगहों, इलाकों के बारे में गहराई से जान पाते हैं और दूसरे वहां के समाज की समझ भी बढ़ती है।…









