Month: February 2026

‘ट्रेड-डील’ में सोयाबीन : पिछले दरवाजे से प्रवेश देने का कारनामा

अमरीका के साथ हुई हाल की ‘ट्रेड-डील’ के बारे में जितना, जो कुछ पता चल रहा है उससे उजागर हो रहा है कि यह ‘डील’ भारत के किसानों के लिए भांति-भांति के संकट खड़े करेगी। सोयाबीन उनमें से एक है।‘ट्रेड…

युद्ध का यशोगान : रक्षा बजट की दौड़ में उलझती दुनिया

कुछ लोग पूछते हैं कि ट्रंप की आक्रामक नीतियों पर दुनिया चुप क्यों है। कारण साफ है—जब शक्ति के साथ हथियार और आर्थिक प्रभुत्व जुड़ जाए, तो विरोध जोखिम बन जाता है। अमेरिका के बढ़ते रक्षा बजट, तकनीकी बढ़त और…

एकता परिषद : संगठन से समाज तक की यात्रा

यह जानना रोचक है कि करीब चार दशक पहले शुरु हुआ जन-संगठन ‘एकता परिषद’ अब उस समाज को अपने पैरों पर खड़ा कर पाने में सफल होता दिख रहा है जो शुरुआत में संसाधन-विहीन, निरक्षर और हाशिए पर था। यात्रा…

स्वास्थ्य बजट : बढ़ता आवंटन, घटती जवाबदेही

हमेशा की तरह इस बार भी हमने अपने बजट में वे ही कारनामे किए हैं जिनके चलते स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्र साल-दर-साल फिसड्डी होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य में हमने पिछले सालों की तरह एक तरफ, भारी-भरकम आवंटित…

राष्ट्रमाता कस्तूरबा : तप, त्याग, सेवा और मातृत्व की मूर्ति

भारत की स्वतंत्रता गाथा में कस्तूरबा गांधी का नाम त्याग और तपस्या की अमर मिसाल है। 22 फरवरी 1944 को अंग्रेजों की कैद में उन्होंने प्राण त्यागे, लेकिन उनका संघर्ष, सादगी और सेवा भाव आज भी प्रेरणा देता है। राष्ट्र…

महिलाओं को अवसर मिले तो समाज बदल सकता है : डॉ. प्रीति जोशी

श्री काशिनाथ त्रिवेदी स्मृति चतुर्थ व्याख्यानमाला इंदौर, 16 फरवरी। “आधी आबादी को उसका पूरा हक मिलना चाहिए, क्योंकि स्त्री की असली पहचान और स्वतंत्रता उसके स्वावलंबन में है।” यह विचार वर्धा (महाराष्ट्र) से आईं पर्यावरणविद एवं स्त्री-शक्ति के लिए समर्पित…

संविधान बनाम खनन : पचामा दादर में पर्यावरणीय न्याय की परीक्षा

मध्यप्रदेश के बालाघाट स्थित पचामा दादर बॉक्साइट ब्लॉक की प्रस्तावित खनन परियोजना पर्यावरणीय मानकों, जल संसाधन आकलन और वनाधिकार प्रावधानों की गंभीर अनदेखी के आरोपों में घिर गई है। अधूरी ईआईए रिपोर्ट, घटते भूजल स्तर, समृद्ध जैव विविधता वाले वन…

‘एक देश एक चुनाव’ तभी ठीक जब खर्च का जिम्मा चुनाव आयोग उठाये- रघु ठाकुर

पुस्तक ‘ समय के प्रश्न ‘ का कांस्टीट्यूशन क्लब में लोकार्पण नई दिल्ली, 15 फरवरी। सुप्रसिद्ध समाजवादी चिंतक व जननेता रघु ठाकुर की पुस्तक ‘समय के प्रश्न’  के विषय में पत्रकारिता, राजनीति व सामाजिक क्षेत्र के विशिष्ट लोगों ने राय…

वैश्विक समझौतों की बिसात पर छोटे पशुपालक

भारत सरीखे कृषि प्रधान देश में वैश्विक व्यापार समझौतों का सीधा असर कृषि और किसानों पर होता है। वैसे भी हमारे यहां कृषि और पशुपालन, प्राथमिक रूप से व्यापार की बजाए पेट भरने की तकनीक मानी जाती है और ऐसे…

केंद्र सरकार से किसानों का विश्वास टूटा, व्यापार समझौते और नए विधेयक किसान विरोधी — भाकियू

नई दिल्ली, 11 फ़रवरी। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने भारत सरकार द्वारा अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ किए गए हालिया व्यापार समझौतों और कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि इन कदमों…