Month: December 2023

Indian Railways : यात्रियों से रूठती रेल

आम लोगों के परिवहन का सर्वाधिक सुलभ और सस्ता साधन रेलगाडी अब धीरे-धीरे मंहगा, बेहद मंहगा होता जा रहा है। कहा जा रहा है कि अब आम जनता के लिए ‘जनरल कोच’ और खास लोगों के लिए मंहगी ‘एसी कोच’…

स्‍वागत : नये साल 2024 की दहलीज पर

नये साल की दहलीज पर खड़ा हमारा देश अपनी निराशा से निकले, सन्निपात की आवाजों को सुने-समझे तो नये साल में कोई नई संभावना पैदा हो सकती है। संभावना सिद्धि नहीं है। उसे सिद्धि तक पहुंचाने के लिए मानवीय पुरुषार्थ…

मध्‍यप्रदेश के राज कुमार सिन्हा को वर्ष 2023 का बाबा आमटे सामाजिक कार्यकर्ता राष्ट्रीय सम्मान दिये जाने की घोषणा

बाबा आमटे लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार 2023 तमिलनाडु के आर. सुंदरेशन को दिया जाएगा  चंद्रपुर, महाराष्‍ट्र। मध्‍यप्रदेश के वरिष्‍ठ सामाजिक कार्यकर्ता राज‍कुमार सिन्‍हा को वर्ष 2023 का Baba Amte बाबा आमटे सामाजिक कार्यकर्ता राष्ट्रीय पुरस्कार तथा 2023 का बाबा आमटे लाइफटाइम…

ARTIFICIAL INTELLIGENCE : इंसानियत को ताक पर रखती तकनीक

मौजूदा समय ऐसी तकनीक का है जो इंसानों की तरह खुद-ब-खुद सोच-समझकर, निर्णय लेगी और उस पर अमल करेगी, लेकिन क्या इसमें कोई इंसानियत भी बची होगी? तकनीक के इस अत्याधुनिक स्वरूप के मालिक अकूत पूंजी बनाने के अलावा किसी…

शिक्षा : थके हुए शिक्षक को चाहिए थोड़ा आराम भी

पेशेवर विकास के लिए शिक्षकों के पास पर्याप्त अवसर होने चाहिए| इससे उनका हुनर बढेगा और वे शिक्षण के क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोगों से परिचित होंगे| शिक्षकों के ऐसे समूह होने चाहिए जिसमें वे एक दूसरे की सहायता…

चन्नम्मा हल्लिकेरी : एक तपोनिष्ठ विनोबा विचार की साधिका का मौन होना

रमेश भैया कन्नड़ भाषा की विद्वान, देवनागरी लिपि की प्रचारक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुश्री चैन्नमा दीदी (94 वर्ष) का 21 दिसंबर 23 को पवनार आश्रम, वर्धा में ह्रदयगति रुक जाने से देहांत हो गया। चैन्‍नमा दीदी कई दिनों से अस्वस्थ…

नागौर : मरुभूमि में तालाब

‘राजस्थान की रजत बूंदें’ सरीखी नायाब किताब लिखने वाले अनुपम मिश्र कहा करते थे कि जिस इलाके में प्रकृति ने पानी देने में थोड़ी कंजूसी की है, वहां समाज ने पानी की एक-एक बूंद को प्रसाद मानकर बेहद सलीके से…

फिसलन की राह पर गैर-सरकारी संस्थाएं

एक जमाने में मिशन माना जाने वाला सामाजिक कार्य आजकल एक व्यवसाय का दर्जा हासिल कर चुका है। ऐसे में जाहिर है, व्यवसाय की रीति-नीति भी सामाजिक कार्यों का हिस्सा बनती हैं। क्या होते हैं, इस बदलाव के नतीजे? आज…

पांच राज्यों के चुनाव परिणाम : नतीजों के निहितार्थ

हाल के पांच राज्यों के चुनाव परिणाम देश की दोनों पार्टियों – भाजपा, कांग्रेस के तौर-तरीकों को भी उजागर करते हैं। ये बताते हैं कि इन पार्टियों ने किन तरीकों से अपनी-अपनी चुनावी समर लडी है। क्या हैं, इन दोनों…

75वीं दहलीज : संयुक्त राष्ट्र सार्वभौम घोषणा-पत्र व मानवाधिकार का सच

10 दिसंबर मानव अधिकार दिवस पर विशेष अपने उत्थान और पतन की पर्याप्त बहस में उलझा इंसान सार्वभौम घोषणा पत्र के 75 वर्ष बाद यह आँकलन कर रहा है कि हमने अपनी प्रतिबद्धताओं के साथ क्या किया? मानवाधिकारों के संरक्षण…