Year: 2022

वर्ष 2022 से चीन की जनसंख्या घटना शुरू हो सकती है

चीन की जन्म दर में लगातार पांचवें वर्ष गिरावट दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश चीन में जनसंख्या की स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार चीन…

लता की लोकप्रियता का मुख्य मर्म है उनका ‘गान-पन’ और स्वरों की निर्मलता

पंडित कुमार गंधर्व 60 के दशक में लता जी के फिल्म में गाने को जब 25 वर्ष पूर्ण हुए तब एक पुस्तक के लिए बाबा (कुमार गंधर्व) ने ‘अभिजात कलावती’ नाम से मराठी में यह लेख लिखा था, जिसे धर्मयुग…

हस्तशिल्प : कोविड की चपेट में ‘बाघ-प्रिन्ट’

कोविड-19 बीमारी के असर में, दूसरे तमाम छोटे-मध्‍यम-लघु उद्योगों की तरह मध्यप्रदेश के धार जिले के ‘बाघ-प्रिन्ट्स’ के कारीगर भी संकटों का सामना कर रहे हैं। पिछले दो सालों में कपडों पर की जाने वाली इस विश्व-विख्यात छापा कला की…

स्वास्थ्य : खाने के खतरे

उद्योगों और उनसे खडी की जाने वाली पूंजी का ताजा शिकार खाद्य-प्रसंस्करण उद्योग हुआ है। इस प्रक्रिया में पहले खाद्य पदार्थों को बाजार के लिहाज से चमकदार बनाने के लिए उनकी पौष्टिकता कम या खत्म की जाती है और फिर…

दिया जलाओ : राजनीति ने जलता दिया बुझा दिया।

क्या किसी को याद है कि राजधानी में ही एक ज्योति और भी जल रही है? बापू की समाधि राजघाट पर जलती ज्योति क्या यह कह बुझाई जाएगी कि स्वतंत्रता के शहीदों का एक नया स्मारक हम बना रहे हैं…

आधी सदी का बांग्लादेश

अभी, करीब डेढ महीना पहले अपनी आजादी की आधी शताब्दी मना चुके बांग्लादेश ने 1971 में अपने गठन के साथ दो-राष्ट्रवाद के उस बेहूदे सिद्धांत को ही खारिज कर दिया था जिसने भारत विभाजन सरीखे तीखे, दर्दनाक संकट पैदा किए…

अंतर्राष्‍ट्रीय : देशों की विदेश नीतियां

अकूत मुनाफा कूटने के लिए दुनियाभर को एक मानने वाले, नब्बे के दशक के भूमंडलीकरण के बाद, अब लगभग सभी देशों में राष्ट्रवाद की हवा चली है। ऐसे में चीन अपनी पूंजी और सामरिक ताकत के साथ दुनियाभर को घेरने…

एक पक्ष के लिए निष्पक्ष पत्रकारिता

सकारात्मक पत्रकारिता की तरह इन दिनों निष्पक्ष पत्रकारिता का चलन बढा है और जिस तरह सकारात्मक पत्रकारिता के नाम पर, अक्सर सत्ता-प्रतिष्ठानों की चापलूसी फल-फूल रही है, ठीक उसी तरह खुलेआम एक खास विचारधारा और सरकार की पक्षधरता के नाम…

नजरिया : खतरों से खेलता नेतृत्व

राजनेताओं और समाज का काम करने वालों का जीवन हमेशा ही खतरों के साये में रहता है और वे एक तरह से अपने काम इस समझ और तैयारी के साथ ही तय करते हैं। भारत में इसके अनेक उदाहरण हैं…

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022: 24 लाख वनवासियों के सम्मानपूर्वक जीवन, विकास और पर्यावरण के लिए वनाधिकार कानून लागू हो

वन पंचायत संघर्ष मोर्चा की मतदाताओं, प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों से अपील जल, जंगल, जमीन पर स्थानीय समाज के हकों के सवाल ने उत्तराखंड राज्य को जन्म दिया था, परंतु इतने संघर्षों के पश्चात राज्य में यह हक निरंतर घटते…