Month: August 2022

हर घर तिरंगा : तिरंगी कहानी

चीन के माओ-त्से-तुंग कुछ-कुछ अंतराल से अपनी विशाल आबादी को व्यस्त रखने की खातिर कोई-न-कोई मुहीम छेडते रहते थे और जनता उसमें पूरे मनोयोग से लग जाती थी। उनकी यह कारगर शासन-पद्धति थी। हमारे यहां भी कुछ ऐसा ही दौर…

आजादी का अमृत महोत्‍सव : स्वतंत्रता आंदोलन में होलकर कॉलेज का योगदान

आजादी के स्वतन्त्रता आंदोलन में कई ऐसे गुमनाम युवा विद्यार्थी हैं जो अपने सीमित साधनों में भी पूरी निष्ठा और समर्पण से अपने सुख, सपनों और पढ़ाई की आहुति देकर स्वतंत्रता के यज्ञ की पवित्र अग्नि को प्रज्वलित करते रहे।…

आज़ादी के 75 साल पूरे होने पर 75 यात्रियों वाली आग़ाज़ ए दोस्ती यात्रा दिल्ली से वाघा बार्डर के लिए प्रस्‍थान

नईदिल्‍ली, 12 अगस्‍त। देश भर के विभिन्न क्षेत्रों से जुटे 75 यात्री आग़ाज़ ए दोस्ती यात्रा की शुरुआत दिल्ली से वाघा सीमा के लिए करने के लिए दिल्ली में एकजुट हुए और इस यात्रा के शांति यात्रियों को दिल्ली से…

सर्वोच्च न्यायालय में चुनाव में मुफ्त घोषणाओं के मुद्दे पर दिलचस्प बहस

श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था के पतन की हालिया खबरों ने भारत के राज्यों की भूमिका पर एक नई बहस को जन्म दिया है। श्रीलंका की सरकार ने सभी के लिये करों में कटौती और विभिन्न मुफ्त वस्तुओं एवं सेवाओं के वितरण जैसे…

हिरोशिमा नागासाकी और नहीं, जन शिक्षा से होगा सब सही

हाऊल समूह ने शुरू की निःशुल्क लाइब्रेरी और फ़िल्म क्लब इंदौर, 9 अगस्‍त। हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बमबारी की 77वीं वर्षगाँठ पर इंदौर में युवाओं व्‍दारा स्‍थापित हाऊल समूह ने मंगलवार को शहर के सुखलिया क्षेत्र में एक निःशुल्क लाइब्रेरी…

आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के लिए खादी की अनिवार्यता समाप्त किये जाने की निंदा

दिल्‍ली में अगस्त क्रांति दिवस’ पर सर्व सेवा संघ का संकल्प सत्याग्रह 9 अगस्त 2022, नई दिल्ली। गांधी विचार की राष्ट्रीय शीर्ष संस्था सर्व सेवा संघ द्वारा नागरिक अधिकारों, धार्मिक सद्भाव और खादी की रक्षा के लिए ‘अगस्त क्रांति दिवस’…

पूंजी के निर्माण में वितरण की अहमियत

अकूत पूंजी के सतत निर्माण को विकास मानने वाली मौजूदा अवधारणा में उसके न्यायपूर्ण वितरण और जरूरत-भर खर्च का कोई स्थान नहीं है। एक तरफ ‘दिन दूनी, रात चौगुनी’ बढती पूंजी और दूसरी तरफ, कुछ लोगों के हाथ में उसका…

विकास : प्रगति की पहचान के सूत्र

इंसानी तरक्की को मापने के लिए ‘सकल घरेलू उत्पाद’(जीडीपी) जैसे जिन पैमानों का उपयोग किया जा रहा है, क्या वे सचमुच हमारे विकास को बता पाते हैं? क्या इनसे समाज में मौजूद गैर-बराबरी, अन्याय, हिंसा, शोषण आदि को भी मापा…