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पूंजीवाद, जलवायु परिवर्तन और हिंसा जैसे मसले दुनिया को तबाह करने में लगे हैं : गांधीवादी चिंतक डॉ. अभय बंग

सेवाग्राम में पांच दिवसीय राष्ट्रीय युवा शिविर सम्पन्न

सेवाग्राम, 24 सितम्बर 2021 ।  सर्व सेवा संघ के युवा सेल द्वारा  सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान परिसर  में 20 से 24 सितंबर तक आयोजित राष्ट्रीय युवा शिविर आज यहाँ सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। जिसमें देश के 16 राज्यों  के 160 युवाओं ने शिरकत कीं ।

शिविर का समापन सत्र में  मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रसिद्ध चिकित्सक, समाजकर्मी एवं गांधीवादी चिंतक डॉ. अभय बंग ने कहा कि युवाओं को अपने सपनों को बदलना है,रूपांतरित करना है। आज की व्यवस्था ने युवाओं को अंतहीन कतारों में बदल दिया है, इन कतारों का रुख अपने से भी कमजोर,गरीब और मुसीबतजदा लोगों की ओर मोड़ देना है। अगर युवा ऐसा करेंगे तो उनका जीवन सार्थक हो जाएगा।

डॉ. अभय बंग ने कहा कि आज दुनिया तीन महत्वपूर्ण संकटों से जूझ रही है। पहला है – पूंजीवाद, दूसरा – पृथ्वी का बढ़ता तापमान और तीसरा –हिंसा का तांडव। ये तीनों मसले दुनिया को तबाह करने में लगे हैं। आज के युवाओं को यह विचार करना है कि इन समस्याओं को कैसे दूर किया जाए। इन समस्याओं का सामना भविष्य में युवा पीढ़ी को ही करना है। हम सभी जानते हैं कि संसाधनों की अधिकता और संग्रह से न तो संतुष्टि मिलती है और न ही खुशी। पूंजीवाद ने स्वार्थ और भोग को आदर्श के रूप में पेश करता है और यह विनाश का ठिकाना है।

समापन समारोह में जन -गीतकार मा तु खैरकर के गीत -संग्रह ‘ श्याम-कल्प’ का लोकार्पण किया गया। यह गीत-संग्रह बुद्ध,गांधी,अम्बेडकर व जनता की आकांक्षाओं का संगम है।

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इसके पूर्व युवा शिविर में “अहिंसा”, “जाति, धर्म, लिंग आधारित भेदभाव और समता का लक्ष्य” तथा “हमारी राष्ट्रीयता : हमारा कर्तव्य” विषयों पर चर्चा और व्याख्यान हुए ।

अहिंसा पर शिविर को संबोधित करते हुए सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने कहा कि गांधी जी की अहिंसा को प्रेम और सेवा से साधा जा सकता है । गांधी जी ने कहा कि अहिंसा माने असीम प्रेम । जहां परस्पर प्रेम होगा वहां हिंसा की कोई जगह नहीं।

जाति, धर्म, लिंग आधारित भेदभाव और समता का लक्ष्य विषय पर अपने संबोधन में प्रख्यात पत्रकार जयदीप हार्डीकर ने कहा कि मनुष्य का अस्तित्व सह- अस्तित्व पर निर्भर है। अगर हम इस  सिद्धांत को नकार देते हैं, तो मनुष्य का अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा। जिस प्रकार एक बगीचे में माली सभी पौधों को उपयुक्त पोषण और संरक्षण देकर परवरिश करता है, उसी तरह से जन-प्रतिनिधियों को देश की जवाबदेही दी जाती है। उनका दायित्व है कि वह सभी नागरिकों के लिए बिना भेदभाव और पक्षपात के व्यवहार करे।

उन्होंने कहा कि धर्म मनुष्य प्रजाति के स्वाभाविक एवं प्राकृतिक विकास-क्रम का परिणाम नहीं है, बल्कि  सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, बौद्धिक प्रक्रियाओं तथा नियमन की जरूरतों से उत्पन्न हुआ है। धर्म मनुष्य का बनाया हुआ है। किसी खास धर्म की श्रेष्ठता का आग्रह से तनाव पैदा होता है और ऐसा अक्सर राजनैतिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर किया जाता है। गांधी के विचारों को मानने वाले सहमति के सिद्धांत को मानते हैं। वे लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहुमत वाद के सिद्धांत को नकारते हैं और सहमति सह-अस्तित्व की बुनियाद है ।

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हमारी राष्ट्रीयता : हमारा कर्तव्य विषय पर लीगल एक्टिविस्ट एडवोकेट असीम सरोदे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि देश भूगोल द्वारा खींची गई सीमाओं से बनता है जबकि राष्ट्र वहां रहने वाले लोगों के एक मन और एक प्राण से बनता है । आपने कहा कि जो देश अपने नागरिकों से जीवनयापन और अभिव्यक्ति के अवसर छींटा है वह कभी समृद्ध नही हो सकता । राष्ट्र तब मजबूत और समृद्ध होता है जब सरकार विकल्‍प देती है और नागरिक सच के पक्ष में खड़े होते हैं बोलते हैं, लड़ते हैं। जो लोग जाति और धर्म की संकीर्ण दीवारें खड़ी करते हैं, प्रेम और विवाह और जीवन जीने की मौलिक स्वतंत्रता को छीनने का प्रयास करते हैं दरअसल वे भारतीयता के खिलाफ हैं। हमें ऐसे लोगों को पहचानना है और उनसे सजग रहना है।

इस मौके पर सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल, आश्रम प्रतिष्ठान के अध्यक्ष टी आर एन प्रभु, नई तालीम के अध्यक्ष डॉ. सुगन बरठ,श्याम भाऊ खैरकर आदि उपस्थित थे। समारोह का संचालन अविनाश काकड़े ने किया। 

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