Tribal communities

गांधी की सीख और आज की राजनीति का यथार्थ

करीब साढ़े चार दशक पहले ‘सप्रेस’ के सम्पादक को दिए एक वीडियो साक्षात्कार में ‘तिल्दा-आश्रम’ के आंगन में राजगोपाल पीवी ने कहा था कि उनके पास ‘गांधी विचार से प्रेरित सौ-सवा सौ मजबूत, प्रशिक्षित कार्यकर्ता, करीब एक लाख रुपए और…

पेड़ों की मां : दीर्घजीवी सालूमरदा थिमक्का

डॉ. ओ. पी. जोशी पेड़ों की मां (मदर ऑफ़ द ट्रीज) के नाम से प्रसिद्ध गरीब एवं अनपढ़ सालूमरदा थिमक्का का 114 वर्ष की आयु में बैंगलूरू के निजी अस्‍पताल में 14 नवंबर 25 को निधन हो गया। उन्‍हें आलामरदा…

‘पेसा’ की पहल से बढ़ेगा जनजातियों का गौरव

लगभग तीन दशक पहले भारत की संसद ने आदिवासी इलाकों के लिए एक बेहद जरूरी कानून ‘पेसा’ पारित किया था। इसमें आदिवासी समाज को उनकी पारंपरिक स्वायत्तता और उसी के मुताबिक आसपास के संसाधनों को वापरने की अनुमति दी गई…

बालाघाट में आदिवासी समाज का दो दिवसीय ‘घेरा ड़ालो-डेरा डालो’ आंदोलन शुरू

वनग्रामों के विस्थापन के खिलाफ जनसंघर्ष का आह्वान बालाघाट, 8 अक्‍टूबर। वन ग्रामों  को विस्थापित किए जाने सहित जल, जंगल, जमीन और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर जन संघर्ष मोर्चा महाकौशल के बैनर तले आज से दो दिवसीय घेरा डालो- डेरा…

लद्दाख की लहर : स्वायत्तता मांगते सोनम वांगचुक

छह साल पहले धारा 370 के हटने और लद्दाख को ‘केन्द्र शासित प्रदेश’ बनाए जाने से जो लोग मोदी सरकार के गुण गा रहे थे, वे अब अचानक उसी मोदी सरकार की नाराजी का शिकार बन रहे हैं। केन्द्र सरकार…

खामोश की जातीं पर्यावरण बचाने वालों की आवाज़ें

यदा-कदा प्लास्टिक की पन्नी बीन लेने, जीव-दया के नाम पर आवारा कुत्तों को दो-पांच रुपयों के बिस्किट खिला देने, कभी-कभार बिगड़ती हवा की लानत-मलामत कर देने और तीज-त्यौहारों पर पेड़ लगा देने को पर्यावरण संरक्षण मानने वालों को ‘ग्लोबल विटनेस’…

वन्‍य जीवन : बाघों के बहाने वीरान होते गांव

पर्यावरण के पिरामिड की चोटी पर बाघ विराजता है और उस पर मंडराता कोई भी संकट दरअसल पर्यावरण पर संकट माना जाता है। जाहिर है, ऐसे में किसी भी कीमत पर बाघ और उसके लिए जंगल बचाना ‘वैज्ञानिक वानिकी’ की…

व्‍यारा के सरकारी अस्‍पताल और मेडिकल कॉलेज के निजीकरण के खिलाफ आदिवासियों का विरोध, राष्‍ट्रीय स्‍तर पर उठी आवाज़

व्‍यारा  6 मई । दक्षिण गुजरात के तापी जिले में स्थित व्‍यारा के सरकारी अस्‍पताल और नव-स्वीकृत मेडिकल कॉलेज के निजीकरण के प्रयासों के खिलाफ आदिवासी समुदाय का विरोध अब राष्‍ट्रीय स्‍तर पर एक बड़ी आवाज़ में बदल चुका है।…

विकास के बरक्स आदिवासी संस्कृति

विकास के मौजूदा धतकरम के मुकाबले दुनियाभर के आदिवासियों की सभ्यता, संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान आदि को देखें तो आसानी से समझा जा सकता है कि हम कथित आधुनिक लोगों को उनसे सीखकर खुद को बचा पाने की जरूरत है। क्या…

पलायन और विस्थापन नियति है आदिवासियों की

निमिषा सिंह देश की आबादी में अनुसूचित जनजाति के लोगों की तादाद 8.6% है, लेकिन विकास परियोजनाओं के कारण विस्थापित होने वाले लोगों की कुल संख्या में अनुसूचित जनजाति के लोगों की तादाद 40 प्रतिशत है। जाहिर है, जनजातीय लोगों को जो भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची से आच्छादित हैं, भूमि-अधिग्रहण, विस्थापन…