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रामध्वज का प्रतीक वृक्ष : कोविदार या कचनार?

राम मंदिर पर स्थापित केसरिया ध्वज ने कोविदार वृक्ष के प्रतीक और उसकी प्राचीन परंपरा को फिर केंद्र में ला दिया है। रघुकुल के ध्वज से जुड़े इस वृक्ष को लेकर कचनार-कोविदार की पहचान, आयुर्वेदिक मतभेद और वैज्ञानिक अध्ययनों ने…

सौ साल का ‘आरएसएस’

ठीक एक शताब्दी पहले, 1925 के दशहरे के इन्हीं दिनों में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ की स्थापना हुई थी। उसके कर्ता-धर्ताओं की नजर में गैर-राजनीतिक, सांस्कृतिक संगठन माना जाने वाला यह अ-पंजीकृत जमावडा अपने जन्म से ही विवादास्पद रहा है। क्या…

एजी नूरानी : एक उद्भट विद्वान की विदाई

जो लोग ‘द हिन्दुस्तान टाइम्स,’ ‘द हिन्दू,’ ‘द स्टेट्समैन,’ ‘फ्रंटलाइन,’ ‘इकॉनॉमिक एण्ड। पोलिटिकल वीकली,’ यहां तक कि पाकिस्तान के ‘डॉन’ और हिन्दी के ‘दैनिक भास्कर’ में एजी नूरानी को लगातार पढ़ते-गुनते रहे हैं, उनकी दर्जनों किताबों को पढ़ते-समझते रहे हैं,…

गांधी के सामने फिर से सावरकर

‘गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति’ की मासिक पत्रिका ‘अंतिम जन’ के ‘वीर सावरकर अंक’ ने एक बार फिर गांधी और सावरकर के विरोधाभासों को उजागर कर दिया है। गांधी जिन मूल्यों, विचारों को लेकर जीवनभर चले थे, सावरकर उसके ठीक…

राजनीति : धर्मनिरपेक्षता को लेकर कांग्रेस की उहापोह

पिछले करीब तीन दशकों से भाजपा एक दृढ लक्ष्य के साथ राजनीतिक अखाड़े में अपने आप को मजबूत बनाती चली जा रही है| सही है कि बाकी विपक्ष और कांग्रेस भाजपा की नीतियों के खिलाफ स्वयं को व्यक्त करते रहे…

‘कोविड-19’ के काम में सरकारी, गैर-सरकारी सुविधाएं

सुरभि अग्रवाल, शोभा शुक्ल, बॉबी रमाकांत व संदीप पाण्डेय कोरोना वायरस से उपजी ‘कोविड-19’ बीमारी ने बेहद छोटे, करीब तीन महीने के अंतराल में कई तरह के गुल खिलाए हैं। सरकारी लापरवाही, अक्षमता और टालू प्रवृत्ति उन कईयों में से…