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मिट्टी का मोल : सचेत और जिम्मेदार बनाने की कला

कहा जाता है कि दक्षिण एशिया में जीवन के आमफहम काम धरती पर बैठकर या उससे जुडकर ही साधे जाते हैं और नतीजे में इन इलाकों के समाजों में धीरज, सहनशक्ति और संयम सहज मौजूद रहता है। सच हो कि…

महासागरों में बढ़ता प्रदूषण 

मुनाफे और उसकी खातिर पर्यावरण को नेस्त-नाबूद करने की इंसानी फितरत ने समुद्रों को भी नहीं छोडा है। धीरे-धीरे समुद्र भी मैले और निर्जीव होते जा रहे हैं। क्या है, इसकी वजहें? हमारी पृथ्वी पर महासागरों का विशेष महत्व है…

सिगरेट बट्स : खतरे एवं समाधान के प्रयास

हमारे देश में एक वर्ष में बट्स सहित सिगरेट का कचरा लगभग 03 करोड़ टन निकलता है। एक किलो सिगरेट के कचरे में लगभग 3000 बट्स पाये जाते है। बट्स में पाये जाने वाले कैसरजन्य रसायनों से पैदा खतरों के…

अमरनाथ यात्रा का फिर एक बार पर्यावरण प्रबंधन करेगा, इंदौर का स्टार्टअप ‘स्वाहा’

पूरे देश में तेजी से आगे बढ़ता इंदौर का सस्टेनेबिलिटी और वेस्ट मैनेजमेंट स्टार्टअप ‘स्वाहा’ फिर एक बार दुर्गम हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित बाबा अमरनाथ की गुफा यात्रा को पूर्णत: पर्यावरण सम्मत बनाएगा। इस हेतु उसका चयन पिछले वर्ष…

स्‍वच्‍छता : गांव तक पहुंचा, कचरे का कहर

कहा जाता है कि शहरी लोग कचरे का सर्वाधिक विसर्जन करते हैं, लेकिन अब यह व्याधि गांवों तक भी पहुंच गई है। देश में प्रतिदिन 28 करोड टन ठोस कचरा पैदा हो रहा है जिसमें से 10.95 करोड टन ग्रामीण…