Gandhi

सद्भाव, समानता और लोकतंत्र सिर्फ भारत ही नहीं, पूरी दुनिया की जरूरत

‘एक कदम गांधी के साथ पदयात्रा’ रायबरेली शहर पहुंची, पदयात्रा का 14वां दिन रायबरेली 15 अक्टूबर। गांधी जयंती के अवसर पर बनारस से शुरु हुई ‘एक कदम गांधी के साथ पदयात्रा’ 14वें दिन बुधवार को रायबरेली शहर पहुँची। संविधान, लोकतंत्र और…

नफ़रत के दौर में यह यात्रा दे रही है अमन और शांति का संदेश – एडवोकेट अर्चना

वाराणसी राजघाट से दिल्ली राजघाट तक ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा का 13वां दिन जगतपुर 14 अक्टूबर। ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा आज अपने 13वें दिन सुबह 7 बजे रायबरेली ज़िले के ऊँचाहार से आगे बढ़ी। ऊँचाहार बाज़ार…

नए विश्व संकट में पुराने विचारों का नया अर्थ : गांधी, जयप्रकाश और लोहिया की प्रासंगिकता

गांधी, जेपी और लोहिया केवल अतीत के नाम नहीं, भविष्य की दिशा हैं। जब दुनिया हथियारों और बाजारों के जाल में उलझी है, तब उनके समाजवाद, आत्मनिर्भरता और नैतिक राजनीति के विचार फिर जीवित हो रहे हैं। यह समय उन्हें…

समाज और दुनिया को बचाने के लिए आज भी महात्‍मा गांधी जरूरी हैं — राधा भट्ट

राष्ट्रीय गांधी विचार युवा एवं विश्वविद्यालय शिविर का शुभारंभ — हिमालय से मिला जीवन का संदेश कौसानी, 13 अक्टूबर! महात्मा गांधी से जुड़ा उत्‍तराखंड का ऐतिहासिक अनासक्ति आश्रम, कौसानी इन दिनों युवा ऊर्जा और गांधी विचारों से गुंजायमान है। यहाँ…

‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा : ऐतिहासिक कालाकांकर में पदयात्रियों ने जलाई कॉर्पोरेट सामानों की होली

प्रतापगढ़, 13 अक्टूबर। सर्व सेवा संघ की नेतृत्व में जारी ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा आज 12वें दिन सुबह मानिकपुर के ज्वाला देवी धर्मशाला से निकलकर आलापुर पहुंची, जहाँ डॉ. अनुज सोनकर के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने पदयात्रियों…

कुंडा, प्रतापगढ़ में हुआ ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा का स्वागत 

‘एक कदम गांधी के साथ’ वाराणसी राजघाट से दिल्ली राजघाट तक पदयात्रा का 11 दिन मानिकपुर, 12 अक्टूबर। सर्व सेवा संघ की नेतृत्व में 2 अक्टूबर को राजघाट, वाराणसी से शुरू हुई ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा अपने 11वें…

जेपी क्रांति को नैतिक व शास्वत प्रक्रिया मानते थे – रघु ठाकुर

लेखक शिवदयाल की पुस्तक ‘ जयप्रकाश : परिवर्तन की वैचारिकी ‘ का हुआ विमोचन भोपाल, 11 अक्टूबर। ‘ लोकनायक जयप्रकाश नारायण समाज को मानसिक रूप से बदलने में विश्वास रखते थे। वे क्रांति को नैतिक और शास्वत प्रक्रिया में देखना…

गांधीजी की आधुनिकता और उनके मापदंड

आम लोगों में महात्मा गांधी को उनके रहन-सहन, खान-पान और भाषा-भूषा के चलते गैर-आधुनिक, पिछडा और पारंपरिक मानने का चलन है, लेकिन क्या वे सचमुच वैसे थे? या आधुनिकता के उनके मापदंड आम लोगों से भिन्न थे, जिनका वे कडाई…

महात्मा गांधी के विचार नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक : राज्यपाल

भोपाल, 2 अक्टूबर। गांधी भवन,भोपाल के मुख्य सभागार में आयोजित गांधी जयंती समारोह में प्रदेश के राज्यपाल माननीय मंगू भाई पटेल ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार और आदर्श नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं। उन्होंने युवाओं…

गांधी विचार : वैश्विक संकटों का समाधान

महापुरुषों की जयंती अक्सर उनके गुणगान तक सीमित रह जाती है, लेकिन आज की वैश्विक चुनौतियाँ—अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, जलवायु संकट और बढ़ते हिंसक संघर्ष—यह साफ़ करती हैं कि गांधी विचारों की अनदेखी संभव नहीं। उनका दर्शन केवल स्वतंत्रता आंदोलन का…