अध्ययन बताते हैं कि दुनियाभर में हथियारों के अलावा दवाओं का धंधा पूंजी कूटने में सर्वाधिक अहमियत रखता है। दवाओं के इस धंधे में चिकित्सा शिक्षा भी हिस्सेदार है, लेकिन इस सबसे आम मरीज और व्यापक समाज पर क्या और…
हाल ही में किए गए एक व्यापक अध्ययन में पता चला है कि वायरस के ऐसे प्रभाव काफी लंबे समय तक बने रह सकते हैं। अमेरिका के 1.1 करोड़ वृद्ध लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड के विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने पाया…
कोविड-19 बीमारी के असर में, दूसरे तमाम छोटे-मध्यम-लघु उद्योगों की तरह मध्यप्रदेश के धार जिले के ‘बाघ-प्रिन्ट्स’ के कारीगर भी संकटों का सामना कर रहे हैं। पिछले दो सालों में कपडों पर की जाने वाली इस विश्व-विख्यात छापा कला की…
कोरोना वायरस से उपजी कोविड-19 बीमारी अब धीरे-धीरे कम होते हुए समाप्ति के संकेत देने लगी है। जाहिर है, ऐसे में हमें अपने बच्चों के स्कूल फिर से शुरु करना होंगे। लंबे समय बाद स्कूलों, खासकर उच्च और उच्च-माध्यमिक स्तर…
हमारे समय में खेल तक पैसा कमाने का एक ऐसा जरिया बन गए हैं जिसमें चांदी काटने के लिए तरह-तरह के हथकंडे किए जाते हैं। हाल का टोकियो ओलिंपिक भी इससे अछूता नहीं रहा है। खिलाड़यों के रिकार्ड और मेडल…
सूखे और अकाल के चलते बडी संख्या में पलायन बुंदेलखंड की नियति बन गई है। कोरोना महामारी ने इसे और भी बढा दिया है। क्या हैं, वहां के हालात? अपने लेख के लिए शिवाशीष ने ‘सेंटर फॉर फाईनेन्शियल एकॉउन्टेबिलिटी’ (सीएफए)…
कोविड-19 के संकट ने एक बात तो उजागर कर ही दी है कि हमारी सरकारें महामारी तक में जरूरी आंकड़े संभाल नहीं पातीं। सरकारी और श्मशान-कब्रिस्तान से जुटाए गए मौत के आंकडों में जमीन-आसमान का अंतर इसकी एक बानगी है।…
कोविड-19 सरीखी महामारियां हमें अपनी मौजूदा व्यवस्था की बदहाली बताने के अलावा यह चेतावनी भी देती हैं कि हमारा जीवन-यापन का तरीका बेतुका और आत्महंता है। लेकिन क्या हम इसे सुनने-समझने को तैयार हैं? क्या कोविड-19 हमें अपने जीवन को…
कोरोना की महामारी के पिछले एक-डेढ साल ने हमें अपनी बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, लापरवाही और बदइंतजामी के साथ-साथ लोकतंत्र के मौजूदा स्वरूप से भी दो-चार कर दिया है। क्या हम लोकतंत्र के इसी रूप की कल्पना करते थे जिसमें सत्ता…
कोविड योद्धाओं ने जब काम शुरू किया तो उन्हें अन्दाज़ा नहीं था कि यह कब ख़त्म होगा। हर गुज़रते हफ़्ते के साथ यह साफ़ होता गया कि यह संकट उनकी कल्पना से कहीं ज़्यादा लम्बा है। देखते-देखते सितम्बर आ गया,…