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गांधीजी का महात्मा प्रबंधकीय कौशल

प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों को गांधी के आंदोलनों, खासकर उनकी तैयारी के संदर्भ में देखें तो बहुत स्पष्ट रूप से उनका अमल दिखाई देता है। इस लिहाज से गांधी उस प्रबंधन के कारगर गुरु माने जा सकते हैं जिसे अनेक…

गांधी विचार : वैश्विक संकटों का समाधान

महापुरुषों की जयंती अक्सर उनके गुणगान तक सीमित रह जाती है, लेकिन आज की वैश्विक चुनौतियाँ—अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, जलवायु संकट और बढ़ते हिंसक संघर्ष—यह साफ़ करती हैं कि गांधी विचारों की अनदेखी संभव नहीं। उनका दर्शन केवल स्वतंत्रता आंदोलन का…

झारखंड : मधुपुर पधारे गांधी हमारे, सौ साल बेमिसाल

झारखंड के मधुपुर में महात्मा गांधी के ऐतिहासिक आगमन की शताब्दी पर वर्षभर चलने वाले समारोह की शुरुआत हो रही है। यह आयोजन न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए अहम है, क्योंकि बापू केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि…

गांधी जयंती : महात्‍मा गांधी महज़ सिद्धांत नहीं सरल व्यवहार है

2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में जन्मे महात्मा गांधी आज भी पूरी मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। सत्य और अहिंसा को जीवन का आधार मानते हुए उन्होंने भयमुक्त और श्रमशील जीवन का संदेश दिया। सादगी, स्वावलम्बन और…

गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर ‘पहली तारीख’ में कला और कविता का संगम

भोपाल, 1 अक्‍टूबर। गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर ‘पहली तारीख’ का 18वाँ आयोजन हर बार की तरह गांधी भवन, एकता परिषद में हुआ। इस बार का आयोजन कला, कविता और संवाद का अनूठा संगम साबित हुआ। प्रसिद्ध कलाकार विक्रम…

दशहरे पर पूजनीय-शमी : विजय, परंपरा और पर्यावरण का अमर प्रतीक

दशहरे पर शमी पूजन की परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है बल्कि इतिहास, लोकजीवन और पर्यावरणीय महत्व को भी दर्शाती है। राजस्थान में खेजड़ी कहलाने वाला यह वृक्ष रेगिस्तान का राजा माना जाता है, जिसकी छाया, फलियां और…

एक कदम गांधी के साथ : संविधान, लोकतंत्र और इंसानियत की सहयात्रा

सर्व सेवा संघ ने सहमना संगठनों और सहयोगियों के साथ राजघाट, वाराणसी से दिल्ली तक संविधान मार्च की पदयात्रा की घोषणा की है। गांधी जयंती (2 अक्टूबर) से शुरू होकर संविधान दिवस (26 नवंबर) को जंतर-मंतर पर संपन्न होने वाली…

ओडिशा : सौ साल पहले ओडिशा में महात्मा गांधी

ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के साथ-साथ समाज सुधार और आत्मनिर्भरता की अलख जगाने वाले महात्मा गांधी का ओड़िशा प्रवास स्वतंत्रता आंदोलन का ऐतिहासिक अध्याय बन गया। 1921 और 1925 में कटक में हुए उनके प्रवास ने खादी, चरखे और…

बुजुर्गों की मुस्कान में ही छिपा है समाज का भविष्य

भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों का सम्मान सदैव सर्वोपरि माना गया है, किंतु आज वृद्धों की उपेक्षा और अत्याचार गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1991 से प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाने की पहल…

विधवाओं के भीतर साहस भरने की जरूरत : मध्‍यप्रदेश में किया विधवा प्रथा उन्मूलन का सूत्रपात

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में महिला जागृति अभियान की पांचवी वर्षगांठ पर वरिष्ठ साहित्यकार अरुणा खरगोनकर द्वारा संपादित विधवाओं की दशा पर केंद्रित एक अभूतपूर्व स्मारिका का लोकार्पण किया गया, जो नई सदी में विधवाओं से संबंधित मुद्दों पर…