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देश में पहली बार दास्तानगोई शैली में पेश की वाजपेई दंपति ने गांधी कथा

देश में पहली बार दास्तानगोई शैली में पेश की वाजपेई दंपति ने गांधी कथा

दिल्ली के 30 जनवरी मार्ग पर हमेशा छाया रहता है शोकपूर्ण सन्नाटा : विवेक शुक्ला

नई दिल्ली 20 सितंबर।  महात्मा गांधी के मूल्यों, विचारों और आदर्शों  के साथ उनकी जिंदगी और देश और दुनिया से उनके जुड़े अनेक छोटे बड़े प्रसंगों से परिपूर्ण गाथा को विख्यात कवि और संपादक लक्ष्मी शंकर वाजपेई और चर्चित कवयित्री ममता किरण ने सैकड़ों वर्ष पुरानी और लुप्त हो रही कहानी कहने की एक कला दास्तान गोई शैली के तहत  अत्यंत मार्मिक अंदाज में पेश किया। इस प्रस्तुति में उनको साथ दे रहे अनिमेष शर्मा ने बांसुरी के धुन देकर दास्तान गोई  नाट्य शैली में नवाचार कर दिया । नहीं तो इस नाट्य शैली में एक या दो लोग मंच पर बैठकर, बिना किसी साज-सज्जा के, सिर्फ आवाज और अंदाज से पूरी दुनिया बना देते थे। इसमें किस्सागोई, अदाकारी, शायरी, इतिहास सब मिल जाता है।

वाजपेई ने यह प्रस्तुति गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा और विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान द्वारा पिछले एक दशक से भी अधिक समय से संयुक्त रूप से संचालित सन्निधि संगोष्ठी में दी। गांधी पर केंद्रित संगोष्ठी में गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा की अध्यक्ष कुसुम शाह सहित राजधानी के साहित्यकार, कवि, लेखक, पत्रकार और समाज सेवी उपस्थित थे। श्रोताओं ने वाजपेई की प्रस्तुति की सराहना की  और कम समय में गांधी की विशाल गाथा की  दास्तानगोई शैली में प्रस्तुति को खासकर नई पीढ़ी के लिए व्यावहारिक, सार्थक और ज्ञानपरक बताया।

दिल्ली के सबसे बड़े किस्सागो पत्रकारों में से एक विवेक शुक्ला कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। गांधी पर उनकी कई पुस्तके प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने दिल्ली से गांधी के नाते  का जिक्र करते हुए कहा कि गांधी जी का दिल्ली से रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं, आखिरी दिनों के दर्द का भी रिश्ता है। आज भी दिल्ली के 30 जनवरी मार्ग वाले इलाके में हमेशा शोकपूर्ण सन्नाटा छाया रहता है। उन्होंने गांधी जी की हत्या प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि मुझे गांधी हत्या का पहला चश्मदीद गवाह नंदलाल मेहता, जो कनॉट प्लेस में रहते थे, रोज बिरला हाउस प्रार्थना में जाते थे। उन्हीं की गवाही पर गांधी जी की हत्या से संबंधित एफ आई आर  लिखी गई। मैंने उनकी भतीजी अवनी पारेख से मिलकर यह सच्चाई निकाली।

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उन्होंने गांधी हत्या के बाद तुगलक रोड थाने की गतिविधियों का किस्सा सुनाते हुए बताया कि जिस डी एस पी जसवंत सिंह ने गोडसे को पकड़ा था, उनके बेटे गुरदयाल सिंह का मैने इंटरव्यू किया। शुक्ला ने गांधी जी की आखिरी रेल यात्रा की  चर्चा करते हुए कहा कि  9 सितंबर 1947 को गांधी जी की जिंदगी की आखिरी ट्रेन यात्रा थी। 9 सितंबर को कोलकाता से दिल्ली आने वाली ट्रेन पुरानी दिल्ली नहीं, शाहदरा रुकी क्योंकि शहर में दंगे चल रहे थे। वहाँ सरदार पटेल और राजकुमारी अमृत कौर ने उनका स्वागत किया।

विवेक शुक्ला ने कहा कि गांधी जी ने शाहदरा वालों से कहा था “दंगा करने वालों को अपने मोहल्ले में कामयाब मत होने देना”। उन्होंने बताया कि एडवर्ड पार्क (अब सुभाष पार्क) में 7 मार्च 1931 को गांधी जी ने कहा था – “मैं किसी भी हालत में भगत सिंह को फांसी देना स्वीकार नहीं कर सकता।” उन्होंने वाल्मीकि मंदिर और बिरला हाउस में गांधी जी के निवास के बारे में भी विस्तार से बताया।

शुक्ला जी का कहना है  कि दिल्ली ने गांधी को मारा भी और गांधी ने दिल्ली को बचाया भी। 1947 के दंगों में अगर गांधी ना होते, तो दिल्ली मुर्दों का शहर बन जाती।

अमेरिकी पत्रकार लुई फिशर सेवाग्राम आश्रम में हफ़्ते भर ठहरे। वही लुई फिशर, जिन्होंने आठ बरस बाद महात्मा गांधी की बेहद चर्चित जीवनी ‘द लाइफ ऑफ़ महात्मा गांधी’ लिखी। इस पुस्तक का हिन्दी में अनुवाद करने वाले सौरभ राय ने संगोष्ठी में कहा कि लुई  सेवाग्राम आश्रम के सप्ताह भर के प्रवास के दौरान  महात्मा गांधी से मिले और उनसे देश-दुनिया के संदर्भ में विस्तार से बातचीत की। इस दरमियान फिशर ने गांधी जी के रोजमर्रा के जीवन, उनके व्यक्तित्व और उनके सहयोगियों को भी बहुत करीब से देखा-समझा। और अपनी उस समझ को पाठकों के लिए अपनी किताब ‘ए वीक विद गांधी’ में संजो दिया। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में तत्कालीन हिंदुस्तान की गरीबी, अशिक्षा और बढ़ती हुई जनसंख्या के सवाल भी शामिल हैं। साथ ही, धर्म का असल मतलब और जीवन में उसे उतारने को लेकर गांधी के विचार भी बड़े स्पष्ट रूप में इस किताब में सामने आते हैं।

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सन्निधि संगोष्ठी में  ट्रांसजेंडर दीपिका कुलश्रेष्ठ और वरिष्ठ चित्रकार हेना चक्रवर्ती को उपलब्धियों के लिए कस्तूरबा गांधी शक्ति संकल्प सम्मान से सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के मंत्री और साहित्यकार अतुल प्रभाकर ने और संचालन वरिष्ठ पत्रकार और समाज कर्मी प्रसून लतांत ने किया।

इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ गांधीवादी रमेश शर्मा , वरिष्ठ समाज कर्मी देवेंद्र मित्तल, दीपिका कुलश्रेष्ठ, हेना चक्रवर्ती, आराध्या, बालकृति और रेणु ने भी अपने विचार साझा किए।

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