आदिवासी समाज

ओडिशा में प्राकृतिक संसाधनों की कॉर्पोरेट लूट व दमन खत्म करने हेतु मुख्‍यमंत्री को लिखा पत्र

नियामगिरी सुरक्षा समिति के आदिवासी नेताओं और समर्थकों के खिलाफ़ यू.ए.पी.ए – एफ.आई.आर और बेबुनियाद आरोप खारिज करने की मांग   मुंबई, 22 अगस्‍त। देशभर के 20 राष्ट्रीय नेटवर्क / संगठनों, 40 जन संगठनों और 350 से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं,…

वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक 2023 : वनों के बिगाड़ के लिए बदल रहा कानून

करीब सवा चार दशक पहले, जब पर्यावरण दुनिया के सामने एक आसन्न संकट की तरह उभर रहा था, भारत में ‘वन (संरक्षण) अधिनियम-1980’ बनाया गया था। अब विकास की बगटूट भागती अंधी दौड़ के सामने पर्यावरण ओझल होता जा रहा…

देश के 3200 से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति से की मणिपुर का दौरा करने और प्रताड़ित कुकी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की अपील

जवाबदेही सुनिश्चित करने और हिंसाग्रस्त राज्य में शांति और न्याय की बहाली सुनिश्चित करने का अनुरोध 23 जुलाई, 2023। जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (NAPM) समेत देश भर के सैकड़ों आंदोलनों और संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हुए करीब 3,200 से…

Manipur की घटना बहशीपन, नृशंसता और हैवानियत की पराकाष्ठा; मुख्यमंत्री का वक्तव्य शर्मनाक

सर्व सेवा संघ ने की मणिपुर की जनता से शांति एवं सहिष्णुता की अपील सेवाग्राम, 21 जुलाई । सर्व सेवा संघ (अखिल भारत सर्वोदय मंडल) के प्रबंधक ट्रस्टी महादेव विद्रोही ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि Manipur मणिपुर पिछले कई…

आदिवासियों पर हो रहे हमले के खिलाफ बड़वानी के हजारों आदिवासी हुए लामबंद

माधुरी कृष्णस्वामी पर जिला बदल की कार्रवाई अन्यायपूर्ण : नर्मदा बचाओ आंदोलन बडवानी, 20 जुलाई। बुधवार को बड़वानी में आदिवासियों के बीच कार्यरत जागृत आदिवासी दलित संगठन के नेतृत्व में हजारों आदिवासी महिला एवं पुरुषों ने संगठन सहयोगी सामाजिक कार्यकर्ता…

आदिवासियों की जागरूकता से क्‍यों बौखला रही है सरकार : माधुरी बहन

वन कटाई और अत्याचार के खिलाफ आदिवासियों के हित में लड़ने वाली सामाजिक कार्यकर्ता माधुरी बहन को किया जिला बदर BURHANPUR, 8 जुलाई। शु्क्रवार को जिला कलेक्टर, बुरहानपुर द्वारा जागृत आदिवासी दलित संगठन की प्रमुख एवं ख्‍याननाम सामाजिक कार्यकर्त्‍ता माधुरी…

वन के व्यापार में बेदखल होते आदिवासी Tribals

अपने तरह-तरह के जैविक, सामाजिक और प्राकृतिक उपयोगों के आलावा आजकल जंगल व्यापार-धंधे में भी भारी मुनाफा कूटने के काम आ रहे हैं। इसमें सेठों, सरकारों की बढ़-चढ़कर भागीदारी हो रही है। कैसे किया जाता है, यह कारनामा? और क्या…

अनुभव से आई एक किताब : ‘सभ्यता का संकट बनाम आदिवासियत’

झारखंड के मधुपुर इलाके में बरसों से गैर-दलीय राजनीतिक-सामाजिक कार्य में लगे घनश्याम ने हाल में अपने करीब आधी सदी के अनुभवों पर एक किताब लिखी है। जाहिर है, इसमें तरह-तरह के खट्टे-मीठे अनुभवों, विपरीत परिस्थितियों के साथ-साथ कठिन समय…

झारखंड : खनिज की खातिर खत्म होती खेती

किसानों, आदिवासियों और खेती से जुडे अनेक लोगों के लिए आजकल विकास का मतलब उनके प्राकृतिक संसाधनों, खासकर जमीन की लूट हो गया है। आदिवासी राज्य झारखंड भी इससे अछूता नहीं है। झारखंड के एक इलाके में जमीन की मारामार…

आदिवासियों पर आधारित विकास : सच्ची खेती, सच्चा बचपन और सच्चा लोकतंत्र

स्थानीय ज्ञान, पडौस के संसाधन और समाज की देसी बनक के आधार पर विकास योजनाओं को रचा जाए तो नतीजा क्या, कैसा हो सकता है? इसे जानने के लिए भील आदिवासियों की ‘वागधारा’ जैसी संस्थाओं के काम पर नजर डालना…