Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

आदिवासी समाज

अपराध के कलंक से कितने आजाद हैं, घुमन्‍तु समुदाय?

अजीब बात है कि अपने आसपास रहने-बसने वाले घुमन्‍तु लोगों के बारे में आम समाज निरा अनजान है और उन्‍हें ज्‍यादा-से-ज्‍यादा अपराधिक जातियों की तरह पहचानता है। कौन हैं, ये ‘विमुक्‍त’ और ‘घुमन्‍तु’ समुदाय? आम समाज के कितने लोगों को…

भारिया से बूझें, कुपोषण की काट

 9 अगस्त , विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त का दिन पूरी दुनिया के सभी आदिवासी समाज के लोगों को अपनी भाषा – संस्कृति, खान-पान, जीवन शैली व स्वशासन – परम्परा के संरक्षण और विकास के साथ-साथ जल – जंगल –…

अब भी भारत के 11 करोड़ आदिवासियों के स्वास्थ्य पर विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के लागू होने का इंतजार

विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर विशेष रिपोर्ट गढ़चिरौली ।  ठीक दो वर्ष पूर्व, अगस्त 2018 में, ‘भारत में जनजातीय स्वास्थ्य – खाई कैसे मिटायें? : भविष्य के लिये मार्गदर्शन’ नामक रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर भारत सरकार को प्रस्तुत की…

विनाश हो गया है, आदिवासियों के लिए विकास

आजादी के बाद से हमारे देश में जिस तौर-तरीके का विकास हुआ है उसने आदिवासी इलाकों में उसे विनाश का दर्जा दे दिया है। खनन, वनीकरण, ढांचागत निर्माण और भांति-भांति की विकास परियोजनाओं ने आदिवासी इलाकों की मट्टी-पलीत कर दी…

आदिवासियों की सब्जी बाड़ी

श्रम आधारित गांव की, खेती की संस्कृति की वापसी हो रही है। गांव की पारंपरिक खान-पान संस्कृति बच रही है। इस तरह की मुहिम को आंगनबाड़ी जैसी योजनाओँ से भी जोड़ा जा सकता है। बाड़ियों में सब्जियों की खेती गांवों…

जंगल से आती है भोजन की थाली

आदिवासियों की जीवन शैली, उनकी परंपरागत खेती किसानी और जंगल का खानपान का अत्यधिक महत्व है। जंगलों का लगातार कटते जाने का सीधा असर लोगों की खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहा है। आदिवासियों ने अब जंगल और खेती बचाने के…

झाडों के झगडे़ से बना झारखंड

देशभर के वन विभागों की बुनियाद मानी जाने वाली ‘वैज्ञानिक वानिकी’ कई बार कितनी असमाजिक, अवैज्ञानिक साबित होती है, यह झारखंड राज्य के निर्माण की इस सच्ची कहानी से समझा जा सकता है। कैसे छोटा-नागपुर इलाके के संथाल, उरांव आदिवासी…

विस्थापन का जबाव विद्यालय

मध्यप्रदेश में आदिवासी बहुल अलीराजपुर जिले में नर्मदा-तट के गांव ककराना को भी, आसपास के कई गांवों की तरह, सरदार सरोवर परियोजना की डूब का सामना करना पडा था, लेकिन इलाके में सक्रिय ‘खेडूत मजदूर चेतना संगठ’ से जुडे कुछ…

आदिवासी जानते हैं स्वाद और पौष्टिकता

आदिवासी समाज के पास खान-पान का अपना एक तंत्र है। यह अपने आप में पूर्ण है तथा इसी के चलते आदिवासी समाज शताब्दियों से स्वयं को स्वस्थ व प्रसन्न बनाए रखे हुए हैं। आधुनिक औद्योगिक खेती ने मनुष्य से उसकी…

खतरे में आदिवासी : विकास की अवधारणा का शिकार

भारत में निवास कर रहा आदिवासी समुदाय ’’विकास’’ की आधुनिक अवधारणा का शिकार होकर धीरे-धीरे अपने पारंपरिक रहवास से बेदखल हो रहा है। बांध से लेकर खनन तक, समस्त परियोजनाओं की सबसे ज्यादा मार आदिवासियों पर ही पड़ती है। पुष्पा…