Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

आदिवासी समाज

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022: 24 लाख वनवासियों के सम्मानपूर्वक जीवन, विकास और पर्यावरण के लिए वनाधिकार कानून लागू हो

वन पंचायत संघर्ष मोर्चा की मतदाताओं, प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों से अपील जल, जंगल, जमीन पर स्थानीय समाज के हकों के सवाल ने उत्तराखंड राज्य को जन्म दिया था, परंतु इतने संघर्षों के पश्चात राज्य में यह हक निरंतर घटते…

वन मान्यता अधिनियम को लागू करने के लिए हर जिले में टास्कफोर्स का गठन हो

वन अधिकार कानून को लेकर एकता परिषद का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू भोपाल, 7 दिसंबर । वन मान्यता अधिनियम के लागू होने के 15 वर्षों के बाद भी वंचित आदिवासी समुदाय अपने हक और अधिकार से महरूम है। इन…

‘पेसा’ (PESA) से उलट ‘पेसा’ (PESA) के नियम

जनजातीय गौरव दिवस’ (15 नवम्बर) मध्यप्रदेश सरकार को करीब ढाई दशक पहले संसद में पारित ‘पेसा कानून’ की अब जाकर सुध आई है। पांच महीने पहले ‘पेसा’ के नियम-कानूनों का दस्तावेज तैयार करके उस पर संबंधित विभागों की राय मांगी गई,…

मंडला के निरस्त बांध को फिर बनाने में आमादा है मध्यप्रदेश सरकार

बसनिया बांध को निरस्त करने हेतु विधायक मर्सकोले ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र नर्मदा नदी पर बनने वाले छोटे बडे बांधों की श्रृखंला में मंडला के बसनिया बांध को पूर्व में निरस्‍त कर दिया गया था। लेकिन हाल ही में…

अभयारण्य से भयभीत गांव

अपने आकार के करीब एक चौथाई इलाके में जंगल वाले मध्यप्रदेश में नए अभयारण्यों का प्रस्ताव आया है। ऐसे में उन लोगों को क्या होगा जो इन जंगलों को अपना माई-बाप मानकर उन पर निर्भर जीवन जीते और एन उसके…

पर्यावरण के संरक्षक हैं आदिवासी

9 अगस्त : विश्व आदिवासी दिवस जल, जंगल और जमीन को परंपराओं में भगवान का दर्जा देने वाले आदिवासी बिना किसी आडंबर के जंगलों और स्वयं के अस्तित्व को बचाने के लिए आज भी निरंतर प्रयासरत है। यह समुदाय परंपराओं…

कानून-कायदों में फंसी वन पंचायतें

आधुनिक कथित वैज्ञानिक वानिकी की एक खासियत यह भी है कि वह पीढियों से चले आ रहे वनों के कारगर, परम्परागत प्रबंधन को अनदेखा करते हुए उन्हें लगभग मूर्खतापूर्ण ढंग से खारिज करती है। उत्तराखंड में भी करीब नौ दशक…

हूल रचते आदिवासी कवि

हूल क्रांति दिवस : 30 जून हूल क्रांति दिवस 30 जून को मनाया जाता है। इसे संथाल विद्रोह भी कहा जाता है।‘संथाल हूल’ के नाम से झारखंड, ओडिशा, बंगाल, बिहार, असम के अलावा देश-विदेश में भी हूल दिवस मनाया जाता…

कोरोना का कहर झेलते आदिवासी

पिछले कुछ दिनों से कोविड-19 की दूसरी लहर के हल्की पडने की खबरें आ रही हैं और तमाम सरकारी, गैर-सरकारी लवाजमा अब तीसरी लहर की तैयारी में जुट गया है, लेकिन क्या हमारे सुदूर गांव-देहातों और आदिवासी इलाकों में भी…

औषधि के रूप में उपयोगी : महुआ का तेल

आदिवासियों में महुआ एक बहु-उपयोगी पेड होता है, इसलिए कई जनजातियां उसे अपने देवी-देवताओं, पुरखों से भी जोडकर देखती हैं। महुए का एक उपयोगी उत्‍पाद है, तेल। इसके औषधीय गुणों की चर्चा आयुर्वेद में की गई है। महुआ के फूल,…