डिंडोरी को जल अभावग्रस्त घोषित किया जाना केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि गहराते जल संकट की गंभीर चेतावनी है। गिरते भूजल, सूखते स्रोतों और बढ़ती गर्मी के खतरे के बीच पानी के उपयोग पर नियंत्रण लागू किया गया है। आदिवासी…
अरावली संरक्षण को लेकर उठे हाल के जनांदोलन ने एक बार फिर चरोखर यानि ‘ओरण’ और दुधारू पशुओं की अहमियत भी उजागर कर दी है। दरअसल पर्यावरण आसपास की तमाम-ओ-तमाम प्राकृतिक इकाइयों के मिलने से बनता है जिनमें चरोखर और…
आज परीक्षा केवल पाठ्यक्रम की नहीं, बच्चों के मनोबल की भी परीक्षा बनती जा रही है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, अपेक्षाएँ और तुलना का दबाव छात्रों में डर और असुरक्षा पैदा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सहयोगी माहौल, पर्याप्त विश्राम…
प्याज, लहसुन और फूलों समेत सब्जियों के लिए ख्यात नासिक अब वाइन उद्योग को बढ़ावा देने में लगा है, लेकिन क्या यह बाजार के अलावा व्यापक समाज के लिए भी मुनासिब होगा? अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों ने यही…
दुनियाभर के दिमागों को दुरुस्त करने वाली ‘ऑक्सफैम’ की रिपोर्ट फिर हाजिर है। 19 से 23 जनवरी के बीच हो रहे ‘वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम’ के पहले दिन चेतावनी-स्वरूप जारी की गई इस रिपोर्ट ने दुनियाभर के आर्थिक विकास की पोलपट्टी…
दस मिनट में कोई सामान आप तक पहुंचाने वाले डिलीवरी बॉय या ‘गिग वर्कर्स’ लगभग हर शहर में बगटूट भागते, अपनी मोटर साइकलें दौड़ाते आपको दिख जाएंगे। क्या उनकी इस बदहवासी में सिर्फ कमाई का प्रोत्साहन भर रहता है? या…
जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया का इंदौर–भोपाल सर्वे में किये नागरिक सर्वे से खुलासा इंदौर/भोपाल, 16 जनवरी। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई त्रासदी के बाद जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया द्वारा इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति की वास्तविक…
स्वच्छता का सिरमौर कहलाने वाला, विकास और समृद्धि की चमक में डूबा इंदौर आज एक भयावह विडंबना से गुजर रहा है। जहाँ मेट्रो, फ़्लाईओवर और करोड़ों के समारोह हैं, वहीं लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। भागीरथपुरा की त्रासदी…
अनुपम मिश्र को शरीर छोड़े एक दशक हो रहा है, लेकिन पानी और पर्यावरण पर मंडराते संकटों में उनकी चेतावनी आज और तेज़ सुनाई देती है। उन्होंने बार-बार बताया कि जल की कमी प्रकृति की नहीं, समाज की असंवेदनशीलता की…
दुनिया तेज़ विकास की दौड़ में पर्यावरण, गरिमा और मानवाधिकारों की उपेक्षा करती जा रही है। आधुनिकता ने नए जोखिम खड़े किए हैं, जिससे आज की पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। इसी संदर्भ में मानवाधिकार दिवस 2025 की…