विचार

शिक्षा : बहुतेरे बच्चे सीख क्यों नहीं पा रहे ?

एक प्रभावी शिक्षक होने के लिए लगातार जुटे रहने और तैयारी की जरूरत होती है और उसे दैनिक अभ्यास में लाने के लिए उचित परिस्थितियों की जरूरत होती है| लेकिन भारत का ठीक से न काम करने वाला शिक्षक शिक्षा…

अब जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये सेक्‍टोरल के बजाय ट्रांसफॉर्मेशनल सुधार की जरूरत है

आईपीसीसी की छठी मूल्‍यांकन रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा अनुकूलन पर चर्चा जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) की ताजा रिपोर्ट भविष्‍य की एक भयावह तस्‍वीर पेश करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कार्बन उत्‍सर्जन मौजूदा…

‘आखिरी आदमी’ के लिए बापू का आहार

आजकल स्वास्थ्य, संतुलित भोजन और वजन-वृद्धि बडा बाजार हैं और उन्हें लेकर तरह-तरह के कौतुक होते रहते हैं। गांधी ने भी अपने और अपने संगी-साथियों के लिए भोजन की एक पद्धति विकसित की थी जिसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण था, समाज के…

मुद्रा का रूपांतरण : ‘कैश’ की जगह ‘क्रिप्टो’

जीवन के अनेक पहलुओं, खासकर आर्थिक लेन-देन के आभासी होते जाने की तरह अब मुद्रा भी आभासी हो गई है और इसे नाम दिया गया है – ‘क्रिप्टो।’ क्या यह ‘क्रिप्टो करेंसी’ सभी को समान रूप से उपलब्ध हो सकेगी?…

यूक्रेन : गूंगी दुनिया की त्रासदी

अब रूस व नोटो के दो पाटों के बीच पिसता हुआ यूक्रेन है. यूक्रेन के भी अंतरविरोध हैं जैसे हम मुल्क में जातियों-भाषाओं-प्रांतों के अंतरविरोध होते हैं. उन अंतरविरोधों का न्याय व समझदारी से शमन करना यूक्रेन की सरकार का…

जो तोड़ने से भी न टूटे वह गांधी है

गांधी सामयिक हैं, यह बात नारों-गीतों-मूर्तियों-समारोहों-उत्सवों से नहीं, समस्याओं के निराकरण से साबित करनी होगी. जो गांधी को चाहते व मानते हैं उनके लिए गांधी एक ही रास्ता बना व बता कर गए हैं : अपने भरसक ईंमानदारी व तत्परता…

हिजाब तो एक बहाना है ! निशाने पर कुछ और है ?

सवाल अब बुर्के या हिजाब के पहनने या नहीं पहनने का ही नहीं बल्कि यह भी बन गया है कि क्या एक विचारधारा विशेष के प्रति प्रतिबद्ध उत्तेजक भीड़ ही यह तय करने वाली है कि किसे क्या पहनना या…

हिजाब के सवाल पर बहस; प्रेम, भाईचारे और विश्वास से ही विवाद का हल

अरुण कुमार डनायक  मुस्लिम छात्राएं हिजाब पहनें या न पहनें, इस मुद्दे को लेकर कर्नाटक में विरोध हो रहा है। मामला उडुपी जिले के एक कॉलेज का है। यहां से जो खबरें आ रही हैं, वे चिंतनीय हैं। पर्दा प्रथा…

स्वास्थ्य : खाने के खतरे

उद्योगों और उनसे खडी की जाने वाली पूंजी का ताजा शिकार खाद्य-प्रसंस्करण उद्योग हुआ है। इस प्रक्रिया में पहले खाद्य पदार्थों को बाजार के लिहाज से चमकदार बनाने के लिए उनकी पौष्टिकता कम या खत्म की जाती है और फिर…

दिया जलाओ : राजनीति ने जलता दिया बुझा दिया।

क्या किसी को याद है कि राजधानी में ही एक ज्योति और भी जल रही है? बापू की समाधि राजघाट पर जलती ज्योति क्या यह कह बुझाई जाएगी कि स्वतंत्रता के शहीदों का एक नया स्मारक हम बना रहे हैं…