5 मार्च को इंदौर में होगा महिला कबीर यात्रा का समापन भोपाल, 2 मार्च । जाने-माने कबीर गायक पद्मश्री प्रह्लाद टिप्पाणिया ने कहा कि कबीर की बानी को अगर समाज सुने तो तमाम तरह के विभाजन, नफ़रत और द्वेष समाज…
अजमेर में राष्ट्रीय स्तरीय गांधीवादी संस्थाओं का दो दिवसीय सम्मेलन सम्पन्न अजमेर। राजस्थान सरकार में शांति एवं अहिंसा विभाग की ओर से अजमेर में राष्ट्रीय स्तरीय गांधीवादी संस्थाओं का दो दिवसीय सम्मेलन 25 व 26 फरवरी 2023 को गांधी स्मृति…
खादी, जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम का एक सर्वमान्य प्रतीक है, सरकारी नीतियों के चलते क्या अपने मूल स्वरूप में बच पाएगी? क्या सर्वग्राही बाजार और आधुनिक फैशन उसे भी धीरे-धीरे ‘सिन्थेटिक’ वस्त्रों की जमात में शामिल नहीं कर देंगे? बर्लिन…
भोपाल में युवाओं के एक लोकप्रिय ‘अड्डे’ की हैसियत पा चुकी ‘यंगशाला’ उनमें विभिन्न धर्मों की समझ विकसित करने की जरूरी पहल कर रही है। इसमें युवाओं को तरह-तरह के धार्मिक स्थलों की यात्रा के अलावा, संभव हो तो उन…
‘झेन आर्ट ऑफ मोटर-साइकल मेंटीनेंस’ किताब के लेखक जिस तरह मशीनों के मिस्त्री को कविता से जोडकर देखते हैं, ठीक उसी तरह देश के ख्यात वैज्ञानिक होमी भाभा ने परमाणु-विज्ञान सरीखे गरिष्ठ विषय पर अपनी मेधा को संभवत: पेड-पौधों से…
जातियों और धर्मों में विभाजित हमारे समाज का एक बडा संकट, एक-दूसरे की अज्ञानता से उपजी हिंसक असहमतियां भी हैं। कतिपय राजनीतिक जमातें इसी अज्ञानता का लाभ लेकर लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ भडकाती रहती हैं। मसलन – मध्यकालीन इतिहास…
एक दशक पहले तक जिस भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसन्धान केंद्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर के सुपर स्पेशिऐलटि अस्पताल के रूप में थी जहाँ बारह से ज्यादा उच्चत्तर चिकित्सा विभागों में कंसल्टेंट कार्यरत रहते थे और आठ बाह्य चिकित्सा यूनिट्स…
देश-हित में राहुल की यात्रा का योगदान यह माना जा सकता है कि नागरिक सत्तारूढ़ दल और उसके आनुषंगिक संगठनों के उग्रवादी कार्यकर्ताओं से कम डरने लगेंगे। गौर किया जा सकता है कि सांप्रदायिक विद्वेष की घटनाओं में कमी दिखाई…
राहुल जीते जागते सौम्य समझदार गंभीर वृत्ति के मजबूत कद काठी के नेक दिल इंसान है जैसा कि उनसे यात्रा में मिले कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओ का यह अनुभव है। लोग उनसे प्रभावित भी होते है। उनको अपने बीच आम वेशभूषा…
एक ठीक दर्शक या पाठक की तरह आंख-कान खोलकर देखें तो अनुसूचित जातियों, जनजातियों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों जैसे तबकों को मीडिया में मिलने वाली नगण्य सी जगहें साफ देखी जा सकती हैं। विडंबना यह है कि हमारी कुल आबादी में ये…