गांधी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अजमेर राष्ट्रीय सम्मेलन में मंथन

अजमेर में राष्ट्रीय स्तरीय गांधीवादी संस्थाओं का दो दिवसीय सम्मेलन सम्‍पन्‍न

अजमेर। राजस्थान सरकार में शांति एवं अहिंसा विभाग की ओर से अजमेर में राष्ट्रीय स्तरीय गांधीवादी संस्थाओं का दो दिवसीय सम्मेलन 25 व 26 फरवरी 2023 को गांधी स्मृति उद्यान में सम्‍पन्‍न हुआ। सम्मेलन ने देश में एक बार पुनः अमन, चैन आपसी भाईचारा, तरक्की और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपनों के भारत को खड़ा करने के लिए पूरी ताकत से जुटने के संदेश की नींव रखी। अजमेर सम्मेलन और ऎसे ही अन्य कार्यक्रमों की श्रृंखला से गांधीवादी विचारक बापू के संदेश और दर्शन को पूरे देश में प्रसारित करेंगे।

उल्‍लेखनीय है कि पहली बार अजमेर में गांधीवादी संस्थाओं का राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ है। गांधी विचारकों के वक्तव्य के माध्यम से सुझाव भी लिए गए कि महात्मा गांधी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का काम प्रभावी तरीके से कैसे किया जाए। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिये गांव-गांव तक गांधी विचारधारा को पहचाने के लिए कार्यकर्ता तैयार किए जाएं।

शांति एवं अहिंसा विभाग के सचिव एवं राजस्थान समग्र सेवा संघ अध्यक्ष सवाई सिंह ने बताया कि एक वर्ष से विभिन्न जिलों में प्रशिक्षण कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता देश की सबसे बड़ी ताकत है। इस समरसता में कड़वाहट घोलने का काम देश में हो रहा है। इस कारण लोगों में दूरियां बढ़ रही है। महात्मा गांधी ने धर्म निरपेक्षता को बढ़ावा दिया। वह कौमी एकता के पक्ष में थे। महात्मा गांधी कहते थे कि सभी जाति-धर्म और समाज की कौमी एकता ही देश को मजबूत बना सकती हैं।

महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित सेवाग्राम से आई आशा बोथरा ने कहा कि सेवाग्राम महात्मा गांधी का अंतिम आश्रम रहा है। तत्कालीन समय में आजादी और आर्थिक राजधानी सेवा आश्रम रहा। उन्होंने कहा कि गांधी कभी आदर्श उपदेश की बात नहीं करते। वे हमेशा तर्क किया करते थे। गांधी विचारक बोथरा ने राजस्‍थान सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश के किसी भी राज्य में शांति एवं अहिंसा विभाग नहीं है। आशा बोथरा ने कहा कि आज जो हम देख रहे हैं और उसे समझ रहे हैं। ऐसे में एक नई आजादी की लड़ाई हम किस तरह से मिलकर लड़ें । यह हमको सोचना पड़ेगा।

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उन्होंने कहा कि हम अब भी नहीं समझ पाए कि हम किन हाथों में भविष्य देकर जाएंगे. देश में विविध रंग हैं। हम क्या देश को केवल एक ही रंग में रंग दे ना चाहते हैं। एक तरफ हम विभिन्न रंगों से होली खेलते है। तो हम उसे केसरिया और हरे में क्यों बांट देना चाहते हैं। क्यों नफरत के बीज बोए जा रहे हैं। इतना जहर भर दिया गया है कि 8 साल का बच्चा भी जानता है कि हिंदू-मुसलमान क्या होता है। गांधी पर लिखी किताबें पढ़ें, तो युवाओं को पता चले कि गांधी ने देश का विभाजन किया या उन्होंने कहा था कि मेरी लाश पर हिंदुस्तान और पाकिस्तान बनेगा। अंत तक गांधी विभाजन के पक्ष में नहीं थे।

गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्‍यक्ष कुमार प्रशांत ने कहा कि हमारे मुल्क में सामाजिक समरसता नहीं रही है और ना ही आर्थिक बराबरी के बारे में किसी के मन में कोई भाव रह गया है। आज दिक्कत यह है कि महात्मा गांधी को आज हम इतने अच्छे से समझते नहीं हैं कि हम युवा पीढ़ी को अच्छे तरीके से गांधी के बारे में समझा सकें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं। उनका सही खंडन किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के मामले में राजस्थान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। तीनों जोन में बड़े स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम हुए हैं। अब हम पंचायत स्तर पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए हम 6 माह से कार्यरत है।

राष्ट्रस्तरीय सम्मेलन के समापन पर मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष डॉ सी.पी.जोशी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों और दर्शन को वर्तमान परिस्थितियों में लागू करने की महत्ती आवश्यकता है। इन आदर्शों और मानकों को हासिल करने के लिए ऎसे मजबूत विचारकों और विचारधारा की आवश्यकता है, जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का डटकर मुकाबला कर सकें। इन्हीं विचारकों के समक्ष यह चुनौती भी है कि वे वर्तमान पीढ़ी को मौजूदा परिस्थितियों में गांधी के विचारों की उपयोगिता समझा सकें।

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डॉ. जोशी ने कहा कि भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे मजबूत लोकतंत्र है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और आजादी के समय देश का नेतृत्व करने वालों ने जिस लोकतंत्र की नींव रखी, वह लोकतंत्र देश में सभी धर्म, भाषा, समाज, प्रांत और अन्य परिस्थितियों के आधार पर भिन्नता रखने वालों को भी सत्ता व शासन में समान रूप से भागीदार बनाता है। सरकार चाहे कोई भी हो, उसे संविधान के अनुसार ही कार्य करना होगा, इसमें किसी तरह का परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।        

उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैचारिक आधार पर राजनीति करने की आवश्यकता है। हमें यह मजबूती से बताना होगा कि गांधीवादी विचार और दर्शन ही देश को आगे ले जाने के लिए आवश्यक हैं। यह देश का संविधान ही है जिसने विपरीत विचारधारा के लोगों को भी चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से शासन करने का अवसर दिया है। ऎसे ही गांधी की विचारधारा को वर्तमान हालात में लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने ग्राम स्वराज का मंत्र दिया था। इस दिशा में और काम करना होगा। लोकसभा और विधानसभाओं में और ज्यादा दिनों तक नीतियों पर बहस होनी चाहिए। गांधी दर्शन को पढ़ने के साथ ही उस पर अमल भी करना होगा। हमें अध्ययन और स्वाध्याय के अंतर को समझना होगा। वैचारिक ब्लूप्रिंट लेकर जनता के बीच जाना होगा। 

गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री कुमार प्रशान्त ने कहा कि गांधी दर्शन में प्रत्येक समस्या का समाधान है। महात्मा गांधी को एक व्यक्ति तक ही सीमित रखने की आवश्यकता नहीं है। उनके दर्शन तथा विचारों को जीवन में उतारा जाना चाहिए। ऊपर उठने के लिए संघर्ष की आवश्यकता होती है, किसी भी विचार को मुख्य धारा  में बनाए रखने के लिए लगातार मेहनत और साधना का दामन थामे रखना होगा।

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उन्होंने कहा कि तकनीक के कारण व्यक्ति के निजी क्षणों की भी तृतीय पक्ष द्वारा निगरानी रखी जाने लगी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण विज्ञान की अनवरत प्रगति हो रही है। विज्ञान की यह प्रगति व्यक्ति के स्वतंत्र अस्तित्व को चुनौती दे रही हैं। उन्होंने कहा कि खादी कातते हो तो खादी  पहनी तथा खादी पहनते हो तो कातो, इस सूत्र को अंगीकार करके गांधी को समझा जा सकता है। गांधीजनों को अपने आपको नियमित अपडेट करना होगा।

गांधीवादी विचारक एवं गांधी स्मारक निधि राजघाट दिल्ली के अध्यक्ष रामचन्द्र राही ने कहा कि इस सम्मेलन में लघु भारत विद्यमान है। वर्तमान में संक्रमण का दौर है। इसमें गांधीवादियों को अपनी भूमिका सशक्त तरीके से निभानी होगी।

शांति एवं अहिंसा विभाग के निदेशक श्री मनीष शर्मा ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में मार्च तक जिला स्तरीय  सम्मेलन आयोजित हो जाएंगे। इसी तरह प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसान, आदिवासी, खादी व कौमी एकता आदि विषयों पर राष्ट्रस्तरीय सम्मेलन होंगे।

इस अवसर पर जिला कलेक्टर अंश दीप, पुलिस अधीक्षक चूनाराम जाट, समग्र सेवा संघ प्रदेश अध्यक्ष सवाई  सिंह, राष्ट्रीय युवा संगठक मनोज ठाकारे, गांधी स्मारक निधि दिल्ली के अध्यक्ष श्री रामचन्द्र राही,   संजय सिंह, सप्रेस के राकेश दीवान, प्रसून लतांत,  दैनिक नवज्योति के प्रधान सम्पादक दीनबंधु चौधरी एवं स्वतंत्रता सेनानी शोभाराम गहरवार ने अपने विचार रखे। इनके अलावा गांधी स्मारक उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार, छतीसगढ़ तेलंगाना, आन्ध्र प्रदेश, उत्तराखण्ड, पंजाब, हरियाणा के प्रतिनिधि, सर्वोदय मण्डल के विनोद रंजन, साझा संस्कृति मंच वाराणसी के हरिशचन्द्र लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान की जागृति राही, सिटीजन फॉर डेमोक्रेसी के विश्वजीत, नेशनल मूवमेंट फ्रन्ट के सौरभ बाजपेई, खुदाई खिदमतगार के फैजल खान, किसान मोर्चा के सत्यप्रकाश भारत आदि उपस्थित थे।

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