जल, जंगल, जमीन

संकट में पहाड़, मनुष्य और पर्यावरण

गांधी विचार को मानने वालों में बेहद वरिष्ठ और सम्मानित राधा बहन अपनी देशभर की अनेक जिम्मेदारियों के अलावा बरसों से हिमालय में रहकर उसकी बर्बादी भी देख रही हैं। वे बस भर उन योजनाओं पर उंगली उठाती रहती हैं…

नदी जोड़ से बेहतर है, नदी-तालाब जोड़

ठेकेदारों-इंजीनियरों-राजनेताओं का गठजोड जब ‘विकास’ की मशक्कत में लग जाता है तो नदी-जोड जैसी परियोजनाएं जन्म लेती हैं। कमाल यह है कि समाज की परखी-पहचानी स्थानीय पद्धतियां जल्दी, सस्ता और नियंत्रित पानी उपलब्ध करवा सकती हैं, लेकिन पूंजी के लिए…

सैरनी : नायाब है, एक नदी का लौटना

पर्यावरणविद् राजेन्द्र सिंह से कुमार सिद्धार्थ की बातचीत मध्यप्रदेश–राजस्थान की सीमा पर एक आमफहम-सी, साल के अधिकांश समय सूखी रहने वाली नदी थी–सैरनी। यह इलाका डकैती के अलावा भीषण गरीबी की चपेट में है, इतनी गरीबी कि वहां बसी सहरिया…

बेगूसराय : पेप्सी बाटलिंग प्लांट से हो रहा भू गर्भ जल का दोहन

बिहार के बेगूसराय में पेप्सी के बॉटलिंग प्लांट ने पानी के संकट को गंभीर बना दिया है। भूगर्भ जलस्तर 20-30 फीट तक गिर गया है, चापानल सूख गए हैं और पानी दूषित हो गया है। हर दिन 12 लाख लीटर…

ओडिशा के वॉटर मैन रंजन पांडा को मिला ओडिशा लीडरशिप अवॉर्ड 2025

जलवायु परिवर्तन और जल संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से सक्रिय हैं रंजन पांडा देश के अग्रणी पर्यावरणविदों में से प्रमुख रंजन पांडा, जिन्हें ‘वॉटर मैन ऑफ ओडिशा’ और ‘क्लाइमेट क्रूसेडर’ के रूप में जाना जाता है, को वर्ल्ड…

तरुण भारत संघ की स्वर्ण जयंती पर नदियों और समाज को जोड़ने की राष्ट्रव्यापी पहल

भीकमपुर (राजस्थान), 15 मई । पानी की बूंदों से जीवन के ताने-बाने को बुनने वाला संगठन तरुण भारत संघ इस वर्ष अपने स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है। पिछले 50 वर्षों में जल और समाज के रिश्ते को…

वन भूमि अतिक्रमण को लेकर सरकारी दावों में विरोधाभास : आदिवासियों के अधिकारों पर संकट

मध्यप्रदेश में वन भूमि अतिक्रमण को लेकर सरकारी आंकड़ों और दावों में गंभीर विरोधाभास सामने आया है। एनजीटी में प्रस्तुत हलफनामे में जहां 5.46 लाख हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण की बात मानी गई है, वहीं वन विभाग की रिपोर्टें पुराने…

वन्‍य जीवन : बाघों के बहाने वीरान होते गांव

पर्यावरण के पिरामिड की चोटी पर बाघ विराजता है और उस पर मंडराता कोई भी संकट दरअसल पर्यावरण पर संकट माना जाता है। जाहिर है, ऐसे में किसी भी कीमत पर बाघ और उसके लिए जंगल बचाना ‘वैज्ञानिक वानिकी’ की…

पानी, प्रकृति और परिवर्तन के 50 साल,तरुण भारत संघ का स्वर्ण जयंती समारोह 30 मई को भीकमपुरा में

भीकमपुरा (अलवर), 10 मई। जल संरक्षण और ग्रामीण सशक्तिकरण के क्षेत्र में पांच दशक से अधिक समय से कार्यरत तरुण भारत संघ (TBS) अपना स्वर्ण जयंती वर्ष 30 मई 2025 को पूर्ण कर रहा है। इस उपलक्ष्य में एक विशेष…

सहायक नदियों के प्रति सरोकार की जरूरत

बड़ी,बारहमासी नदियों का दोहन करने की सरकारी हुलफुलाहट के साथ-साथ सत्तर के दशक से समाज ने भी इन पर गौर करना और जरूरी हो तो प्रतिरोध करना शुरु कर दिया है, लेकिन इन विशालकाय जल-भंडारों को पोषित करने वाली छोटी,…