जल, जंगल, जमीन

प्रथम पुण्‍य स्‍मरण : युगऋषि सुंदरलाल बहुगुणा

सुंदरलाल बहुगुणा का नाम भारत और विदेशों में वन संरक्षण और पर्यावरण संघर्ष की प्रेरणा का प्रतीक बन गया। पश्चिमी घाट क्षेत्र के वनों को बचाने के लिए शुरू किए गए अप्पिको आंदोलन के वे एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत थे।…

जंगल : उत्तराखंड में आग

बारामासी सडक से लगाकर बडे बांधों तक विकास के लगभग सभी आधुनिक कारनामों के अलावा उत्तराखंड के जंगलों में आग एक भीषण प्राकृतिक संकट है। इसकी चपेट में हर साल कई इलाकों के विशाल जंगल होम हो जाते हैं। पिछले…

महासंकट : पानी पर परामर्श

हर साल की तरह अब फिर पानी पर परामर्श का मौसम शुरु हो गया है और हमेशा की तरह हम फिर पानी बचाने, संवारने, संरक्षित करने की तमाम-ओ-तमाम नेक सलाहों को ‘दूसरे कान’ से निकालने के लिए तैयार भी हो…

बेहाल पर्यावरण : बेहद नाकाफी है बजट

वैकल्पिक विकास पर विश्वास करने वाले व्यक्तियों, आंदोलनों और संस्थाओं के नेटवर्क ‘विकल्प संगम’ ने हाल ही में पेश किये गए देश के आम बजट का पर्यावरण की नज़र से विश्लेषण किया है।‘विकल्प संगम’ के विश्लेषण का ईशान अग्रवाल द्वारा…

विश्‍व वानिकी दिवस : जंगल की जरूरत

21 मार्च विश्‍व वानिकी दिवस जलवायु के जानकारों ने बताया कि कार्बन सोखने में जंगलों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। विश्व के जंगल कुल कार्बन उत्सर्जन का 30 प्रतिशत अवशोषण कर लेते हैं। ‘इंटरनेशनल पेनल आन क्लायमेट चेंज’ (आयपीसीसी)…

जंगलों के बाहर वृक्षों के विकास के लिए रोडमैप हुआ जारी

विश्व संसाधन संस्थान भारत  द्वारा जारी रिपोर्ट अगर किसान जंगलों के बाहर वृक्षारोपण की प्रथा को बढ़ावा दें तो उन्हें सात प्रकार के मौद्रिक और तीन प्रकार के गैर-मौद्रिक प्रोत्साहन लाभ मिल सकते हैं। इन लाभों में शामिल है इनपुट…

नियमों के जरिए कमजोर किया जाता, ‘पेसा’ का प्रभाव

‘पेसा कानून’ के पारित होने की करीब चौथाई सदी बीत जाने के बाद अब जाकर मध्यप्रदेश में उसे लागू करने के लिए नियम बनाए जा रहे हैं। विडंबना यह है कि इन नियमों में अनेक विसंगतियां हैं। मसलन- जिस ग्रामसभा…

जलकुंभी : कचरे से कंचन तक की यात्रा

भारत में जलकुंभी के कारण जल स्रोतों को होने वाले संकट के कारण इसे ‘बंगाल का आतंक’ भी कहा जाता है। यह एकबीजपत्री, जलीय पौधा है, जो ठहरे हुए पानी में काफी तेज़ी से फैलता है और पानी से ऑक्सीजन…

क्‍या हम बचा पाएंगे अपने जंगल ?

वनों के महत्व को समझने-समझाने में हम लगातार चूक कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि हम लगातार वनों को खोते जा रहे हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण चाहे कितना भी दावा कर लें, पर वनों का प्रतिशत…

‘गायब’ हो गए देश के जंगल, भारतीय वन सर्वेक्षण के आकलन की पड़ताल में खासा अंतर

इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट-2021 के अनुसार, देश में ‘रिकॉर्डेड’ वन-क्षेत्र 7.75 करोड़ हेक्टेयर है, जबकि इस जमीन पर वन-क्षेत्र के मौजूदगी 5.16 करोड़ हेक्टेयर में ही है। इसका मतलब यह है कि वनों के रूप में वर्गीकृत क्षेत्र का…