जल, जंगल, जमीन

बांध तो नहीं रुका, लेकिन क्या आंदोलन भी असफल रहा?

करीब चार दशकों के लंबे अनुभव में ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ को अपनी सफलता-असफलता के सवालों का सामना करते रहना पडा है। एक तरफ घाटी में प्रस्तावित बांध बनते रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ आंदोलन, अपनी स्थानीय, सीमित ताकत और प्रभाव…

नमामि गंगे परियोजना : नौ दिन चले अढ़ाई कोस

नदियों को अहर्निश मां, पुण्‍य-सलिला, जीवन-दायिनी आदि का दर्जा देते रहने वाला समाज और उसके वोट से बनी सरकारें नदियों के साथ क्या और कैसा व्यवहार करते हैं, इसे जानने के लिए गंगा की बानगी काफी है। हजारों करोड रुपयों…

वनाधिकार व पेसा के प्रभावी क्रियान्‍वयन की मांग के साथ जंगल सत्याग्रह का समापन

अंतिम व्यक्ति को न्याय दिलाने का माडल छत्‍तीसगढ़ सरकार पेश करे- राजगोपाल पी. व्ही. धमतरी। पूरे प्रदेश से आये आदिवासियों ने वनाधिकार, पेसा और पोषण सुरक्षा की प्रमुख मांगों के साथ जंगल सत्याग्रह के सौंवे वर्ष पर आयोजित जनसभा का…

बुंदेलखण्ड का गौरव बनी जल सहेलियां ; राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

जल सहेली मॉडल से देश भर की महिलाएं जुड़ रही हैं जल संरक्षण से झांसी। जल संरक्षण में महिलाओं के प्रयासों को केंद्र में रखते हुए पहली बार केन्द्र सरकार ने महिलाओं को सम्मानित किया है। ललितपुर, झांसी व छतरपुर…

छत्‍तीसगढ़ सरकार को अभियान चलाकर आदिवासियों को वन का अधिकार सौंपना चाहिए

धमतरी के गट्टा सिल्ली में जंगल सत्याग्रह प्रारंभ गट्टा सिल्ली, धमतरी, 2 मार्च। जंगल सत्याग्रह के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एकता परिषद द्वारा पूरे प्रदेश के हजारों आदिवासी प्रतिनिधियों के साथ सत्याग्रह स्तंभ पर पुष्पांजलि देने के…

जोशीमठ त्रासदी : अगली पीढ़ी के वृक्ष

अपने रहन-सहन और बसाहट के लिए समाज पर्यावरण में हस्तक्षेप करता है, कई बार इसके नतीजे दुखद भी होते हैं, लेकिन आमतौर पर वही समाज इसे दुरुस्त भी कर लेता है। करीब पांच दशक पहले जोशीमठ में ही घटी त्रासदी…

‘आजादी के अमृत महोत्सव’ में उपेक्षित पर्यावरण

कोई देश हो, संगठन हो या कोई व्यक्ति, सभी को अपनी-अपनी वर्षगांठ उत्सव-उत्साह के अलावा अपने किए-धरे और मौजूदा हालातों की समीक्षा के साथ मनाना चाहिए। इस लिहाज से हम अपने देश की आजादी के 75 सालों का लेखा-जोखा करें…

गंगा : मैली रह गईं मोक्षदायिनी

हमारे समाज के पाखंड को देखने का एक आसान तरीका नदियों की बदहाली का भी है। जिन नदियों को हम अहर्निश पूजते, माता का दर्जा तक देते हैं, उनमें तरह-तरह की औद्योगिक, रासायनिक और अस्पताली गंदगियों को उडेलते हुए कोई…

हिमालयी राज्य क्षेत्रीय परिषद : डूबते हिमालय को बचाने की तजबीज

विकास के मौजूदा मॉडल के चलते हिमालय को एक ‘डूबती इकाई’ मानने वाले अनेक वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता अब भी उम्मीद कर रहे हैं कि सत्ता और सेठों की चौकडी को शायद अक्ल आ जाए और वे हिमालय में विकास को…