दुनिया के लगभग सभी प्रमुख धर्मों में प्रलय की अवधारणा मौजूद है, लेकिन सचराचर जगत के शून्य हो जाने की यह प्रक्रिया कैसे होती है, इस पर कोई विस्तृत आख्यान दिखाई नहीं देता। अलबत्ता, आज की दुनिया और उसके अलमबरदारों…
इस हफ्ते भारत से अमरीका को निर्यात होने वाले सामानों पर ‘टैरिफ’ के नाम से लगाए गए भारी-भरकम शुल्कों ने हमें बदहवास कर दिया है। नतीजे में हमारी विदेश नीति तरह-तरह के कौतुक दिखा रही है, लेकिन क्या इस गफलत…
एक संस्मरण: बयालीस साल पहले हाल ही में 29 अगस्त को “गांधी” फिल्म के निर्देशक एटनबरो की पुण्यतिथि थी। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें याद करते हुए “गांधी” फिल्म की श्रेष्ठता का वर्णन किया है। तानाशाही के विरोध…
लाखों बच्चियों को शिक्षा से जोड़ने वाली संस्था को मिला एशिया का सर्वोच्च सम्मान नई दिल्ली। भारत में शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण कार्य कर रही गैर-सरकारी संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ (Educate Girls) को वर्ष 2025 का 67वां रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड…
धरती के सबसे बड़े जमीनी जीव हाथी, जो बुद्धिमान और सामाजिक स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, आज अस्तित्व के संकट में हैं। आवास विनाश, मानव-हाथी संघर्ष, अवैध शिकार और कैद में दुर्व्यवहार ने उनकी संख्या को तेजी से घटाया…
6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराकर मानवता ने विज्ञान के सबसे क्रूर प्रयोग का साक्षी बनाया। यह सिर्फ एक शहर की तबाही नहीं, बल्कि चेतना, करुणा और सहअस्तित्व की अवधारणा पर गहरा घाव था। ‘हिरोशिमा दिवस’ आज…
1 अगस्त को मनाया जाने वाला ‘वर्ल्ड वाइड वेब दिवस’ उस तकनीकी क्रांति को स्मरण करने का अवसर है, जिसने दुनिया को एक डिजिटल मंच पर जोड़ दिया। टिम बर्नर्स-ली द्वारा विकसित WWW ने ज्ञान, संवाद और सूचना की दुनिया…
महात्मा गांधी कहा करते थे कि यदि ‘आंख के बदले आंख निकाली जाए तो अंत में समूची दुनिया अन्धी हो जाएगी।’ कौन जानता था कि गांधी की विदाई के 77 साल बाद यह बात कहावत से निकलकर कड़वी सच्चाई में…
आजकल दुनियाभर में जारी युद्धों की अमानवीय क्रूरता, वीभत्स हिंसा और असंख्य मौतों के नतीजे में आखिर क्या मिलता है? दवाओं जैसी अकूत पूंजी कूटते, हथियारों के सौदागरों की कमाई के अलावा इनसे किसी पक्ष को, किसी तरह की कोई…
अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को साधते हुए दुनियाभर में अमन-चैन बरकरार रखने की खातिर बनाई और अमल में लाई जाने वाली विदेश नीतियों के दिन, लगता है, लद गए हैं। आजकल सभी देश अपने-अपने निजी और अक्सर व्यक्तिगत पूंजी के स्वार्थों…