वैश्विक पर्यावरण

कोराड़ी थर्मल पावर : कोयले से बिजली, बिजली से राखड़ और राखड से तबाही

हमारे यहां बिजली के लिए कोयले का सर्वाधिक उपयोग किया जाता है, लेकिन उससे पैदा होने वाली राख पर्यावरण, पानी, खेती और हवा तक को खतरे में डालती है। पिछले महीने महाराष्ट्र के नागपुर में राखड के तालाब टूटने के…

देश के विभिन्न राज्यों और स्वीडन में राजेंद्र सिंह एवं डॉ. इंदिरा खुराना द्वारा लिखित पुस्‍तक “Rejuvenation of Rivers” का विमोचन

तरुण भारत संघ के अध्यक्ष एवं जाने माने जलयोध्‍दा, पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह और तरुण भारत संघ  की उपाध्यक्ष डॉ. इंदिरा खुराना की संयुक्‍त लिखी पुस्तक “Rejuvenation of Rivers- Climate change |Livelihood | Dignity | living Example का विमोचन इंस्टीट्यूट ऑफ…

पर्यावरण बचाने से ही सार्थक होगा, शिव का सावन

हिन्दू परम्पराओं में लगभग सभी देवी-देवता पर्यावरण और उसके संरक्षण से जुडे हैं। इन दिनों श्रावण या सावन का महीना है जिसमें सतत शिव को स्मरण करते रहने का रिवाज है, लेकिन क्या हम कभी उस प्रकृति और पर्यावरण को…

जलवायु – परिवर्तन का नतीजा है, आकाशीय बिजली गिरना

बरसात के मौसम में आकाशीय बिजली का गिरना यूं तो एक आम बात है, लेकिन उसकी वजह जानना चाहें तो पता चलता है कि यह हमारे मौजूदा कथित विकास का ही एक और नतीजा है। विकास की मार्फत लगातार उत्सर्जित…

फिर आया मौसम, हरे छाते रोपने का

गर्मी की तीखी धूप और मूसलाधर बरसात से बचने के लिए प्रकृति ने हमें पेडों के रूप में सामूहिक छाते उपलब्ध करवाए हैं। मानसून का यह मौसम इन ‘छातों’ को रोपने का है। ग्रीन ‘इको फ्रेंडली’ ‘एयर कंडीशनर’ से ताजी…

पानी और पैट्रोल उलीचने से धंसते शहर

भू-गर्भीय पानी और जीवाश्म ईंधन के असीमित दोहन ने अब शहरों को धंसने की हालत में ला दिया है। देश-दुनिया के अनेक शहर आज धंसने की कगार पर हैं, लेकिन इसे लेकर कोई खास चिंता नहीं की जा रही। नदी…

हमें चाहिए प्रोग्रेसिव स्कूल, जहां मिले बेहतर शिक्षा और समान अवसर : सोनाझारिया मिंज

17वीं अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस में पर्यावरण, कृषि, आजीविका, लैंगिक समानता जैसे विषयों पर विमर्श भोपाल, 8 जून। 17वीं अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस में पर्यावरण, कृषि, आजीविका, लैंगिक समानता जैसे विषयों पर आज सेमिनार एवं कार्यशालाओं का आयोजन…

विश्‍व पर्यावरण दिवस : मौसम की भट्टी में भुनते शहर

हर साल की तरह इस साल भी वैज्ञानिकों ने ‘न भूतो, न भविष्यति’ की तर्ज पर तापक्रम बढने की चेतावनियां दी हैं, लेकिन लगता है, इससे किसी को कोई फर्क नहीं पडता। यदि पडता, तो कम-से-कम हमारे शहर और उनमें…

कैसे करें पर्यावरण की परवाह

‘विश्व पर्यावरण दिवस’ (5 जून) पर विशेष हर साल पर्यावरण दिवस के बहाने हम लगातार बदहाल होते अपने परिवेश का लेखा-जोखा तो कर लेते हैं, लेकिन उसे लेकर गंभीरता से कोई पहल नहीं करते। क्या हमारा यह व्यवहार प्रकृति, पर्यावरण और…