वैश्विक पर्यावरण

पर्यावरण के कितने अनुकूल हैं, बिजली के वाहन?

दुनियाभर में जलवायु-परिवर्तन के भयावह प्रभाव तबाही मचा रहे हैं और ऐसे में सभी को विकास के वैकल्पिक ताने-बाने की याद सताने लगी है। कोयला, पैट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन ‘ग्रीनहाउस गैसों’ का उत्सर्जन करते हैं और नतीजे में…

हिमालयी राज्य क्षेत्रीय परिषद : डूबते हिमालय को बचाने की तजबीज

विकास के मौजूदा मॉडल के चलते हिमालय को एक ‘डूबती इकाई’ मानने वाले अनेक वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता अब भी उम्मीद कर रहे हैं कि सत्ता और सेठों की चौकडी को शायद अक्ल आ जाए और वे हिमालय में विकास को…

हरित और सामूहिक आतिशबाजी से मनाएं दीपावली

राम के वनवास से लौटने के उत्सव के साथ-साथ आजकल दीपावली प्रदूषण की मार से डराती भी है। नतीजे में कई राज्य सरकारें आतिशबाजी पर कडाई से रोक लगा देती हैं। सवाल है, कैसे बचा जा सकता है, पटाखों के…

विकास के बरक्स ‘यू-टर्न’ की युक्ति

विकास का मौजूदा मॉडल दरअसल विनाश को न्यौतता है, यह बात कोई दबी-छिपी नहीं रह गई है। ऐसे में कैसे हम अपने जीवन को जीने लायक बनाए रखें? हाल में बिज़नेस न्यूज-चैनल पर एक विज्ञापन देखा जिसमें बताया गया था…

‘ट्विन टावर्स’ को तोडने के नतीजे : पर्यावरण-विनाश के उठते सवाल

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राजधानी दिल्ली से लगे नोएडा इलाके में दो बहुमंजिला इमारतों को हाल में ढहाया गया है। वजह है, इन इमारतों का भ्रष्ट तरीकों से अवैध निर्माण। एक विशालकाय इमारत की देश में पहली बार हुई…

कोराड़ी थर्मल पावर : कोयले से बिजली, बिजली से राखड़ और राखड से तबाही

हमारे यहां बिजली के लिए कोयले का सर्वाधिक उपयोग किया जाता है, लेकिन उससे पैदा होने वाली राख पर्यावरण, पानी, खेती और हवा तक को खतरे में डालती है। पिछले महीने महाराष्ट्र के नागपुर में राखड के तालाब टूटने के…

देश के विभिन्न राज्यों और स्वीडन में राजेंद्र सिंह एवं डॉ. इंदिरा खुराना द्वारा लिखित पुस्‍तक “Rejuvenation of Rivers” का विमोचन

तरुण भारत संघ के अध्यक्ष एवं जाने माने जलयोध्‍दा, पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह और तरुण भारत संघ  की उपाध्यक्ष डॉ. इंदिरा खुराना की संयुक्‍त लिखी पुस्तक “Rejuvenation of Rivers- Climate change |Livelihood | Dignity | living Example का विमोचन इंस्टीट्यूट ऑफ…

पर्यावरण बचाने से ही सार्थक होगा, शिव का सावन

हिन्दू परम्पराओं में लगभग सभी देवी-देवता पर्यावरण और उसके संरक्षण से जुडे हैं। इन दिनों श्रावण या सावन का महीना है जिसमें सतत शिव को स्मरण करते रहने का रिवाज है, लेकिन क्या हम कभी उस प्रकृति और पर्यावरण को…

जलवायु – परिवर्तन का नतीजा है, आकाशीय बिजली गिरना

बरसात के मौसम में आकाशीय बिजली का गिरना यूं तो एक आम बात है, लेकिन उसकी वजह जानना चाहें तो पता चलता है कि यह हमारे मौजूदा कथित विकास का ही एक और नतीजा है। विकास की मार्फत लगातार उत्सर्जित…

फिर आया मौसम, हरे छाते रोपने का

गर्मी की तीखी धूप और मूसलाधर बरसात से बचने के लिए प्रकृति ने हमें पेडों के रूप में सामूहिक छाते उपलब्ध करवाए हैं। मानसून का यह मौसम इन ‘छातों’ को रोपने का है। ग्रीन ‘इको फ्रेंडली’ ‘एयर कंडीशनर’ से ताजी…