फिर आया मौसम, हरे छाते रोपने का
गर्मी की तीखी धूप और मूसलाधर बरसात से बचने के लिए प्रकृति ने हमें पेडों के रूप में सामूहिक छाते उपलब्ध करवाए हैं। मानसून का यह मौसम इन ‘छातों’ को रोपने का है। ग्रीन ‘इको फ्रेंडली’ ‘एयर कंडीशनर’ से ताजी…
पानी और पैट्रोल उलीचने से धंसते शहर
भू-गर्भीय पानी और जीवाश्म ईंधन के असीमित दोहन ने अब शहरों को धंसने की हालत में ला दिया है। देश-दुनिया के अनेक शहर आज धंसने की कगार पर हैं, लेकिन इसे लेकर कोई खास चिंता नहीं की जा रही। नदी…
हमें चाहिए प्रोग्रेसिव स्कूल, जहां मिले बेहतर शिक्षा और समान अवसर : सोनाझारिया मिंज
17वीं अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस में पर्यावरण, कृषि, आजीविका, लैंगिक समानता जैसे विषयों पर विमर्श भोपाल, 8 जून। 17वीं अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस में पर्यावरण, कृषि, आजीविका, लैंगिक समानता जैसे विषयों पर आज सेमिनार एवं कार्यशालाओं का आयोजन…
विश्व पर्यावरण दिवस : मौसम की भट्टी में भुनते शहर
हर साल की तरह इस साल भी वैज्ञानिकों ने ‘न भूतो, न भविष्यति’ की तर्ज पर तापक्रम बढने की चेतावनियां दी हैं, लेकिन लगता है, इससे किसी को कोई फर्क नहीं पडता। यदि पडता, तो कम-से-कम हमारे शहर और उनमें…
कैसे करें पर्यावरण की परवाह
‘विश्व पर्यावरण दिवस’ (5 जून) पर विशेष हर साल पर्यावरण दिवस के बहाने हम लगातार बदहाल होते अपने परिवेश का लेखा-जोखा तो कर लेते हैं, लेकिन उसे लेकर गंभीरता से कोई पहल नहीं करते। क्या हमारा यह व्यवहार प्रकृति, पर्यावरण और…
ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों का बढ़ा-चढ़ाकर न बताएं
हाल ही में जलवायु मॉडलों की मदद से किए गए कुछ अध्ययनों के निष्कर्ष प्रकाशित हुए हैं। एक अध्ययन का दावा है कि आर्कटिक वर्षा अपेक्षा से काफी पहले 2060 के दशक तक ही प्रभावी हो जाएगी जबकि एक अन्य…
झीलों को ‘मारकर’ बसाया गया बेंगलुरु
देशभर में जलस्रोतों को जिस हिंसक क्रूरता के साथ ध्वस्त किया जा रहा है, उससे एक समाज की हैसियत से अपने आत्महंता होने की तस्दीक तो होती ही है। बेंगलुरु समेत मुम्बई, चेन्नई, पुणे, दिल्ली, कोलकता, इंदौर, भोपाल जैसे नगर-महानगर…
Uttarakhand : विकास की खातिर हिमालय की हत्या
सब जानते हैं कि भारत, खासकर उत्तर भारत के प्राकृतिक वजूद के लिए हिमालय का होना कितना जरूरी है, लेकिन तिल-तिल मरते हिमालय को बचाने की पहल कोई नहीं करता। कभी, कोई वैज्ञानिक या स्थानीय समाज इसको लेकर आवाज उठाते…
जंगल : उत्तराखंड में आग
बारामासी सडक से लगाकर बडे बांधों तक विकास के लगभग सभी आधुनिक कारनामों के अलावा उत्तराखंड के जंगलों में आग एक भीषण प्राकृतिक संकट है। इसकी चपेट में हर साल कई इलाकों के विशाल जंगल होम हो जाते हैं। पिछले…









