आम लोगों के परिवहन का सर्वाधिक सुलभ और सस्ता साधन रेलगाडी अब धीरे-धीरे मंहगा, बेहद मंहगा होता जा रहा है। कहा जा रहा है कि अब आम जनता के लिए ‘जनरल कोच’ और खास लोगों के लिए मंहगी ‘एसी कोच’…
28 नवंबर को करीब 17 दिन से बारामासी सड़क की निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 41 मजदूरों का सुरक्षित बाहर निकलना कोई अकेली त्रासदी नहीं है। दुनियाभर के वैज्ञानिकों में ‘बच्चा पहाड़’ माने जाने वाले हिमालय में ऐसी त्रासदियां लगातार होती…
उत्तरकाशी की सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को 17 दिन बाद निकाला गया है, लेकिन पहाड़ों की नाजुक हालत और विकास की परिकल्पना हमारे सामने है। पिछले ही महीने सिक्किम की बाढ़ भी मानव निर्मित कारणों से ज्यादा तबाही लेकर…
हथकरघा उद्योग आज भी रोजगार का एक कारगर साधन है, लेकिन हमारी सरकारें और उनकी नीतियां उसे अपेक्षित महत्व नहीं देतीं। नतीजे में यह उद्योग ठप्प होता जा रहा है। फिलहाल क्या हालत है, हथकरघा उद्योग की? सात अगस्त, 1905 को…
इन दिनों हिमाचलप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश जैसे देश के उत्तरी राज्यों में बाढ़ ने तबाही मचा रखी है। आम आबादी समेत वैज्ञानिक और राजनेता तक, सब जानते हैं कि इसकी बुनियादी वजह कथित विकास की खातिर अपेक्षाकृत नवजात पर्वत…
आज फिर चुनावी राजनीति में गरीब और खास तौर से गरीबों की संख्या मुद्दा बनती जा रही है और संभव है काफी सारे मुद्दे हवा में उछालकर टेस्ट कर चुकी मोदी सरकार को अपनी यह ‘उपलब्धि’ चुनाव जिताने लायक लगे।…
‘सरदार सरोवर’ निर्माण के दौरान जो सब्जबाग दिखाए गए थे उनमें पेयजल, सिंचाई और निस्तार के लिए भरपूर पानी का वायदा अव्वल था। आज करीब छह दशक बाद इस वायदे की हकीकत क्या है? सदानीरा नर्मदा के लगभग किनारे पर…
जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता रहेगा और बढ़ते तापमान से सूखे की स्थिति पैदा होगी। जिससे मीठे पानी के महत्वपूर्ण स्रोत प्रभावित होंगे। संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम (यूएनईपी) का मानना है कि पानी के बाद रेत सबसे…
18, 19 और 20 मई को सैरनी के तट पर जल योद्धाओं का मिलन सम्मेलन चंबल घाटी की सूख चुकी सैरनी नदी अब शुद्ध सदानीरा होकर बह रही है। मई के माह में भी सैरनी नदी में पूर्णतः जल प्रवाह…
इंसानी वजूद के लिए रोटी, कपडा के बाद मकान तीसरा सर्वाधिक जरूरी संसाधन है, लेकिन हमारे देश में पहली और दूसरी जरूरतों की तरह इसका भी भारी टोटा है। समय-समय पर तत्कालीन सरकारें कुछ-न-कुछ करती तो हैं, लेकिन उससे सबके…