Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

विकास

बेरहमी से बर्बाद किया जाता हिमालय

इन दिनों हिमाचलप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश जैसे देश के उत्तरी राज्यों में बाढ़ ने तबाही मचा रखी है। आम आबादी समेत वैज्ञानिक और राजनेता तक, सब जानते हैं कि इसकी बुनियादी वजह कथित विकास की खातिर अपेक्षाकृत नवजात पर्वत…

विकास : आँकड़े बदले हैं, गरीबी नहीं

आज फिर चुनावी राजनीति में गरीब और खास तौर से गरीबों की संख्या मुद्दा बनती जा रही है और संभव है काफी सारे मुद्दे हवा में उछालकर टेस्ट कर चुकी मोदी सरकार को अपनी यह ‘उपलब्धि’ चुनाव जिताने लायक लगे।…

नर्मदा : बे-पानी बड़वानी के पडौस में सूखती नर्मदा

‘सरदार सरोवर’ निर्माण के दौरान जो सब्जबाग दिखाए गए थे उनमें पेयजल, सिंचाई और निस्तार के लिए भरपूर पानी का वायदा अव्वल था। आज करीब छह दशक बाद इस वायदे की हकीकत क्या है? सदानीरा नर्मदा के लगभग किनारे पर…

पर्यावरण बिगड़ने के दुष्प्रभाव से चिंतित विश्व

जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता रहेगा और बढ़ते तापमान से सूखे की स्थिति पैदा होगी। जिससे मीठे पानी के महत्वपूर्ण स्रोत प्रभावित होंगे। संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम (यूएनईपी) का मानना है कि पानी के बाद रेत सबसे…

पुनर्जीवित नदी पार्बती के प्रेम और सैरनी के शेरों का बुलावा

18, 19 और 20 मई को सैरनी के तट पर जल योद्धाओं का मिलन सम्‍मेलन चंबल घाटी की सूख चुकी सैरनी नदी अब शुद्ध सदानीरा होकर बह रही है। मई के माह में भी सैरनी नदी में पूर्णतः जल प्रवाह…

छत का छलावा बनाम रियायती आवास योजना

इंसानी वजूद के लिए रोटी, कपडा के बाद मकान तीसरा सर्वाधिक जरूरी संसाधन है, लेकिन हमारे देश में पहली और दूसरी जरूरतों की तरह इसका भी भारी टोटा है। समय-समय पर तत्कालीन सरकारें कुछ-न-कुछ करती तो हैं, लेकिन उससे सबके…

प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) : बाघों के लिए घटते वन और वन्यप्राणी

प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) के 50 साल पूरे होने के मौके पर कर्नाटक के मैसूर में प्राानमंत्री ने देश में बाघों की संख्या के नए आंकड़े जारी किए। आंकड़ा जारी करते हुए उन्होंने बताया कि 2022 में भारत में बाघों…

Pension scheme बेमानी हैं, दोनों तरह की पेंशन योजनाएं

पिछले कुछ दिनों से देश भर में पेंशन को लेकर भारी मारामारी मची है। हिमाचलप्रदेश जैसे राज्यों में तो यह मसला चुनाव हराने-जिताने की गारंटी तक हो गया था। क्या है, इसके पीछे की कहानी? और क्या पेंशन की मौजूदा…

Economic development : ‘सार्वजनिक क्षेत्र’ के संरक्षण की अहमियत

बहुचर्चित अडाणी कंपनी पर लगाए जा रहे अनेक आरोपों में एक है, ‘सार्वजनिक क्षेत्र’ के रेल, गैस, बिजली, बंदरगाह, हवाई-अड्डों जैसे अनेक उपक्रमों को थोक में खरीदना। सवाल है कि इन बेहतरीन, कमाऊ और ‘नवरत्न’ तक कहे जाने वाले ‘सार्वजनिक…

स्‍वच्‍छता : गांव तक पहुंचा, कचरे का कहर

कहा जाता है कि शहरी लोग कचरे का सर्वाधिक विसर्जन करते हैं, लेकिन अब यह व्याधि गांवों तक भी पहुंच गई है। देश में प्रतिदिन 28 करोड टन ठोस कचरा पैदा हो रहा है जिसमें से 10.95 करोड टन ग्रामीण…