विकास

विनाश हो गया है, आदिवासियों के लिए विकास

आजादी के बाद से हमारे देश में जिस तौर-तरीके का विकास हुआ है उसने आदिवासी इलाकों में उसे विनाश का दर्जा दे दिया है। खनन, वनीकरण, ढांचागत निर्माण और भांति-भांति की विकास परियोजनाओं ने आदिवासी इलाकों की मट्टी-पलीत कर दी…

बढ़ती आबादी के बढ़ते दबाव

कहा जाता है कि धरती की भी धारण करने की अपनी सीमा होती है। इस सीमा को पार करने के नतीजे जल, जंगल और जमीन की बौखलाहट के रूप में हम भुगत रहे हैं। हमारी लगातार बढ़ती आबादी साथ उसकी…

शहरी परिवहन: अभिजात तंत्र में बदलता समाज

शहरीकरण के आधुनिक दौर में शहरी परिवहन मुनाफा कमाने और मुनाफाखोरी बढ़ाने का प्रमुख क्षेत्र है। कारों और मेट्रो के लिए बहुत महंगा भूतलीय, भूमिगत और उपरगामी परिवहन के ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। यह सब नगरों-महानगरों को…

निजी कोल खनन के विरोध से लोक जुम्बिश की शुरूआत

राजेंद्र सिंह लोकतंत्र में जब ’तंत्र’ ही ’लोक’ के विरोध में खड़ा हो जाता है, तो लोक भी संगठित होकर अपने को मजबूत बना लेता है। लेकिन सरकार ने यह काम एक महामारी के दौरान किया है; जिसमें सामाजिक दूरियों…

नर्मदा : बूँद- बूँद जल का दोहन

सौंदर्य की नदी नर्मदा में जितना भी सौंदर्य बचा है, वह भी यात्रा वृत्तांत के पन्नों में सिमटने वाला है। नर्मदा नदी के किनारे प्रस्तावित 18 थर्मल एवं परमाणु बिजली परियोजना की स्थापित क्षमता 25 हजार 260 मेगावाट है। 22…

पर्यावरण, धर्म तथा विकास के अन्‍तर्संबंध

डॉ. भारतेन्दु प्रकाश भारत में पर्यावरण व धर्म को अत्यन्त व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया है। इन दोनों की व्यवस्थित समझ से ही विकास संभव है। परंतु आधुनिक योजनाकारों ने इन तीनों की अलग-अलग व्याख्या कर पूरी मानवता को ही…

कैसे बसेंगे, लौटते प्रवासियों के गांव

‘कोविड-19’ के कारण लगे ‘लॉक डाउन’ का सर्वाधिक व्‍यापक और गंभीर असर उन मजदूरों पर पडा है जो गांवों की अपनी दुनिया छोडकर रोजी-रोटी की खातिर शहरों में बसे थे और अब वापस गांवों की ओर भागे जा रहे हैं।…

निरंतर विकासमान हिन्दी पत्रकारिता

30 मई : हिन्दी पत्रकारिता दिवस हिंदी पत्रकारिता का इतिहास एक माने में राष्ट्रीय चेतना की विकास गाथा है। स्वतन्त्रता के बाद हिंदी पत्र-पत्रिकाओं में नए आयाम स्थापित हुए और समाचार पत्रों में विषय वैविध्य भी आया। स्वाधीनता के पश्चात…

मजदूरों का दुख-दर्द और सोनू सूद की समझदारी

कमजोर और छितरी हुई सांगठनिक, राजनीतिक ताकत को अनदेखा करने की बेशर्म हरकत का ही नतीजा है कि महानगरों में सीवर-लाइन सुधारने वाले सैकडों लोग सालाना जान गंवाते हैं और कोई किसी तरह की चूं भी नहीं करता। यहां तक…

‘विकास’ नहीं ‘विनाश’ का टापू है बरगी बांध

भारत वर्ष में अभी तक विभिन्न परियोजनाओं से लगभग 5 करोड़ लोग विस्थापित हो चुके हैं। मध्य प्रदेश में नर्मदा परियोजना के अन्तर्गत नर्मदा नदी पर 30 बड़े बाँध, 135 मझोले बाँध और 3000 छोटे बाँध बनाने की योजना प्रस्तावित…