विकास

मध्यप्रदेश/उत्तरप्रदेश : कितने लाभ के लिए केन-बेतवा जोड़

बरसों से नदी-जोड़ परियोजना का सपना देखने वालों को अब देश के तीस उत्कृष्ट विद्वान पर्यावरणविदों की चुनौती मिली है। इस योजना के तहत काटे जाने वाले जंगल तथा पेड़ों से वन्य-जीवन, जैव-विविधता तथा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव निश्चित रूप…

मौसम : बरसात का बादल

विकास की तरह-तरह की किस्सा-गोइयों के बावजूद हमारे देश में सिंचित कृषि का कुल रकबा अब भी 40 फीसदी के आसपास ही है। जाहिर है, खेती की बाकी जरूरत का पानी मानसून की बरसात की उम्मीदों पर टिका होता है।…

स्वास्थ्य विषमताओं को दूर करने व प्राथमिक स्वास्थ्य पर अधिक निवेश किये जाने की जरूरत

आक्सफैम इंडिया की विषमता रिपोर्ट 2021 हाल ही में जारी हुई आक्सफैम इंडिया की विषमता रिपोर्ट 2021 से खुलासा हुआ है कि सार्वजानिक स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में भारत में बढ़ती सामाजिक-आर्थिक विषमता वंचित समुदायों के स्वास्थ्य परिणामों को विकृत…

कोरोना : महामारी में उघरती स्वास्थ्य-व्यवस्था की बदहाली

कहा जाता है कि संकट में समस्याओं से निपटने की असली परीक्षा होती है। इस लिहाज से देखें तो कोरोना महामारी के दौरान हमारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बुरी तरह भद्द पिटी है। इलाज के लिए दवाओं, उपकरणों और आक्सीजन की…

पानी से परिवहन : फर्जी दावों की पतवार से धकेले जा रहे राष्‍ट्रीय जलमार्ग

सडक, रेल और वायु मार्गों के अलावा अब हमारी सरकार पारंपरिक जल-परिवहन के लिए उत्साहित हुई है। कहा जा रहा है कि पानी के छोटे-बडे जहाजों से माल ढुलाई सस्ती हो जाएगी। सवाल है कि क्या शुरुआती तैयारी के लिहाज…

संकट में भूमि : समाज की जमीन ही उखाड़ने का दौर

विकास के मौजूदा ढांचे में भूमि सर्वाधिक कीमती जिन्स मानी जा रही है, पूंजी और कारपोरेट हितों ने उस पर अधिक-से-अधिक कब्जा भी जमा लिया है, लेकिन क्या इस तरह से हम अपनी भोजन की बुनियादी जरूरतों को भी संकट…

“भूख के विरुद्ध भात के लिए . . . .!”

भूख हमारे समय की सर्वाधिक व्यापक और गहराई से महसूस की जाने वाली सचाई है, लेकिन उससे निपट पाने की कोई कारगर तजबीज अब तक हाथ नहीं लगी है। एक तरफ, तरह-तरह के खाद्य-सुरक्षा कानूनों और सरकारी, गैर-सरकारी प्रयासों के…

‘विकास’ की बलि चढ़ता हिमालय

उत्तराखंड की ताजा त्रासदी ने एक बार फिर उस सनातन सवाल को उछाल दिया है कि आखिर विकास के नाम पर होने वाली गतिविधियां हमारे विनाश की वजह क्यों बनती जा रहीं हैं? क्या उत्तराखंड में बनी और बन रहीं…

बेदखली की चपेट में दिल्‍ली के झुग्‍गीवासी

हाल में सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर दिल्‍ली में झुग्‍गी बस्तियों के 48 हजार परिवारों को अपनी जमीन से हटाने की रेलवे की पहल पर सरकार ने रोक लगा दी है। दिल्‍ली और देशभर में खलबली मचाने और गरीबों के आशियानों…

अजब कहानी, शहरों के विकास की

अब ऐसा समय आ गया है जिसमें हमें विकास की अपनी समझ की गलती दिखाई देने लगी है, लेकिन फिर भी हम उसे मानना नहीं चाहते। यदि मान लेते तो शायद उसे बदलना नहीं, तो कम-से-कम सुधारना शुरु हो गया…