Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

विकास

सम सामयिक : आज़ादी का अमृत

आज़ाद भारत की इन 75 वर्षों की यात्रा बहुत रोमांचक, उत्तेजक, आह्लादक और प्रेरक रही है। लम्बी पराधीनता के बाद स्वाधीन हुए देश के सामने अनगिनत चुनौतियां थीं। यह देश का सौभाग्य है कि इसे अपने स्वाधीन होने के तुरंत…

विकास : ‘मरीचिकाओं’ के महारथी

कहा जाता है कि राजनीति का कुल मतलब ‘रोटी’ और ‘सर्कस’ होता है, लेकिन लगता है, मौजूदा सत्ता केवल ‘सर्कस’ को ही अहमियत दे रही है। नतीजे में एक तरफ भुखमरी, बेरोजगारी, बीमारी जैसी व्याधियां हैं, तो दूसरी तरफ, रोज…

चुटका परमाणु संयंत्र से उत्पादित बिजली की कीमतों को सार्वजनिक किया जाए : बरगी बांध विस्थापित एवं विस्थापित संघ मांग

पिछले पांच साल में बिना बिजली खरीदे वि़द्युत कम्पनियों को बतौर फिक्स चार्ज किया 12834 करोङ़ रुपए का भुगतान परमाणु उर्जा स्वच्छ नहीं है। इसके विकिरण के खतरे सर्वविदित है। वहीं परमाणु संयंत्र से निकलने वाली रेडियोधर्मी कचरा का निस्तारण…

आजादी का अमृत महोत्‍सव : भगवा-भय और तिरंगी यादें

अगस्त 1942 से अगस्त 1947 के बीच का करीब पांच साल का दौर हमारे इतिहास का बेहद अहम हिस्सा रहा है। नौ अगस्त 1942 को ‘भारत छोडो’ आंदोलन से लेकर 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने तक भारत समेत दुनियाभर…

आजादी का 75 वां वर्ष : लोकतंत्र की कठिनाइयां

लोकतंत्र की बदहाली किसी से छिपी नहीं है,लेकिन उसे वापस पटरी पर कैसे लाया जाए? आजादी के 75 वें वर्ष में कुछ माह के अंतराल से दो अति महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनायें हुईं जिनका संबंध देश की सौ प्रतिशत जनता से है। पहली…

विकास : प्रगति की पहचान के सूत्र

इंसानी तरक्की को मापने के लिए ‘सकल घरेलू उत्पाद’(जीडीपी) जैसे जिन पैमानों का उपयोग किया जा रहा है, क्या वे सचमुच हमारे विकास को बता पाते हैं? क्या इनसे समाज में मौजूद गैर-बराबरी, अन्याय, हिंसा, शोषण आदि को भी मापा…

विकास : विनाश के विरोध में ‘यूरोपीय संघ’

आधुनिकता के तमाम फायदे उठाने और नतीजे में उससे पैदा हुई बदहाली को भुगतने के बाद ‘यूरोपीय संघ’ ने अब कानून बनाकर विकास की धारा को पलटने की कोशिश की है। बरसों से नदियों पर विशालकाय बांध खडे करने, जल-जंगल-जमीन…

ऑक्सफैम की खरी-खरी: जी-7 ने लाखों लोगों को भूखों मरने के लिए छोड़ दिया

तकरीबन साढ़े चार बिलियन लोगों को भूखा मरने पर बाध्‍य जिस समय पर दुनिया की “एक पीढ़ी” सबसे खराब भूख संकट का सामना कर रही है, उसी एक समय पर अमीर देशों ने बस अपने मुनाफे को देखा है। कोविड…

हमें चाहिए प्रोग्रेसिव स्कूल, जहां मिले बेहतर शिक्षा और समान अवसर : सोनाझारिया मिंज

17वीं अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस में पर्यावरण, कृषि, आजीविका, लैंगिक समानता जैसे विषयों पर विमर्श भोपाल, 8 जून। 17वीं अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस में पर्यावरण, कृषि, आजीविका, लैंगिक समानता जैसे विषयों पर आज सेमिनार एवं कार्यशालाओं का आयोजन…

केन और बेतवा : जबर्दस्ती का नदी जोड़

विकास की बदहवासी में आजकल उसी को अनदेखा करने का चलन हो गया है जिसकी कसमें खाकर विकास किया जाता है। पिछले दिनों केन्द्रीय केबिनेट ने मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड़ इलाके की सिंचाई और पेयजल क्षमता बढाने की खातिर…