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कैंसररोधी 137 दवाओं पर व्यापार मार्जिन सीमा का स्वागत, सस्ते इलाज के लिए व्यापक मूल्य नियंत्रण जरूरी

कैंसररोधी 137 दवाओं पर व्यापार मार्जिन सीमा का स्वागत, सस्ते इलाज के लिए व्यापक मूल्य नियंत्रण जरूरी

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने की सरकार तथा राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण से मांग

इंदौर, 18 अक्टूबर।  राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा 137 कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन की सीमा तय करने के जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSA India) ने फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि यह एक जरूरी नियामक कदम है, लेकिन कैंसर के इलाज को वास्तव में किफायती बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

उन्‍होंने कहा कि व्यापार मार्जिन पर सीमा लगाने से दवाओं की कीमतों में अपने आप बड़ी कमी नहीं आती। मरीजों को वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब दवाओं के मौजूदा अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में पर्याप्त कमी की जाए और यह कमी फार्मेसी तथा अस्पतालों में मरीजों द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों में भी दिखाई दे।

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया के अमिताभ गुहा, गौरांग महापात्रा एवं अमूल्य निधि ने कहा कि एक बड़ी चिंता यह है कि उचित दवा मूल्य तय करने के लिए स्वतंत्र आकलन करने के बजाय दवा कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए कीमतों और बिक्री के आंकड़ों पर निर्भरता दिखाई देती है। NPPA को अपने नियामक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए और दवाओं की उत्पादन लागत, विपणन एवं वितरण खर्च तथा अन्य प्रासंगिक कारकों के आधार पर उचित कीमतें निर्धारित करनी चाहिए। दवाओं का मूल्य निर्धारण सार्वजनिक स्वास्थ्य की जरूरतों और लोगों की भुगतान क्षमता को ध्यान में रखकर होना चाहिए, न कि केवल दवा कंपनियों की व्यावसायिक मूल्य निर्धारण नीतियों के आधार पर।

मरीजों के लिए चलाई जाने वाली सहायता और छूट योजनाओं (Patient Assistance Programmes) को मूल्य गणना से बाहर रखना भी गंभीर चिंता का विषय है। इन योजनाओं के तहत कुछ चुनिंदा मरीजों को विशेष शर्तों पर छूट दी जाती है। यदि इन छूटों का उचित आकलन नहीं किया जाता, तो दवाओं की वास्तविक लेन-देन कीमतों की सही तस्वीर सामने नहीं आएगी और MRP में सार्थक कमी की संभावना सीमित हो सकती है। इसके अलावा, कंपनियों द्वारा अपनी मर्जी से दी जाने वाली या शर्तों से जुड़ी छूटें पारदर्शी और बाध्यकारी मूल्य नियंत्रण का विकल्प नहीं हो सकतीं। मूल्य नियंत्रण का लाभ सभी मरीजों तक पहुंचना चाहिए, न कि केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक।

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जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया इस बात पर जोर देता है कि व्यापार मार्जिन का नियमन व्यापक दवा मूल्य नियंत्रण का पूरक होना चाहिए, उसका विकल्प नहीं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियामक व्यवस्था से कैंसर के मरीजों और उनके परिवारों के अपनी जेब से होने वाले खर्च में वास्तविक और मापने योग्य कमी आए।

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने सरकार तथा NPPA से मांग की हैं कि:

1. दवाओं की उचित कीमतें स्वतंत्र रूप से तय की जाएं। उत्पादन लागत, आपूर्ति श्रृंखला के खर्च और अन्य प्रासंगिक कारकों का पारदर्शी आकलन किया जाए।

2. मौजूदा MRP की समीक्षा की जाए। जहां जरूरी हो, वहां अधिकतम खुदरा मूल्य में संशोधन किया जाए, ताकि व्यापार मार्जिन की सीमा तय करने से दवाओं की कीमतों में वास्तविक और पर्याप्त कमी आए।

3. दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। कंपनियों द्वारा दिए गए कीमतों, बिक्री और छूट संबंधी आंकड़ों की उचित एवं स्वतंत्र जांच हो।

4. मरीजों पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जाए। फार्मेसी और अस्पतालों में मरीजों द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों तथा उनके जेब से होने वाले खर्च में आई कमी की निगरानी की जाए।

5. व्यापक मूल्य नियंत्रण को मजबूत किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि जरूरी और जीवनरक्षक कैंसर की दवाएं सभी मरीजों को सुलभ और किफायती दरों पर उपलब्ध हों।

कैंसर का इलाज परिवारों को कर्ज, आर्थिक संकट और गरीबी में धकेलने का कारण नहीं बनना चाहिए। जीवनरक्षक दवाओं तक पहुंच को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता और स्वास्थ्य के अधिकार का एक अनिवार्य हिस्सा माना जाना चाहिए।

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जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया सरकार से आग्रह किया है कि वह केवल व्यापार मार्जिन को नियंत्रित करने तक सीमित न रहे, बल्कि प्रभावी, पारदर्शी और व्यापक दवा मूल्य नियंत्रण सुनिश्चित करे, जिससे मरीजों को वास्तविक और मापने योग्य आर्थिक राहत मिले। किसी भी मूल्य निर्धारण नीति की सफलता का असली पैमाना यह होना चाहिए कि लोगों को अपनी जरूरत की दवाएं बिना आर्थिक संकट का सामना किए मिल सकें।

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