‘कनेक्टिंग पीपल विद नेचर’ प्रदर्शनी में अनेक वन्यजीव व पक्षियों के चित्रों की प्रदर्शन
इंदौर, 27 सितंबर। प्रकृति को केवल देखना और उसके साथ गहराई से जुड़कर उसके अस्तित्व को महसूस करना इन दोनों के बीच का अंतर जब कैमरे के लेंस से उभरता है, तो तस्वीरें महज एक दृश्य न रहकर एक जीवंत कहानी बन जाती हैं। इंदौर के ‘प्रीतमलाल दुआ आर्ट गैलरी’ में रविवार से आयोजित वन्यजीव एवं प्रकृति फोटोग्राफर निलेश सारंग बेंद्रे की प्रथम एकल फोटो प्रदर्शनी ‘कनेक्टिंग पीपल विद नेचर—वन स्टोरी एट अ टाइम’ दर्शकों को इसी आत्मीय और भावुक अनुभव से जोड़ती है।
प्रदर्शनी का उद्घाटन पद्मश्री भालू मोंढे, संजय पटेल, संस्कृति मंत्रालय से जुड़े भरत शर्मा ने किया। पद्मश्री भालू मोंढे ने निलेश के साथ अपने वर्षों पुराने जुड़ाव को याद करते हुए कहा मैं पिछले 15 सालों से निलेश को सिरपुर और यशवंत सागर में धैर्यपूर्वक अवलोकन करते देखता आ रहा हूँ। उन्होंने विषय की गहराई को समझने और सही क्षण को पकड़ने के लिए एक अनूठी ‘फोटो आई’ विकसित की है, जो उनकी तस्वीरों में साफ झलकती है।
कुदरत की अनमोल झलकियाँ और दुर्लभ पल

इस दो दिवसीय प्रदर्शनी में निलेश बेंद्रे द्वारा खींचे गए लगभग 25 से 30 उत्कृष्ट फोटोग्राफ्स प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें दुर्लभ चौसिंघा, तेंदुए, बाघ, गिरगिट की रंगीन मुद्रा से लेकर पक्षी जगत की अद्भुत विविधता को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है। किंगफिशर के चकाचौंध करते रंग, इंडियन रोलर (नीलकंठ) का ठाठ, बगुले की निश्चल एकाग्रता और सवाना नाइट जार (छपका), जोडे में रहने वाला सर्खाब, मोर, चील, फेन प्रोलेड लिजाड, बयां पक्षी के अदभुत घोंसलें आदि प्राकृतिक परिवेश को उनके स्वाभाविक व्यवहार के साथ कैमरे में संजोया गया है। इन पक्षियों की तस्वीरों में प्रकृति की विविधता दिखाई देती है। कहीं रंग आकर्षित करते हैं, कहीं पक्षी की मुद्रा, कहीं उसकी उड़ान और कहीं प्राकृतिक परिवेश।
15 वर्षों की अविरल साधना और ‘फोटो आई’ का निखार
समर्पित प्रकृतिवादी निलेश बेंद्रे का बचपन से कुदरत में लगाव रहा है। जंगल, पहाड़ और नदियों के प्रति उनकी यही दीवानगी समय के साथ फोटोग्राफी में बदल गई। वे पिछले 15 वर्षों से इंदौर के रामसर स्थल सिरपुर तालाब और यशवंत सागर सहित विभिन्न प्राकृतिक क्षेत्रों में निरंतर शोधपरक अवलोकन और फोटोग्राफी कर रहे हैं। अपने पेशेवर जीवन से समय निकालकर घंटों पक्षी व वन्यजीवों के सटीक और दुर्लभ क्षणों का इंतजार करना उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत है। इनके साथ नीरज बागवान की भी अथक मेहनत रही है, वे वन्य जीवों के इतिहास को खंगालते, पढ़ते और निलेश के साथ सहयोग करते है।
तस्वीर में सिर्फ पक्षी नहीं, उसका संसार भी

इस प्रदर्शनी की तस्वीरों को देखते हुए यह बात रेखांकित की जा सकती है कि निलेश का कैमरा केवल किसी पक्षी या वन्यजीव पर नहीं ठहरता, बल्कि उसके आसपास के प्राकृतिक संसार को भी फ्रेम में रखता है। यहाँ पक्षियों को केवल सुंदर प्राणी के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उनके प्राकृतिक आवास और जीवन-चक्र से जोड़कर पेश किया गया है। सिरपुर तालाब जैसे इलाकों में दिखाई देने वाले पक्षियों को कैमरे में दर्ज कर निलेश ने स्थानीय प्राकृतिक संसार की ओर भी ध्यान खींचा है।
यह प्रदर्शनी महज वन्यजीव फोटोग्राफी का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह मानव और प्रकृति के टूटते संबंधों को पुनर्स्थापित करने की एक सार्थक पहल है। हर तस्वीर के पीछे वर्षों का धैर्य, गहरा अवलोकन और कुदरत के प्रति अगाध प्रेम दिखाई देता है।
प्रकृति के साथ संवाद का माध्यम
कुल मिलाकर यह प्रदर्शनी वन्यजीवों की सुंदरता के साथ प्रकृति को देखने की एक दृष्टि भी सामने रखती है। बाघ और मोर से लेकर सारस, बगुला, किंगफिशर, इंडियन रोलर और नाइट जार जैसे पक्षियों की तस्वीरों में प्रकृति की विविधता दिखाई देती है। कहीं रंग आकर्षित करते हैं, कहीं पक्षी की मुद्रा, कहीं उसकी उड़ान और कहीं प्राकृतिक परिवेश।इन तस्वीरों के पीछे वर्षों का अवलोकन, प्रकृति के बीच बिताया समय और सही क्षण को पकड़ने की कोशिश दिखाई देती है।
प्रदर्शनी 27 और 28 सितंबर को सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक प्रीतमललाल दुआ हॉल, रीगल चौराहा के पास, एमजी रोड, इंदौर में देखी जा सकती है। प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ ही शहर के पर्यावरण प्रेमी, फोटोग्राफर, पक्षी विशेषज्ञ और कला प्रेमी बड़ी संख्या में इसे देखने पहुँच रहे हैं।