Year: 2025

पंडित छन्नूलाल मिश्रा : ठुमरी और कजरी के लोक स्वर की विदाई

बनारस घराने की ठुमरी परंपरा के जीवंत स्तंभ और पद्मभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके स्वर में ठुमरी, कजरी, चैती और दादरा का वह अद्वितीय संगम था जिसने शास्त्रीयता को लोकजीवन की…

हिंद स्वराज से जलवायु संकट तक : गांधी की चेतावनी और आज की दुनिया

महात्मा गांधी ने हिंद स्वराज में जिस ‘सभ्यता’ को हालात कहा था, वही आज के जलवायु संकट की जड़ बन चुकी है। बापू ने सौ साल पहले चेतावनी दी थी कि अगर दुनिया यूरोप-अमेरिका के उपभोगवादी रास्ते पर चली, तो…

सौ साल की सादगी, सेवा और संघर्ष का सफ़र – समाजवादियों के पितामह जी.जी. पारिख को अंतिम सलाम

मुंबई, 2 अक्‍टूबर। देश ने आज स्वतंत्रता संग्राम के उन अंतिम योद्धाओं में से एक को खो दिया। वरिष्ठ समाजवादी नेता, चिकित्सक, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी डॉ. गुणवंतराय गणपतलाल राय पारिख, जिन्हें सब प्रेम से जी.जी. पारिख कहते थे, का…

गांधीजी का महात्मा प्रबंधकीय कौशल

प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों को गांधी के आंदोलनों, खासकर उनकी तैयारी के संदर्भ में देखें तो बहुत स्पष्ट रूप से उनका अमल दिखाई देता है। इस लिहाज से गांधी उस प्रबंधन के कारगर गुरु माने जा सकते हैं जिसे अनेक…

गांधी विचार : वैश्विक संकटों का समाधान

महापुरुषों की जयंती अक्सर उनके गुणगान तक सीमित रह जाती है, लेकिन आज की वैश्विक चुनौतियाँ—अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, जलवायु संकट और बढ़ते हिंसक संघर्ष—यह साफ़ करती हैं कि गांधी विचारों की अनदेखी संभव नहीं। उनका दर्शन केवल स्वतंत्रता आंदोलन का…

झारखंड : मधुपुर पधारे गांधी हमारे, सौ साल बेमिसाल

झारखंड के मधुपुर में महात्मा गांधी के ऐतिहासिक आगमन की शताब्दी पर वर्षभर चलने वाले समारोह की शुरुआत हो रही है। यह आयोजन न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए अहम है, क्योंकि बापू केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि…

गांधी जयंती : महात्‍मा गांधी महज़ सिद्धांत नहीं सरल व्यवहार है

2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में जन्मे महात्मा गांधी आज भी पूरी मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। सत्य और अहिंसा को जीवन का आधार मानते हुए उन्होंने भयमुक्त और श्रमशील जीवन का संदेश दिया। सादगी, स्वावलम्बन और…

गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर ‘पहली तारीख’ में कला और कविता का संगम

भोपाल, 1 अक्‍टूबर। गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर ‘पहली तारीख’ का 18वाँ आयोजन हर बार की तरह गांधी भवन, एकता परिषद में हुआ। इस बार का आयोजन कला, कविता और संवाद का अनूठा संगम साबित हुआ। प्रसिद्ध कलाकार विक्रम…

दशहरे पर पूजनीय-शमी : विजय, परंपरा और पर्यावरण का अमर प्रतीक

दशहरे पर शमी पूजन की परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है बल्कि इतिहास, लोकजीवन और पर्यावरणीय महत्व को भी दर्शाती है। राजस्थान में खेजड़ी कहलाने वाला यह वृक्ष रेगिस्तान का राजा माना जाता है, जिसकी छाया, फलियां और…

एक कदम गांधी के साथ : संविधान, लोकतंत्र और इंसानियत की सहयात्रा

सर्व सेवा संघ ने सहमना संगठनों और सहयोगियों के साथ राजघाट, वाराणसी से दिल्ली तक संविधान मार्च की पदयात्रा की घोषणा की है। गांधी जयंती (2 अक्टूबर) से शुरू होकर संविधान दिवस (26 नवंबर) को जंतर-मंतर पर संपन्न होने वाली…