Month: November 2025

हमें चंपारण वाला गांधी चाहिए, यात्रा ने उस चंपारण वाले गांधी को जगाया है

56 दिवसीय ‘’एक कदम गांधी के साथ’’ पैदल यात्रा का समापन नईदिल्‍ली, 26 नवंबर। वाराणसी से 2 अक्तूबर गांधी जयंती पर प्रारंभ हुई यात्रा “एक कदम गांधी के साथ’  का समापन 26 नवंबर संविधान दिवस पर दिल्ली के जंतर मंतर…

चरम मौसम की घटनाएं जानलेवा साबित हो रहा है

भारत में चरम मौसम घटनाओं की रफ्तार भयावह स्तर तक बढ़ चुकी है। हीटवेव, बाढ़, चक्रवात, बादल फटना और बिजली गिरने जैसी आपदाएँ अब लगभग पूरे साल देश के किसी न किसी हिस्से को प्रभावित कर रही हैं। इनकी बढ़ती…

विचार : भाषा की भद्द पीटने वाले चुनाव  

क्या भाषा की बरबादी में राजनीतिक नेतृत्व, खासकर सत्तानशीन नेतृत्व की भी कोई भूमिका होती है? आपस के बहस-मुबाहिसों से लगाकर चुनावी सभाओं तक में जिस अदा से जैसी भाषा का उपयोग किया जाता है वह उसे लगातार गर्त में…

लोकतांत्रिक आत्मा का जीवंत घोषणापत्र है संविधान

26 नवम्बर भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का वह ऐतिहासिक क्षण है, जब देश ने समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर आधारित अपने भविष्य की दिशा तय की। संविधान दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उस आधुनिक चेतना का सम्मान है,…

लेबर कोड अधिसूचना पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की तीखी प्रतिक्रिया, 26 नवंबर को देशव्यापी प्रतिरोध का आह्वान

नईदिल्‍ली, 25 नवंबर। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच ने 21 नवंबर से लागू किए गए इन श्रमिक-विरोधी और पूँजीपति-परस्त लेबर कोड्स की एकतरफा और मनमानी घोषणा की कड़े शब्दों में निंदा की है। और इसे देश के मेहनतकशों के…

लेबर कोड 2025 : श्रमिक गरिमा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक निर्णायक मोड़

लेबर कोड 2025 केवल कानून में बदलाव नहीं, बल्कि भारत के श्रम परिदृश्य में संरचनात्मक सुधार की शुरुआत है। न्यूनतम वेतन की एकरूपता, स्वास्थ्य सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूरों के लिए नई गारंटियाँ—इन सबके बावजूद असली…

बिहार चुनाव : सवाल तो जीतने वालों पर भी हैं

अब जब दुनिया-जहान को मथने वाले बिहार विधानसभा के चुनाव जीतकर ‘एनडीए’ की सरकार बन गई है, पूरी चुनावी प्रक्रिया के निहितार्थों पर बात की जानी चाहिए। मसलन,क्या चुनाव जीतने का पवित्र कार्य हो जाने के बाद नीतीश कुमार और…

कॉरिडोर में कृष्ण : ‘कुंज गलियों’ का पर्यटन

धर्मांध भीड को अपने कर्मकांडों की खातिर ज्यादा जगह की जरूरत होती है और इस तर्क पर आजकल देशभर के प्राचीन धार्मिक स्थलों को भव्य ‘लोक’ में तब्दील करके उन्हें विस्तार दिया जा रहा है। अयोध्या, बनारस, प्रयागराज, उज्जैन आदि…

धीरेन्द्र मजूमदार : समग्र ग्राम सेवा के शास्त्री, मिस्त्री और लोक-यात्रा के महायात्री

धीरेन्द्र मजूमदार भारतीय रचनात्मक आंदोलन के उन तेजस्वी व्यक्तित्वों में थे, जिनमें विचार की पारदर्शिता और कर्म की प्रतिबद्धता अद्भुत सामंजस्य के साथ प्रवाहित होती थी। धीरेन्द्रदा के नाम से पहचाने जाने वाले इस गांधीवादी कार्यकर्ता ने साधना, सेवा और…

सच्चिदाजी : सत्तावन का जज्बा और लीची की मिठास

सच्चिदानंद सिन्हा के निधन के साथ भारतीय समाजवादी चिंतन की एक ऐसी ज्योति बुझ गई है, जिसकी रोशनी पीढ़ियों को दिशा देती रही। मनिका के इस तपस्वी बुद्धिजीवी ने ज्ञान को साधना, गरीबी को संकल्प और लेखन को संघर्ष बनाया।…