Year: 2022

बगैर पर्यावरण स्वीकृति के बना दिया आंवलिया बांध, डूबा दीं सैकड़ों किसानों की जमीनें

पर्यावरण मंत्रालय ने उल्लंघन परियोजना घोषित कर रोका काम, परियोजना की पर्यावरण अर्जी का प्रकरण किया बंद खंडवा । केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा खंडवा जिले में बन रही आंवलिया मध्यम सिंचाई परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी की अर्जी का…

एपिसोड : हमारा पैसा हमारा हिसाब

क्या है LIC आईपीओ के पीछे की कहानी? 5% शेयर की बिक्री बस एक शुरुआत है । अपने कॉर्पोरेट दोस्तों के लिए सब कुछ दाव पर लगा देने वाली सरकार क्या 5% पर रुकेगी? अब तक LIC के पैसे से…

जो तोड़ने से भी न टूटे वह गांधी है

गांधी सामयिक हैं, यह बात नारों-गीतों-मूर्तियों-समारोहों-उत्सवों से नहीं, समस्याओं के निराकरण से साबित करनी होगी. जो गांधी को चाहते व मानते हैं उनके लिए गांधी एक ही रास्ता बना व बता कर गए हैं : अपने भरसक ईंमानदारी व तत्परता…

गांधी की कस्तूरबा

ऐसा कहा और माना जाता है कि मोहनदास करमचंद गांधी के महात्मा गांधी में तब्दील होने का अधिकांश श्रेय उनकी पत्नी कस्तूरबा को जाता है। कैसा था, गांधी के संग-साथ का उनका जीवन? कैसे वे खुद कस्तूर बाई से बा…

बंधुआ मजदूरी से मुक्‍त हुई युवती ने उजागर किया आदिवासी महिलाओं के साथ हो रहा यौन शोषण और हिंसा

बड़वानी लौटकर आदिवासियों ने की शासन-प्रशासन से कार्यवाही की मांग बड़वानी । 16 वर्षीय युवती द्वारा बंधुआ मजदूरी के दौरान उसके साथ ठेकेदारों द्वारा सामूहिक बलात्कार की शिकायत से आदिवासी महिलाओं के साथ मजदूरी के दौरान होने वाली प्रताड़ना की रोंगटे खड़े…

अमेरिका यूक्रेन सहित सोवियत संघ से अलग हुए देशों में कठपुतली सरकारें बिठाने का षड्यंत्र करता रहा : डॉ. अजय पटनायक

रूस और यूक्रेन के बीच विवाद- असरात, आशंकाएं और संभावनाएं विषय पर वेबिनार का आयोजन रूस और यूक्रेन दोनों जुड़वा देश रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूक्रेन सोवियत संघ में शामिल हुआ। सन 1990 में रूस से अलग…

जलकुंभी : कचरे से कंचन तक की यात्रा

भारत में जलकुंभी के कारण जल स्रोतों को होने वाले संकट के कारण इसे ‘बंगाल का आतंक’ भी कहा जाता है। यह एकबीजपत्री, जलीय पौधा है, जो ठहरे हुए पानी में काफी तेज़ी से फैलता है और पानी से ऑक्सीजन…

क्‍या हम बचा पाएंगे अपने जंगल ?

वनों के महत्व को समझने-समझाने में हम लगातार चूक कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि हम लगातार वनों को खोते जा रहे हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण चाहे कितना भी दावा कर लें, पर वनों का प्रतिशत…

हिजाब तो एक बहाना है ! निशाने पर कुछ और है ?

सवाल अब बुर्के या हिजाब के पहनने या नहीं पहनने का ही नहीं बल्कि यह भी बन गया है कि क्या एक विचारधारा विशेष के प्रति प्रतिबद्ध उत्तेजक भीड़ ही यह तय करने वाली है कि किसे क्या पहनना या…

‘गायब’ हो गए देश के जंगल, भारतीय वन सर्वेक्षण के आकलन की पड़ताल में खासा अंतर

इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट-2021 के अनुसार, देश में ‘रिकॉर्डेड’ वन-क्षेत्र 7.75 करोड़ हेक्टेयर है, जबकि इस जमीन पर वन-क्षेत्र के मौजूदगी 5.16 करोड़ हेक्टेयर में ही है। इसका मतलब यह है कि वनों के रूप में वर्गीकृत क्षेत्र का…